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चीनी आयातकों को बड़ी राहत: सरकार ने प्रसंस्करण की समय सीमा दो महीने बढ़ाई, जानिए क्या है मतलब

Tue, 25 Aug 2026 08:15 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 25 Aug 2026 08:15 PM IST
सार
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भारत सरकार ने कच्चे चीनी के आयात नियमों में ढील दी है, प्रसंस्करण और घरेलू बिक्री की समय सीमा 31 अक्तूबर से और दो महीने के लिए बढ़ा दी है। इससे उद्योग को राहत मिलेगी और स्थानीय आपूर्ति बढ़ेगी। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 

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Govt Eases Raw Sugar Import Norms, Extends Processing Deadline
चीनी का आयात - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारत सरकार ने कच्चे चीनी के आयात से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण ढील दी है। उद्योग की चिंताओं को देखते हुए, आयातित चीनी के प्रसंस्करण और घरेलू बाजार में बिक्री की समय सीमा बढ़ा दी गई है। अब आयातकों को प्रवेश की तारीख से दो महीने का समय मिलेगा, जो पहले 31 अक्तूबर तय था।

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सरकार ने स्थानीय आपूर्ति बढ़ाने और खुदरा कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए 10 लाख टन कच्चे चीनी के आयात की अनुमति दी थी। पहले आयातकों को 31 अक्तूबर तक चीनी का प्रसंस्करण कर घरेलू बाजार में बेचने को कहा गया था। हालांकि, उद्योग ने संबंधित मंत्रालयों को बताया कि यह समय सीमा व्यावहारिक नहीं थी। उन्होंने ब्राजील में बंदरगाहों पर भीड़भाड़ और भारत तक माल पहुंचने में 40 दिन के माल ढुलाई समय का हवाला दिया।
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इन चिंताओं पर विचार करते हुए, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 24 अगस्त को एक शुद्धिपत्र जारी किया। इस शुद्धिपत्र में कच्चे चीनी के प्रसंस्करण और बिक्री की समय सीमा बढ़ाई गई है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (एनएफसीएसएफ) के प्रबंध निदेशक प्रकाश नायकनवरे ने इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक विकास बताया जो अधिक मिलों को आयात के लिए आवेदन करने को प्रोत्साहित करेगा।

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समय सीमा क्यों बढ़ाई गई?

उद्योग ने सरकार को बताया था कि 31 अक्तूबर की पिछली समय सीमा पूरी करना संभव नहीं था। ब्राजील के बंदरगाहों पर भीड़भाड़ के कारण माल ढुलाई में देरी हो रही थी। मात्रा की मंजूरी के बाद भी भारत तक माल पहुंचने में करीब 40 दिन लगते हैं। इन चुनौतियों को देखते हुए डीजीएफटी ने आयातकों को राहत देने का निर्णय लिया।

इस बदलाव से क्या लाभ होगा?

इस निर्णय से चीनी मिलों को आयातित कच्चे चीनी को सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति सुचारु बनी रहेगी। खुदरा कीमतें, जो मंगलवार को करीब 64 रुपये प्रति किलोग्राम थीं, उन पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। यह कदम जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के सरकारी उपायों का भी हिस्सा है।

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