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व्यापार: बासमती चावल का निर्यात घटा, गैर-बासमती ने संभाला मोर्चा, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का पड़ा असर

Wed, 23 Sep 2026 06:41 PM IST
द बोनस बोनस डेस्क, नई दिल्ली
बोनस डेस्क, नई दिल्ली Published by: द बोनस Updated Wed, 23 Sep 2026 06:41 PM IST
सार
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पश्चिम एशिया में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव से भारत के बासमती चावल निर्यात में 9.4% गिरावट आई, लेकिन गैर-बासमती निर्यात 20.7% बढ़ा। जानिए चावल निर्यात के ताजा आंकड़े और पूरी कहानी।

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Export of Basmati Rice Declined due to ongoing west Asia Conflict Know about this
बासमती चावल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुनिया भर में अपनी खुशबू और स्वाद के लिए मशहूर भारतीय बासमती चावल की राह में इस समय युद्ध के बादल रोड़ा बन गए हैं। मध्य पूर्व एशिया में चल रहे युद्ध और तनावपूर्ण हालात का सीधा असर अब देश के कृषि निर्यात पर दिखने लगा है। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भले ही देश से कुल चावल का निर्यात बढ़ा हो, लेकिन बासमती चावल के कारोबार में खासी गिरावट आई है।
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वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जुलाई के दौरान देश से कुल 74.38 लाख टन चावल का निर्यात किया गया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 67.24 लाख टन था। इस तरह, कुल चावल निर्यात में करीब 7.14 लाख टन (यानी 10.6 फीसदी) की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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लेकिन इस कुल उछाल के पीछे केवल गैर-बासमती चावल की ताकत है, जबकि बासमती इस दौड़ में पिछड़ गया है।

बासमती निर्यात में गिरावट

चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल से जुलाई) के दौरान देश से 20.35 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 22.47 लाख टन था। इस तरह, बासमती चावल के निर्यात में सीधे तौर पर 2.12 लाख टन की कमी आई है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो इसमें करीब 9.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
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राइस एक्सपोर्टर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. मुकेश जैन का कहना है कि बासमती चावल का एक बड़ा हिस्सा मुख्य रूप से मध्य एशिया के देशों में भेजा जाता है। मध्य पूर्व एशिया में युद्ध के हालात होने के कारण इन देशों के साथ होने वाला व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसका सीधा असर बासमती के ऑर्डर और शिपमेंट पर पड़ा है।

गैर-बासमती चावल ने संभाला मोर्चा

कुल चावल निर्यात में जो बढ़ोतरी दिख रही है, उसकी मुख्य वजह गैर-बासमती चावल रहा है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में गैर-बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 54.03 लाख टन पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 44.77 लाख टन था। यानी गैर-बासमती के निर्यात में 9.26 लाख टन (करीब 20.7 फीसदी) का शानदार इजाफा हुआ है।


गैर-बासमती चावल की प्रमुख निर्यात किस्मों में आईआर-64 और कॉमन मोटा चावल शामिल हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जीराफूल और नगरी दुबराज, उत्तर प्रदेश का काला नमक चावल, पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग और सोना मसूरी जैसी प्रीमियम व क्षेत्रीय किस्मों के वैश्विक बाजार में विस्तार से देश के वैल्यू-एडेड चावल निर्यात को और मजबूती मिल सकती है।

भारत का चावल निर्यात (अप्रैल से जुलाई के आंकड़े)

(आंकड़े लाख टन में, स्रोत: वाणिज्य मंत्रालय)
 
चावल का प्रकार वित्त वर्ष 2026-27  वित्त वर्ष 2025-26 
गैर-बासमती  54.03 44.77
बासमती  20.35 22.47
कुल निर्यात 74.38 67.24
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