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Inflation: महंगाई दर 6-7 फीसदी तक पहुंच सकती है, जानिए रिपोर्ट में और क्या दावा किया गया
Mon, 12 Oct 2026 02:27 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 12 Oct 2026 02:27 PM IST
सिस्टमेटिक्स इक्वीटीज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महंगाई 6-7 फीसदी तक बढ़ सकती है। आरबीआई को इसे नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट में 100-150 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है, जिससे वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ेगा।
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खुदरा महंगाई दर
- फोटो : ANI
विस्तार
सिस्टमेटिक्स की एक रिपोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) महंगाई के जोखिमों को कम आंक रहा है। आने वाली तिमाहियों में महंगाई दर 6 से 7 फीसदी तक पहुंच सकती है। इसे नियंत्रित करने के लिए आरबीआई को ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक के महंगाई अनुमान इनपुट लागत में वृद्धि, परिवारों की बढ़ती महंगाई उम्मीदों और अर्थव्यवस्था में व्यापक मूल्य दबावों से जुड़े जोखिमों को कम करके आंकते हैं। सितंबर 2026 में आरबीआई के सर्वेक्षण में परिवारों की महंगाई उम्मीदें औसतन 9.1 फीसदी रहीं। यह मुख्य महंगाई दर से काफी अधिक है और लगातार बढ़ रही है। आरबीआई का महंगाई डिफ्यूजन इंडेक्स भी बताता है कि मूल्य दबाव कई श्रेणियों में फैल रहे हैं। इससे महंगाई का दायरा व्यापक होता जा रहा है। रिपोर्ट ने RBI के सीमित मांग और आपूर्ति-पक्ष दबावों के आकलन पर भी सवाल उठाए हैं। इसमें मजबूत घरेलू खपत, उच्च निवेश और जारी आपूर्ति बाधाओं के बीच असंगतियों का जिक्र है।
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क्या बढ़ेंगी कंपनियों की लागत और घटेंगे मुनाफे?
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंपनियों, खासकर निर्माताओं पर लागत का दबाव बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में गैर-वित्तीय कंपनियों की इनपुट लागत में सालाना आधार पर करीब 40 फीसदी की वृद्धि हुई। इसी अवधि में कच्चे तेल की कीमतों में 45 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनियों के सकल मार्जिन में 650-800 बेसिस पॉइंट की कमी आई। वे लागत वृद्धि का केवल एक हिस्सा ही ग्राहकों तक पहुंचा पाईं। रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि भोजन, ऊर्जा और उर्वरकों पर सरकारी सब्सिडी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के महंगाई संबंधी प्रभाव को कम किया था। जैसे ही यह वित्तीय सहायता कम होगी, आने वाले महीनों में पाइपलाइन महंगाई तेज हो सकती है।
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क्या रेपो दर में और वृद्धि होगी?
सिस्टमेटिक्स ने बताया कि आरबीआई की रेपो दर में 25-बेसिस-पॉइंट की वृद्धि से यह 5.50 फीसदी हो गई है। यह एक नए दर-वृद्धि चक्र की शुरुआत है। हालांकि, रिपोर्ट ने आगाह किया कि यह नवीनतम वृद्धि महंगाई को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है। खासकर तब जब उच्च महंगाई उम्मीदों के मुकाबले वास्तविक ब्याज दरें नकारात्मक बनी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई उम्मीद से अधिक बढ़कर 6-7 फीसदी तक पहुंच सकती है। कम से कम 1 फीसदी की वास्तविक दर बहाल करने के लिए और बढ़ोतरी की आवश्यकता होगी। इसके लिए रेपो दर को 6.5-7 फीसदी तक, यानी मौजूदा 5.5 फीसदी से 100-150 बेसिस पॉइंट ऊपर ले जाना होगा।
क्या वित्तीय बाजारों पर पड़ेगा दोहरा असर?
आरबीआई ने वित्त वर्ष 27 के लिए अपनी जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया है। यह पहली तिमाही में उम्मीद से अधिक 7.8 फीसदी की वृद्धि के बाद हुआ है। साथ ही, केंद्रीय बैंक ने अपनी महंगाई अनुमानों को भी ऊपर की ओर संशोधित किया है। वित्त वर्ष 27 की तीसरी तिमाही में महंगाई 6 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि पहले यह 5.9 फीसदी थी। सिस्टमेटिक्स ने चेतावनी दी है कि लगातार महंगाई दबाव और आगे मौद्रिक सख्ती से वित्तीय बाजारों के लिए दोहरी चुनौती पैदा हो सकती है। उच्च ब्याज दरें इक्विटी मूल्यांकन पर दबाव डालेंगी। वहीं, बढ़ती इनपुट लागत और उधार लेने के खर्च से कंपनियों की आय प्रभावित होगी। रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड, जो पहले से ही लगभग 7.24 फीसदी है, 7.5 फीसदी से ऊपर जा सकती है। यह तब होगा जब महंगाई उम्मीदों से अधिक बढ़ेगी और RBI ब्याज दरों में वृद्धि जारी रखेगा।