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ऊर्जा सुरक्षा: कोयला गैसीकरण बचाएगा 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा, बोले कोल मिनिस्ट्री के सचिव

Thu, 05 Nov 2026 03:06 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 05 Nov 2026 03:06 PM IST
सार
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  • कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने बताया कि कोयला गैसीकरण परियोजनाओं से भारत 5-7 साल में 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा सकता है।
  • केंद्र ने 46,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन दिए हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Coal Gasification Can Save Rs 1.5 Lakh Crore in Forex: Vikram Dev Dutt
कोयला खदान। - फोटो : PTI

विस्तार

कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि कोयला गैसीकरण परियोजनाओं से भारत अगले पांच से सात वर्षों में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। यह बचत आयात प्रतिस्थापन के माध्यम से होगी। केंद्र सरकार ने कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए दो योजनाओं के तहत 46,000 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रोत्साहन देने की प्रतिबद्धता जताई है। यह बात दत्त ने दक्षिण गोवा में खनन और कोयला क्षेत्र में सुधारों पर खनन मंत्रियों के चौथे सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

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कोयला गैसीकरण कोयले को सिंथेटिक गैस (सिन्गैस) में बदलता है। इससे भारत द्वारा बड़ी मात्रा में आयात किए जाने वाले कई उत्पाद बन सकते हैं। दत्त ने कोयला गैसीकरण को औद्योगिक विविधीकरण और क्षेत्रीय विकास का महत्वपूर्ण साधन बताया। उन्होंने कोयला उत्पादक राज्यों से निवेश आकर्षित करने के लिए सहायक नीतियां बनाने का आग्रह किया। दत्त ने 'विवेक के साथ खनन' को जिम्मेदार खनिकों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बताया। उन्होंने इस क्षेत्र की रोजगार क्षमता पर भी जोर दिया। गैसीकरण संयंत्र अनुप्रवाह उद्योगों में रोजगार सृजित करेंगे। यह कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों को लाभ देगा। साथ ही, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा और अतिरिक्त आर्थिक गतिविधि लाएगा।

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कोयला गैसीकरण के लाभ क्या हैं?

कोयला गैसीकरण से मेथनॉल, इथेनॉल और अमोनियम नाइट्रेट जैसे उत्पाद बनाए जा सकते हैं। ये विस्फोटक और डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) आधारित इस्पात उत्पादन के लिए भी इनपुट के रूप में उपयोग होते हैं। ओडिशा और महाराष्ट्र ने पहले ही कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन नीतियां शुरू कर दी हैं। ओडिशा के अंगुल जिले और महाराष्ट्र के चंद्रपुर क्षेत्र में परियोजनाएं स्थापित हो रही हैं। झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे कोयला समृद्ध राज्यों से भी निवेशकों को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां बनाने का आह्वान किया गया है। इन परियोजनाओं के लिए पर्याप्त प्रारंभिक पूंजी निवेश और राज्य स्तर पर बिजली, जल आपूर्ति तथा कराधान में सहयोग की आवश्यकता होती है।

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खनन क्षेत्र में क्या सुधार हुए हैं?

दत्त ने बताया कि 2020 में शुरू की गई वाणिज्यिक खनन नीति ने कोयले के अंतिम उपयोग और बिक्री पर प्रतिबंध हटा दिए हैं। इससे निजी भागीदारी के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ है। 15 दौर की नीलामी के माध्यम से 137 खदानें आवंटित की गई हैं। कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानें भारत के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 20 फीसदी हिस्सा हैं। सरकार ने खनिज अन्वेषण के लिए अधिकृत एजेंसियों की संख्या 13 से बढ़ाकर 57 कर दी है। इनमें 44 मान्यता प्राप्त निजी एजेंसियां शामिल हैं। दत्त ने राज्य सरकारों से कोयला ब्लॉकों को चालू करने के लिए भूमि अधिग्रहण, जन सुनवाई और वैधानिक मंजूरी जैसी अनुमतियों में तेजी लाने का आग्रह किया।

पर्यावरणीय पहल और भविष्य की दिशा क्या है?

कोयला मंत्रालय ने तीन वर्षों में वैज्ञानिक समापन के लिए 147 खदानों की पहचान की है। इनमें से 43 को पहले ही वैज्ञानिक रूप से बंद किया जा चुका है। वैज्ञानिक खदान समापन का अर्थ केवल खदानों को तकनीकी रूप से सील करना नहीं है। इसका उद्देश्य खराब हुए वातावरण को बहाल करना और स्थानीय समुदायों की जरूरतों का आकलन करके खनन क्षेत्रों का पुनरुत्पादन करना भी है। मंत्रालय ने बंद खदानों के मूल्यांकन और पुनरुत्पादन को सुविधाजनक बनाने के लिए 'सुविकल्प' नामक एक डिजिटल उपकरण विकसित किया है। दत्त ने कहा कि कोयला क्षेत्र का भविष्य उत्पादन लक्ष्यों से आगे बढ़कर उत्पादकता, तकनीकी प्रगति, पारदर्शिता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने केंद्र, राज्य सरकारों, कोयला कंपनियों और अन्य हितधारकों के बीच अधिक समन्वय का भी आह्वान किया। इस अवसर पर केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी, खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी उपस्थित थे।

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