{"_id":"6abf668500bf0b40b302eb60","slug":"bihar-jeevika-turns-lives-around-rita-devi-s-story-shows-how-rural-women-became-self-reliant-2026-10-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांधी जयंती: 20 साल पहले की योजना, जिसने बिहार में दो अक्तूबर को महिलाओं के लिए बना दिया यादगार; जानें कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांधी जयंती: 20 साल पहले की योजना, जिसने बिहार में दो अक्तूबर को महिलाओं के लिए बना दिया यादगार; जानें कहानी
Fri, 02 Oct 2026 01:38 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Fri, 02 Oct 2026 01:38 PM IST
20 साल पहले शुरू हुई जीविका से बिहार की 1.81 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं। भोजपुर की रीता देवी की कहानी बताती है कि कैसे अवसर और हौसले ने ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर बदल दी। आइये जानते हैं पूरा मामला...
विज्ञापन
रीता देवी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पति की मौत के बाद घर से बाहर निकलकर काम करने पर समाज के ताने सुनने वाली भोजपुर की रीता देवी आज आत्मनिर्भर हैं। वर्ष 2016 में जीविका से जुड़ने के बाद उन्होंने न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि अपने साथ 10 अन्य महिलाओं को भी जोड़कर आगे बढ़ने का रास्ता बनाया। रीता देवी की यह कहानी बिहार में 20 वर्षों से चल रही जीविका की उस यात्रा को दिखाती है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया गया है।
1.81 करोड़ से अधिक महिलाएं जीविका से जुड़ीं
गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्तूबर 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बिहार ग्रामीण आजीविका परियोजना यानी जीविका की शुरुआत की थी। दो दशक की यात्रा में अब 1.81 करोड़ से अधिक महिलाएं जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं। सरकार की ओर बताया कि हमारा लक्ष्य जीविका से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत कर लखपति बनाना है। ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने जीविका के 20 वर्ष पूरे होने पर जीविका दीदियों को बधाई देते हुए कहा कि इस यात्रा ने महिलाओं के लिए नए अवसरों और संभावनाओं के कई द्वार खोले हैं।
खेत में मजदूरी से 20 हजार रुपये महीने तक का सफर
भोजपुर जिले के छोटकी संदिया गांव की रीता देवी वर्ष 2016 से जीविका से जुड़ी हैं। वह बताती हैं कि जीविका से जुड़ने से पहले वह खेत में काम करती थीं। पति के निधन के बाद जब उन्होंने घर से बाहर निकलकर काम करना शुरू किया तो आसपास के लोगों के ताने भी सुनने पड़े। रीता देवी ने कहा कि लोग उनके बाहर निकलकर काम करने पर सवाल उठाते थे। कई लोग तरह-तरह की बातें कहते थे। उस समय उनकी फुआ की बेटी ने उनका हौसला बढ़ाया और समझाया कि वह अपना काम करती रहें और समाज की बातों की परवाह न करें।
विज्ञापन
मेहनत और हौसले से बदलाव की कहानी
जीविका के 20 वर्ष पूरे होने पर ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका की इस यात्रा की सबसे बड़ी ताकत जीविका दीदियों की मेहनत, लगन और लगातार आगे बढ़ने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के हुनर और कौशल को देखते हुए रोजगार के क्षेत्र में नए काम किए जा रहे हैं। रीता देवी की कहानी बताती है कि अवसर और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर और हौसले के दम पर आत्मनिर्भरता की राह बना सकती हैं। दो दशक पहले शुरू हुई जीविका की यात्रा आज लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक और सामाजिक बदलाव का माध्यम बनी हुई है।
विज्ञापन
1.81 करोड़ से अधिक महिलाएं जीविका से जुड़ीं
गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्तूबर 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बिहार ग्रामीण आजीविका परियोजना यानी जीविका की शुरुआत की थी। दो दशक की यात्रा में अब 1.81 करोड़ से अधिक महिलाएं जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं। सरकार की ओर बताया कि हमारा लक्ष्य जीविका से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत कर लखपति बनाना है। ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने जीविका के 20 वर्ष पूरे होने पर जीविका दीदियों को बधाई देते हुए कहा कि इस यात्रा ने महिलाओं के लिए नए अवसरों और संभावनाओं के कई द्वार खोले हैं।
विज्ञापन
खेत में मजदूरी से 20 हजार रुपये महीने तक का सफर
भोजपुर जिले के छोटकी संदिया गांव की रीता देवी वर्ष 2016 से जीविका से जुड़ी हैं। वह बताती हैं कि जीविका से जुड़ने से पहले वह खेत में काम करती थीं। पति के निधन के बाद जब उन्होंने घर से बाहर निकलकर काम करना शुरू किया तो आसपास के लोगों के ताने भी सुनने पड़े। रीता देवी ने कहा कि लोग उनके बाहर निकलकर काम करने पर सवाल उठाते थे। कई लोग तरह-तरह की बातें कहते थे। उस समय उनकी फुआ की बेटी ने उनका हौसला बढ़ाया और समझाया कि वह अपना काम करती रहें और समाज की बातों की परवाह न करें।
विज्ञापन
बिहार: गयाजी में पिंडदान के बीच सेवा की मिसाल, पंजाब के सेवादारों का लंगर; रोज पांच हजार श्रद्धालुओं को भोजन
रीता देवी ने बताया कि जीविका से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का नया रास्ता मिला। अब उनके साथ 10 अन्य महिलाएं भी जुड़ी हैं। वह कहती हैं कि आज 20 हजार रुपये महीने की कमाई के बारे में सोचना भी उनके लिए मुश्किल नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में पति के निधन के बाद जीविका से जुड़कर जब उन्होंने घर से बाहर निकलना शुरू किया था, तब समाज का विरोध झेलना पड़ा। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपने काम और मेहनत के दम पर अपनी पहचान बनाई। रीता देवी कहती हैं कि जीविका ने मुझे आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर होने का एक नया रास्ता दिया। बिहार सरकार ने वाकई हमारी जिंदगी बदल दी है। अभी हम लोग और आगे बढ़ेंगे।"मेहनत और हौसले से बदलाव की कहानी
जीविका के 20 वर्ष पूरे होने पर ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका की इस यात्रा की सबसे बड़ी ताकत जीविका दीदियों की मेहनत, लगन और लगातार आगे बढ़ने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के हुनर और कौशल को देखते हुए रोजगार के क्षेत्र में नए काम किए जा रहे हैं। रीता देवी की कहानी बताती है कि अवसर और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर और हौसले के दम पर आत्मनिर्भरता की राह बना सकती हैं। दो दशक पहले शुरू हुई जीविका की यात्रा आज लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक और सामाजिक बदलाव का माध्यम बनी हुई है।