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यूपीआई: सरकार ने एमडीआर के लिए बाहरी दबाव और जीएसटी लगने के दावों को अफवाह बताया, जानिए बयान में क्या कहा गया
Thu, 17 Sep 2026 05:20 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Thu, 17 Sep 2026 05:20 PM IST
सरकारी सूत्रों ने एमडीआर और यूपीआई पर जीएसटी लागू होने की अफवाहों का खंडन किया। जानें कैसे इनपुट कर जमा का लाभ मिलेगा और रुपे कार्ड कैसे फायदेमंद होंगे। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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यूपीआई पर शुल्क।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
डिजिटल लेनदेन को लेकर बाजार में फैली कई अफवाहों पर सरकार ने विराम लगा दिया है। सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि 15 अक्तूबर को लागू हो रहे एमडीआर को लेकर कोई बाहरी दबाव नहीं है। साथ ही, यूपीआई पर जीएसटी लागू होने की बात को भी सरासर झूठ है।
सूत्रों के अनुसार, एमडीआर के कारण नकद लेनदेन में कोई खास वृद्धि नहीं दिख रही है। सरकार को पूरा भरोसा है कि नकद लेनदेन में कोई वृद्धि नहीं होगी। 15 अक्तूबर को एमडीआर लागू होने के बाद भी यूपीआई लेनदेन में गिरावट की उम्मीद नहीं है। शेयर बाजार में एमडीआर शुल्क लागू करने का निर्णय सरकार ने गहन विचार-विमर्श के बाद लिया है। 0.02 फीसदी एमडीआर शुल्क लगाने से पहले एसईबीआई, स्टॉक एक्सचेंजों और सभी हितधारकों से चर्चा की गई। एनपीसीआई लगातार रुपे डेबिट कार्डों को बढ़ावा दे रहा है। रुपे डेबिट कार्डों के उपयोग को एमडीआर से मुक्त रखा गया है। ये कार्ड अन्य कार्डों की तुलना में अधिक लाभप्रद साबित होंगे।
क्या यूपीआई लेनदेन पर जीएसटी लगेगा?
सरकारी सूत्रों ने बताया कि एमडीआर पर अलग से जीएसटी नहीं है। व्यवसाय एमडीआर भुगतान पर इनपुट कर जमा का दावा कर सकते हैं। यूपीआई लेनदेन पर लागू एमडीआर शुल्क पर नहीं जीएसटी लगाया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रवर्तन में मौजूद कमियों को दूर करने के प्रयास किए जाएंगे। सरकार ने भुगतान एग्रीगेटरों के साथ बातचीत की है।
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सरकार प्रभावी कार्यान्वयन की बारीकी से निगरानी करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यापारी शुल्क का बोझ उपभोक्ताओं पर न डालें। हालांकि, कारोबार भुगतान किए गए जीएसटी के मुकाबले इनपुट कर जमा का दावा कर सकेंगे। व्यवसायों के पास जीएसटी देयता को समायोजित करने का विकल्प भी है।
एमडीआर को लेकर बाहरी दबाव पर सरकार ने क्या कहा?
एमडीआर को किसी बाहरी दबाव में लागू किए जाने का आरोप पूरी तरह से झूठा और भ्रामक है। यदि कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो जीएसटी परिषद द्वारा इसकी जांच की जाएगी। सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। रुपे कार्डों को मिलने वाली छूट इसका एक बड़ा उदाहरण है।
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सूत्रों के अनुसार, एमडीआर के कारण नकद लेनदेन में कोई खास वृद्धि नहीं दिख रही है। सरकार को पूरा भरोसा है कि नकद लेनदेन में कोई वृद्धि नहीं होगी। 15 अक्तूबर को एमडीआर लागू होने के बाद भी यूपीआई लेनदेन में गिरावट की उम्मीद नहीं है। शेयर बाजार में एमडीआर शुल्क लागू करने का निर्णय सरकार ने गहन विचार-विमर्श के बाद लिया है। 0.02 फीसदी एमडीआर शुल्क लगाने से पहले एसईबीआई, स्टॉक एक्सचेंजों और सभी हितधारकों से चर्चा की गई। एनपीसीआई लगातार रुपे डेबिट कार्डों को बढ़ावा दे रहा है। रुपे डेबिट कार्डों के उपयोग को एमडीआर से मुक्त रखा गया है। ये कार्ड अन्य कार्डों की तुलना में अधिक लाभप्रद साबित होंगे।
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क्या यूपीआई लेनदेन पर जीएसटी लगेगा?
सरकारी सूत्रों ने बताया कि एमडीआर पर अलग से जीएसटी नहीं है। व्यवसाय एमडीआर भुगतान पर इनपुट कर जमा का दावा कर सकते हैं। यूपीआई लेनदेन पर लागू एमडीआर शुल्क पर नहीं जीएसटी लगाया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रवर्तन में मौजूद कमियों को दूर करने के प्रयास किए जाएंगे। सरकार ने भुगतान एग्रीगेटरों के साथ बातचीत की है।
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सरकार प्रभावी कार्यान्वयन की बारीकी से निगरानी करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यापारी शुल्क का बोझ उपभोक्ताओं पर न डालें। हालांकि, कारोबार भुगतान किए गए जीएसटी के मुकाबले इनपुट कर जमा का दावा कर सकेंगे। व्यवसायों के पास जीएसटी देयता को समायोजित करने का विकल्प भी है।
एमडीआर को लेकर बाहरी दबाव पर सरकार ने क्या कहा?
एमडीआर को किसी बाहरी दबाव में लागू किए जाने का आरोप पूरी तरह से झूठा और भ्रामक है। यदि कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो जीएसटी परिषद द्वारा इसकी जांच की जाएगी। सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। रुपे कार्डों को मिलने वाली छूट इसका एक बड़ा उदाहरण है।