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अनोखी पहल: शादी में फिजूल खर्ची रोकने की पहल, हुआ ठेका विवाह, जानें इसके बारे में
Mon, 05 May 2025 08:28 AM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
Published by: अनुज कुमार
Updated Mon, 05 May 2025 08:28 AM IST
बालोद जिले के डोंडी ब्लॉक के वनांचल ग्राम टेकाडोढ़ा में महार समाज ने एक अनोखी मिसाल पेश की है। जहां पारंपरिक बाजे के बीच बिना किसी तामझाम के यह ठेका विवाह कराया गया। सभी ने नव दंपत्ति को उज्जवल भविष्य की मंगल कामनाओं के साथ आशीर्वाद दिया यह एक नींव थी काफी दिनों बाद ठेका विवाह शुरू करने की।
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वनांचल में हुआ ठेका विवाह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बालोद जिले के डोंडी ब्लॉक के वनांचल ग्राम टेकाडोढ़ा में महार समाज एक ऐसी शादी की मिशाल पेश की। जिसकी आज पूरे जिले सहित प्रदेश में चर्चा हो रहीं है। दरअसल हम बात कर रहे हैं ठेका विवाह की, जो कि वन क्षेत्र में प्राचीन संस्कृति का प्रतीक है। जो आज के दौर में विलुप्त हो रही है। इस ठेका विवाह के अंतर्गत वधू पक्ष के लोग वर पक्ष के घर जाते हैं और पूरे शादी के रस्मो रिवाज एक ही दिन संपन्न कर वर के घर ही फेरे लेकर अपने गृहस्थ जीवन की शुरुआत करते हैं। दरअसल, ग्राम फ़रदडीह के रहने वाले सेउक राम सहारे की बेटी माधुरी की शादी टेकाडोढ़ा के रहने वाले रामेश्वर उंदरा से हुई। एक ही दिन में सभी रस्में निभा कर सादगी और शांतिपूर्ण तरीके से शादी कराई गई। ना कोई दिखावा न कोई फिजूल खर्ची, कम खर्चे में ही यह शादी टेकाडोढ़ा में संपन्न हुई। जिसने माहरा समाज के लिए भी एक अच्छा संदेश दिया।
जानिए कैसे हुआ रिश्ता
इस रिश्ते की शुरुआत की बात करें तो कन्या माधुरी के जीजा दीपक आरदे निवासी खल्लारी का अक्सर सामाजिक कार्यक्रमों के चलते बालोद आना-जाना होता था। इस दौरान टेकाडोढ़ा के रामेश्वर उंदरा बालोद के भोजनालय में काम करते थे और रात में सामाजिक भवन में ही रहते थे। इस बीच 40 वर्षीय रामेश्वर, उनसे चर्चा करते थे कि मेरे लिए कोई उम्रदराज शादी के लिए लड़की हो तो जरूर बताएं। तो वही दीपक आरदे के जरिए उन्हें उनकी एक साली 38 वर्षीया माधुरी के बारे में पता चला। दोनों की ही शादी की उम्र निकलती जा रही थी और रिश्ते जुड़ने में अड़चनें आ रही थी। कहते हैं जोड़ी ऊपर ही तय होती है। शादी का संयोग जब होता है तो होकर ही रहता है। ऐसा ही कुछ माधुरी और रामेश्वर के साथ हुआ। 40 और 38 साल की उम्र में दोनों ने 7 फेरे लेकर नए जीवन की शुरुआत की।
ठेका विवाह की रखी नींव
माधुरी के जीजा दीपक आरदे के जरिए यह रिश्ता बंधा और ठेका विवाह पद्धति के जरिए दोनों ने दांपत्य जीवन में कदम रखा। आज महंगाई के दौर में विवाह काफी खर्चीली होती जा रही है। ऐसे में आदर्श और सादगी पूर्ण विवाह संपन्न कर समाज ने फिजूल खर्ची रोकने का संदेश दिया। पारंपरिक बाजे के बीच बिना किसी तामझाम के यह ठेका विवाह कराया गया। सभी ने नव दंपत्ति को उज्जवल भविष्य की मंगल कामनाओं के साथ आशीर्वाद दिया यह एक नींव थी काफी दिनों बाद ठेका विवाह शुरू करने की।
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जानिए कैसे हुआ रिश्ता
इस रिश्ते की शुरुआत की बात करें तो कन्या माधुरी के जीजा दीपक आरदे निवासी खल्लारी का अक्सर सामाजिक कार्यक्रमों के चलते बालोद आना-जाना होता था। इस दौरान टेकाडोढ़ा के रामेश्वर उंदरा बालोद के भोजनालय में काम करते थे और रात में सामाजिक भवन में ही रहते थे। इस बीच 40 वर्षीय रामेश्वर, उनसे चर्चा करते थे कि मेरे लिए कोई उम्रदराज शादी के लिए लड़की हो तो जरूर बताएं। तो वही दीपक आरदे के जरिए उन्हें उनकी एक साली 38 वर्षीया माधुरी के बारे में पता चला। दोनों की ही शादी की उम्र निकलती जा रही थी और रिश्ते जुड़ने में अड़चनें आ रही थी। कहते हैं जोड़ी ऊपर ही तय होती है। शादी का संयोग जब होता है तो होकर ही रहता है। ऐसा ही कुछ माधुरी और रामेश्वर के साथ हुआ। 40 और 38 साल की उम्र में दोनों ने 7 फेरे लेकर नए जीवन की शुरुआत की।
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ठेका विवाह की रखी नींव
माधुरी के जीजा दीपक आरदे के जरिए यह रिश्ता बंधा और ठेका विवाह पद्धति के जरिए दोनों ने दांपत्य जीवन में कदम रखा। आज महंगाई के दौर में विवाह काफी खर्चीली होती जा रही है। ऐसे में आदर्श और सादगी पूर्ण विवाह संपन्न कर समाज ने फिजूल खर्ची रोकने का संदेश दिया। पारंपरिक बाजे के बीच बिना किसी तामझाम के यह ठेका विवाह कराया गया। सभी ने नव दंपत्ति को उज्जवल भविष्य की मंगल कामनाओं के साथ आशीर्वाद दिया यह एक नींव थी काफी दिनों बाद ठेका विवाह शुरू करने की।
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