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बिहार: चार सितारों का राष्ट्रीय मंच पर जलवा, ‘भक्षक’ के संजय मिश्रा समेत इनको मिला सम्मान
Tue, 22 Sep 2026 07:32 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Tue, 22 Sep 2026 07:32 PM IST
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बिहार से जुड़े चार फिल्मी व्यक्तित्व सम्मानित हुए। संजय मिश्रा को ‘भक्षक’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता, कमलेश कुमार मिश्रा और मिंटी मिश्रा को ‘काकोरी’ के लिए तथा संजीव श्रीवास्तव को हिंदी के सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का पुरस्कार मिला। समारोह पहली बार दिल्ली से बाहर गुजरात के एकता नगर में आयोजित हुआ।
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बिहार के चार कलाकार हुए सम्मानित
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सिनेमा की दुनिया में बिहार की प्रतिभाओं ने एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान दर्ज कराई है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बिहार से जुड़े चार नाम अलग-अलग विधाओं में सम्मानित हुए हैं। इनमें अभिनेता संजय मिश्रा, फिल्म निर्देशक कमलेश कुमार मिश्रा, निर्माता मिंटी मिश्रा और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव शामिल हैं। वर्ष 2024 के भारतीय सिनेमा में उत्कृष्ट कार्यों के लिए चुने गए विजेताओं को मंगलवार 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मानित किया।
दरभंगा के गांव से मायानगरी तक पहुंचे संजय मिश्रा
इन चार नामों में अभिनेता संजय मिश्रा की उपलब्धि खास चर्चा में है। दरभंगा जिले के मनीगाछी प्रखंड के नारायणपुर गांव से जुड़ी जड़ों वाले संजय मिश्रा ने हिंदी सिनेमा में तीन दशक से ज्यादा का सफर तय किया है। ‘ऑफिस ऑफिस’ के शुक्लाजी से लेकर ‘आंखों देखी’, ‘मसान’ और ‘वध’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय की औपचारिक ट्रेनिंग लेने वाले संजय मिश्रा अपने सहज और जमीनी अभिनय के लिए पहचाने जाते हैं।
‘भक्षक’ में कैमरामैन भास्कर सिन्हा का किरदार
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले से प्रेरित फिल्म ‘भक्षक’ में संजय मिश्रा ने भास्कर सिन्हा की भूमिका निभाई है। भास्कर फिल्म की पत्रकार वैषाली सिंह के साथ काम करने वाला कैमरामैन है और उसकी जांच में सहयोग करता है। फिल्म में संजय मिश्रा के किरदार की संवेदनशीलता और जमीनी अंदाज को दर्शकों ने भी सराहा। इसी भूमिका के लिए उन्हें 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का सम्मान मिला।
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गोपालगंज के कमलेश और मिंटी मिश्रा को ‘काकोरी’ के लिए सम्मान
गोपालगंज जिले के हथुआ प्रखंड के सिंगहा गांव से जुड़े निर्देशक कमलेश कुमार मिश्रा और निर्माता मिंटी मिश्रा को फिल्म ‘काकोरी’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। फिल्म 1925 के काकोरी रेल एक्शन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म के लिए ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुस्तकों, पुराने समाचार पत्रों और इतिहासकारों की मदद ली गई। कमलेश मिश्रा के लिए यह दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार है। इससे पहले उनकी गैर-फीचर फिल्म ‘मधुबनी : द स्टेशन ऑफ कलर्स’ को भी राष्ट्रीय सम्मान मिल चुका है। ‘काकोरी’ के लिए कमलेश और मिंटी मिश्रा को संबंधित श्रेणी में रजत कमल से सम्मानित किया गया।
मुजफ्फरपुर के संजीव श्रीवास्तव को फिल्म समीक्षा में स्वर्ण कमल
बिहार से सम्मान पाने वाले चौथे नाम मुजफ्फरपुर से जुड़े फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव हैं। उन्हें हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया है। इस श्रेणी में उन्हें स्वर्ण कमल और निर्धारित पुरस्कार राशि प्रदान की गई। संजीव श्रीवास्तव लंबे समय से पत्रकारिता और फिल्म लेखन से जुड़े रहे हैं और सिनेमा पर कई पुस्तकें भी लिख चुके हैं।
पहली बार दिल्ली से बाहर हुआ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का समारोह इस बार इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसे पहली बार दिल्ली से बाहर आयोजित किया गया। गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में हुए समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजेताओं को सम्मानित किया। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत 1954 में हुई थी। इस संस्करण में 2024 में प्रमाणित फिल्मों और सिनेमा से जुड़े कार्यों को सम्मानित किया गया।
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दरभंगा के गांव से मायानगरी तक पहुंचे संजय मिश्रा
इन चार नामों में अभिनेता संजय मिश्रा की उपलब्धि खास चर्चा में है। दरभंगा जिले के मनीगाछी प्रखंड के नारायणपुर गांव से जुड़ी जड़ों वाले संजय मिश्रा ने हिंदी सिनेमा में तीन दशक से ज्यादा का सफर तय किया है। ‘ऑफिस ऑफिस’ के शुक्लाजी से लेकर ‘आंखों देखी’, ‘मसान’ और ‘वध’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय की औपचारिक ट्रेनिंग लेने वाले संजय मिश्रा अपने सहज और जमीनी अभिनय के लिए पहचाने जाते हैं।
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‘भक्षक’ में कैमरामैन भास्कर सिन्हा का किरदार
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले से प्रेरित फिल्म ‘भक्षक’ में संजय मिश्रा ने भास्कर सिन्हा की भूमिका निभाई है। भास्कर फिल्म की पत्रकार वैषाली सिंह के साथ काम करने वाला कैमरामैन है और उसकी जांच में सहयोग करता है। फिल्म में संजय मिश्रा के किरदार की संवेदनशीलता और जमीनी अंदाज को दर्शकों ने भी सराहा। इसी भूमिका के लिए उन्हें 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का सम्मान मिला।
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गोपालगंज के कमलेश और मिंटी मिश्रा को ‘काकोरी’ के लिए सम्मान
गोपालगंज जिले के हथुआ प्रखंड के सिंगहा गांव से जुड़े निर्देशक कमलेश कुमार मिश्रा और निर्माता मिंटी मिश्रा को फिल्म ‘काकोरी’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। फिल्म 1925 के काकोरी रेल एक्शन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म के लिए ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुस्तकों, पुराने समाचार पत्रों और इतिहासकारों की मदद ली गई। कमलेश मिश्रा के लिए यह दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार है। इससे पहले उनकी गैर-फीचर फिल्म ‘मधुबनी : द स्टेशन ऑफ कलर्स’ को भी राष्ट्रीय सम्मान मिल चुका है। ‘काकोरी’ के लिए कमलेश और मिंटी मिश्रा को संबंधित श्रेणी में रजत कमल से सम्मानित किया गया।
मुजफ्फरपुर के संजीव श्रीवास्तव को फिल्म समीक्षा में स्वर्ण कमल
बिहार से सम्मान पाने वाले चौथे नाम मुजफ्फरपुर से जुड़े फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव हैं। उन्हें हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया है। इस श्रेणी में उन्हें स्वर्ण कमल और निर्धारित पुरस्कार राशि प्रदान की गई। संजीव श्रीवास्तव लंबे समय से पत्रकारिता और फिल्म लेखन से जुड़े रहे हैं और सिनेमा पर कई पुस्तकें भी लिख चुके हैं।
पहली बार दिल्ली से बाहर हुआ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का समारोह इस बार इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसे पहली बार दिल्ली से बाहर आयोजित किया गया। गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में हुए समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजेताओं को सम्मानित किया। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत 1954 में हुई थी। इस संस्करण में 2024 में प्रमाणित फिल्मों और सिनेमा से जुड़े कार्यों को सम्मानित किया गया।