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चंडीगढ़: मालदीव को इस्तेमाल जहाज देने की जुगत में पाकिस्तान, इसी बहाने घुसपैठ की साजिश

Fri, 04 Sep 2026 06:04 AM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 04 Sep 2026 06:04 AM IST
सार
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मालदीव की वायुसेना के लिए बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षण और तकनीकी समेत वित्तीय सहायता के बहाने पाकिस्तान अपनी घुसपैठ वहां करने की साजिश में है।

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Pakistan plotting to supply a ship to the Maldives; a ploy to gain a foothold.
अमर उजाला के पास सुबूत... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की अक्तूबर में होने वाली पाकिस्तान यात्रा को लेकर पाकिस्तान ने एक बड़ी चाल चली है। यह चाल है दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर की जाने वाली पाकिस्तानी तैयारियों की। अमर उजाला के हाथ लगे पाकिस्तान सरकार के एक अहम गोपनीय दस्तावेज से पहली बार यह खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान अपने इस्तेमाल किए हुए सैन्य विमान मालदीव को देना चाहता है। इसके साथ मालदीव की वायुसेना के लिए बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षण और तकनीकी समेत वित्तीय सहायता के बहाने अपनी घुसपैठ वहां करने की साजिश में है।

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रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान रक्षा मंत्रालय को भेजे गए 13 अगस्त 2026 कि एक गोपनीय चिट्ठी में पाकिस्तान स्थित मालदीव में मौजूद पाकिस्तान उच्चायोग ने इस प्रस्ताव की पूरी जानकारी दी है। संदेश पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, सेना मुख्यालय और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है। दस्तावेज के मुताबिक 20 से 22 अक्तूबर को आसिम मुनीर समेत अन्य जिम्मेदार महकमें मालदीव के साथ बड़ी सैन्य डील की योजना बना रहे हैं। इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की तैयारी है। गोपनीय दस्तावेज के मुताबिक पाकिस्तानी उच्चायोग ने सुझाव दिया है कि सहमति बनने पर यात्रा के दौरान समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की घोषणा की जा सकती है। 
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द्विपक्षीय संपर्क का भी उल्लेख 
गोपनीय दस्तावेज में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा संपर्क का भी उल्लेख है। हालांकि रक्षा मामलों के जानकार कर्नल सीबी भगत मानते हैं कि भारत और मालदीव के रिश्ते अच्छे हैं। यही वजह है कि मालदीव के राष्ट्रपति की पाकिस्तान में होने वाली विजिट को वह सिर्फ भारत के पड़ोसी मुल्कों में अस्थिरता फैलाने के लिहाज से रणनीतिक रूपरेखा तैयार कर रहा है। ऐसे में मालदीव के साथ सैन्य उपकरणों की डील करने की तैयारी को एक साजिश ही करार दिया जाएगा। क्योंकि इसके पीछे इसका मकसद कोई सैन्य सपोर्ट नहीं बल्कि भारत को अस्थिर करना ही है। 
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रक्षा के क्षेत्र में चीन पर भारी निर्भरता...
सीबी भगत का कहना है कि हिंद महासागर में भारत के निकट मालदीव की वायुसेना में अपने जहाज की एंट्री करने से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को अस्थिर करना ही मुख्य उद्देश्य माना जा सकता है। पाकिस्तान के रक्षा उत्पादन मंत्रालय का अपना सैन्य औद्योगिक ढांचा तो है नहीं ऊपर से उसके प्रमुख हथियारों के आयात में चीन पर भारी निर्भरता है। 2021-25 के दौरान पाकिस्तान के प्रमुख हथियारों के आयात में चीन की हिस्सेदारी 80%थी। मालदीव स्थित पाकिस्तान के उच्चायोग से जारी चिट्ठियां पुष्टि करती हैं कि वह कैसे भारत को अस्थिर करने की लगातार कोशिश कर रहा है। 

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