फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   CBI investigation in disabled rehabilitation case complete, charge sheet to be filed soon

छत्तीसगढ़: दिव्यांग पुनर्वास मामले में सीबीआई जांच पूरी, जल्द दाखिल होगा आरोप पत्र

Mon, 05 Oct 2026 06:01 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Mon, 05 Oct 2026 06:01 PM IST
सार
Register For Event

दिव्यांगों के पुनर्वास और कल्याण से जुड़ी पूछताछ में कथित 1000 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के मामले में सीबीआई ने जांच पूरी कर ली है। जांच में वर्ष 2004 से 2018 के बीच दोनों पूछताछ का वास्तविक खर्च करीब 35 से 40 करोड़ रुपये पाया गया। 

विज्ञापन
CBI investigation in disabled rehabilitation case complete, charge sheet to be filed soon
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने छत्तीसगढ़ में दिव्यांगों के पुनर्वास और कल्याण से जुड़ी संस्थाओं में हुई वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच पूरी कर ली है। शुरुआती शिकायतों और आरोपों में करीब 1,000 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले की बात कही गई थी, लेकिन जांच एजेंसी की पड़ताल में वर्ष 2004 से 2018 के बीच दोनों संस्थाओं का कुल वास्तविक खर्च लगभग 35 से 40 करोड़ रुपये ही पाया गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो इस मामले में जल्द ही अदालत के समक्ष अपना आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी में है।
विज्ञापन


यह पूरा मामला समाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित स्टेट रिसोर्स सेंटर और फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर की गतिविधियों तथा उनके वित्तीय प्रबंधन से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने इस प्रकरण में दोनों संस्थाओं से जुड़े करीब 30 अधिकारियों और कर्मचारियों से गहन पूछताछ की है। जांच अधिकारियों ने मुख्य रूप से ऐसे कर्मचारियों की नियुक्तियों और उनके वेतन के रूप में निकाली गई राशि की पड़ताल की, जिनकी वास्तविक उपस्थिति और कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
विज्ञापन


हाई कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी
उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बाद ही केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। रायपुर के कुशालपुर निवासी याचिकाकर्ता कुंदन सिंह ठाकुर ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कल्याणकारी संस्थाओं में वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया था। न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज प्राथमिकी में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी, लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल की गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन


समाज कल्याण विभाग के सचिव से भी पूछताछ हुई थी
जांच प्रक्रिया के दौरान पिछले वर्ष अक्तूबर महीने में केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम ने रायपुर के माना स्थित स्टेट रिसोर्स सेंटर और फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर में छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान जांच दल ने केंद्रों के कार्यालयों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, वित्तीय रजिस्टर और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए थे। जांच के सिलसिले में समाज कल्याण विभाग के सचिव से भी पूछताछ की गई और उनके आधिकारिक बयान दर्ज किए गए।

वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की हुई जांच
संस्थाओं के गठन और उनके संचालन की प्रक्रिया से जुड़े रहे राज्य के कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी आरोप सामने आए थे। इनमें प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एमके राऊत, बीएल अग्रवाल और पीपी श्रोती सहित अन्य अधिकारियों के नाम प्रमुख रूप से उछले थे। हालांकि, इन सभी आरोपों की वास्तविक स्थिति केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच और अदालत में पेश होने वाले आरोप पत्र से ही स्पष्ट होगी।

तीन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो सकती है
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 2004 से 2018 के बीच दोनों संस्थाओं में हुआ वास्तविक खर्च 35 से 40 करोड़ रुपये के आसपास ही पाया गया है, जो शुरुआती दावों की तुलना में काफी कम है। इसके बावजूद, जांच में कुछ कर्मचारियों के वेतन भुगतान और सरकारी राशि के आहरण से संबंधित प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के पुख्ता संकेत मिले हैं। इस मामले में जांच एजेंसी दो से तीन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कार्रवाई कर रही है।


राज्य स्तर पर भी उजागर हुई थीं कमियां
राज्य स्तर पर हुई प्रारंभिक जांच में भी इन संस्थाओं में वित्तीय गड़बड़ियों की बात सामने आई थी, जिसका बाकायदा उल्लेख उच्च न्यायालय के आधिकारिक रिकॉर्ड में किया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने यह गंभीर आरोप रखा था कि फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर में तय मानकों के अनुसार वास्तविक गतिविधियां संचालित नहीं हो रही थीं और कागजी कर्मचारियों के नाम पर राशि निकाली जा रही थी। अब केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच पूरी हो जाने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई और अदालत में दाखिल होने वाले संभावित आरोप पत्र पर निगाहें टिकी हुई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed