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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: 'मतभेद दूर होने के करीब', विदेश मंत्री जयशंकर के बयान से फिर कैसे जगी उम्मीद?

Wed, 14 Oct 2026 02:46 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 14 Oct 2026 02:46 PM IST
सार
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते से जुड़ी एक बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि दोनों देश समझौते के अंतिम रूप देने से पहले मतभेद दूर करने के करीब हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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India-US Trade Deal: Differences Nearing Resolution, Foreign Minister's Big Statement
अमेरिका से व्यापार समझौते पर क्या बोले जयशंकर? - फोटो : amarujala.com

विस्तार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते पर मतभेद दूर करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह वार्ता अब समझौते के करीब पहुंचने के चरण में है। जयशंकर ने यह भी साफ किया कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के बुनियादी तत्वों में कोई बदलाव नहीं आया है।

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यह टिप्पणी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पहले के बयान के बाद आई है। सीतारमण ने कहा था कि व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है। हालांकि, उन्हें लगा था कि दोनों पक्ष बातचीत में ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं, जहां आगे रियायत देने की गुंजाइश सीमित है। मंगलवार शाम ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम’ में जयशंकर ने बातचीत की स्थिति पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत के व्यापार मंत्री, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) और संबंधित अधिकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।

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क्या समझौते के करीब हैं दोनों देश?

जयशंकर ने बताया कि व्यापार समझौते का मामला अब समझौते के करीब पहुंचने के चरण में है। भारत और अमेरिका 2025 की शुरुआत से इस प्रस्तावित समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य शुल्क संबंधी मतभेद दूर करना है। साथ ही, गैर-शुल्क बाधाओं को खत्म करना भी इसका लक्ष्य है। दोनों देशों के बाजारों में एक-दूसरे की पहुंच बढ़ाना भी समझौते का उद्देश्य है। भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसके सामान पर बेहतर शुल्क दरें लागू हों। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा था कि समझौता तुरंत होने की उम्मीद नहीं है।

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अमेरिका का नया आर्थिक रुख क्या है?

जयशंकर ने आर्थिक संबंधों को लेकर अमेरिका के नए रुख पर भी बात की। उन्होंने कहा कि शुल्क के इस्तेमाल को लेकर अमेरिका का रुख अब बुनियादी तौर पर अलग है। अमेरिका अब अपने यहां औद्योगिक उत्पादन को फिर से बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। वह अपनी अर्थव्यवस्था तक पहुंच की शर्तों को नए सिरे से तय करना चाहता है। शुल्क को लेकर पूरी बहस इसी बारे में है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था तक पहुंच और अमेरिका में फिर से औद्योगिक उत्पादन बढ़ाना, ये दोनों बातें आपस में जुड़ी हुई हैं।

रणनीतिक साझेदारी पर क्या असर?

विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका अपने गठबंधनों और संधियों से जुड़े संबंधों की शर्तों में बदलाव कर रहा है। इसका असर यूरोप और पूर्वी एशिया के कुछ देशों में अधिक दिख रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ कई मुद्दों पर भारत का काम जारी है। भारत आधिकारिक तौर पर अमेरिका का सहयोगी देश नहीं है, इसलिए गठबंधन की शर्तों को लेकर कोई मुद्दा नहीं है। अमेरिका के साथ भारत की मजबूत रणनीतिक साझेदारी है, जो महज एक साझेदारी है, गठबंधन नहीं। पिछले करीब 20 वर्ष में दोनों देशों ने साझा हितों की पहचान की है।

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