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छत्तीसगढ़ में एग्रीस्टेक की अनिवार्यता खत्म: आप बोली- पीवी एप में सुधार कर पुरानी बोनस की राशि जारी करे सरकार
Thu, 15 Oct 2026 10:39 AM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Thu, 15 Oct 2026 10:39 AM IST
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के मुख्य प्रवक्ता सूरज उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश में एग्री स्टेक की जो खामियां थी जिसके कारण हजारों किसान धान बेचने से वंचित रह जाते थे। आम आदमी पार्टी के लगातार विरोध के बाद सरकार ने इस बार एग्रीस्टेक की अनिवार्यता खत्म कर दी है।
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आप के पदाधिकारी
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के मुख्य प्रवक्ता सूरज उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश में एग्री स्टेक की जो खामियां थी जिसके कारण हजारों किसान धान बेचने से वंचित रह जाते थे। आम आदमी पार्टी के लगातार विरोध के बाद सरकार ने इस बार एग्रीस्टेक की अनिवार्यता खत्म कर दी है। इस पर पार्टी ने किसानों के हित में स्वागत योग्य कदम बताया है। आम आदमी पार्टी ने पिछले एक साल से किसानों की मांगों को लेकर पूरे प्रदेश स्तर में किसान सभा कर आंदोलन और सरकार ज्ञापन दिया गया था। परिणामस्वरुप किसानों की कुछ समस्यायों का समाधान हुआ है।
आप नेताओं ने बताया कि प्रदेश में फसल सत्यापन (खरीफ गिरदावरी) और राजस्व कार्यों के लिए उपयोग किए जा रहे (पीवी ऐप) और भुइंया वेबसाइट को लेकर राज्य में किसानों में भारी विरोध देखने को मिल रहा है। जिसमें सरकार को सुधार करना चाहिए। ग्रामीण और दूर-दराज के खेतों में इंटरनेट नेटवर्क न होने के कारण ऐप ठीक से काम नहीं करता है, जिससे डेटा सिंक या अपलोड करने में भारी दिक्कत आती है। तकनीकी रूप से कमजोर सर्वर और सॉफ्टवेयर डिजाइन के चलते फील्ड में काम करते समय एप बार-बार हैंग हो जाता है। एप में सटीक जियो-लोकेशन न मिलने के कारण खसरे की सही स्थिति दर्ज करने में बाधा आती है। एप के नियमों के अनुसार खेत के चारों कोनों पर जाकर फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। खेतों में पानी भरे होने, फसल के बड़े होने या पुराने नक्शों में विसंगति होने के कारण हर कोने तक पहुंचना व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन है।
एप में तकनीकी खामियां
वहीं एप की इन तकनीकी कमियों के बावजूद काम पूरा न होने पर शासन-प्रशासन के पटवारियों को शो-कॉज नोटिस और निलंबन जैसी दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसका पटवारी संघ ने कड़ा विरोध किया है और इन्हीं सभी मांगों को लेकर पटवारी हड़ताल कर रहे हैं। इन तकनीकी बाधाओं के चलते सत्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है, जिससे भविष्य में किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने में परेशानी हो रही है और इस साल भी यही स्थिति बनी रही हो तो जिस तरह से पिछले साल प्रदेश में पांच किसानों ने आत्महत्या की थी। यदि इस साल भी सुधार नहीं हुआ तो जो किसान आत्महत्या करेंगे, उसकी जिम्मेदार सरकार होगी।
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'एक साल का बोनस बाकी'
पूर्व की कांग्रेस सरकार में किसानों का एक साल का बोनस बाकी था जिसे भाजपा सरकार को देना था, लेकिन उसे बोनस को किसानों को आज तक भाजपा सरकार ने नहीं दिया है जिसका की फंड रिलीज हो चुका था। पिछले तीन साल में केंद्र सरकार ने एमएसपी बढ़ाई है जो कि लगभग 258 के आसपास है उसे भी सरकार छुपा रही है और समर्थन मूल्य में जो धान खरीदी की जा रही है उस राशि को जोड़कर किसानों को नहीं दिया जा रहा है।
आम आदमी पार्टी की मांगें-
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आप नेताओं ने बताया कि प्रदेश में फसल सत्यापन (खरीफ गिरदावरी) और राजस्व कार्यों के लिए उपयोग किए जा रहे (पीवी ऐप) और भुइंया वेबसाइट को लेकर राज्य में किसानों में भारी विरोध देखने को मिल रहा है। जिसमें सरकार को सुधार करना चाहिए। ग्रामीण और दूर-दराज के खेतों में इंटरनेट नेटवर्क न होने के कारण ऐप ठीक से काम नहीं करता है, जिससे डेटा सिंक या अपलोड करने में भारी दिक्कत आती है। तकनीकी रूप से कमजोर सर्वर और सॉफ्टवेयर डिजाइन के चलते फील्ड में काम करते समय एप बार-बार हैंग हो जाता है। एप में सटीक जियो-लोकेशन न मिलने के कारण खसरे की सही स्थिति दर्ज करने में बाधा आती है। एप के नियमों के अनुसार खेत के चारों कोनों पर जाकर फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। खेतों में पानी भरे होने, फसल के बड़े होने या पुराने नक्शों में विसंगति होने के कारण हर कोने तक पहुंचना व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन है।
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एप में तकनीकी खामियां
वहीं एप की इन तकनीकी कमियों के बावजूद काम पूरा न होने पर शासन-प्रशासन के पटवारियों को शो-कॉज नोटिस और निलंबन जैसी दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसका पटवारी संघ ने कड़ा विरोध किया है और इन्हीं सभी मांगों को लेकर पटवारी हड़ताल कर रहे हैं। इन तकनीकी बाधाओं के चलते सत्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है, जिससे भविष्य में किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने में परेशानी हो रही है और इस साल भी यही स्थिति बनी रही हो तो जिस तरह से पिछले साल प्रदेश में पांच किसानों ने आत्महत्या की थी। यदि इस साल भी सुधार नहीं हुआ तो जो किसान आत्महत्या करेंगे, उसकी जिम्मेदार सरकार होगी।
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'एक साल का बोनस बाकी'
पूर्व की कांग्रेस सरकार में किसानों का एक साल का बोनस बाकी था जिसे भाजपा सरकार को देना था, लेकिन उसे बोनस को किसानों को आज तक भाजपा सरकार ने नहीं दिया है जिसका की फंड रिलीज हो चुका था। पिछले तीन साल में केंद्र सरकार ने एमएसपी बढ़ाई है जो कि लगभग 258 के आसपास है उसे भी सरकार छुपा रही है और समर्थन मूल्य में जो धान खरीदी की जा रही है उस राशि को जोड़कर किसानों को नहीं दिया जा रहा है।
आम आदमी पार्टी की मांगें-
- पटवारियों की जायज मांगे सरकार तुरंत मानें और पीवी ऐप के जरिए जबरन काम कराने के बजाय इसे पहले की तरह भुइंया पोर्टल के माध्यम से सुगम तरीके से संचालित किया जाए।
- कांग्रेस सरकार का बकाया बोनस किसानों को दिया जाए।
- केंद्र के तीन साल में बढ़ी हुई एमएसपी की राशि समर्थन मूल्य में अतिरिक्त जोड़कर 3358 रुपये से किसानों से धान ख़रीदा जाए।
- देरी ना करते हुए एक नवम्बर से अनिवार्य रूप से धान खरीदी करें सरकार