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छत्तीसगढ़ राज्योत्सव: ‘मैं अयोध्या हूं' का मंचन आज, फेमस गायिका स्वास्ति बांधेंगी समां, होंगी 11 प्रस्तुतियां

Mon, 02 Nov 2026 08:16 AM IST
Lalit Kumar Singh अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Mon, 02 Nov 2026 08:16 AM IST
सार
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छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के दूसरे दिन दो नवंबर को नवा रायपुर अटल नगर में कला, संस्कृति, संगीत और लोकपरंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। तीन दिवसीय राज्योत्सव के तहत सोमवार को भारतीय कला और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। राज्योत्सव के मुख्य मंच पर ‘मैं अयोध्या हूं' नाट्य का मंचन होगा। वहीं फेमस गायिका स्वास्ति मेहुल अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति से समां बांधेंगी।

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Chhattisgarh State Festival: Main Ayodhya Hoon to be staged today
गायिका स्वास्ति मेहुल, गायक सुनील सोनी - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के दूसरे दिन दो नवंबर को नवा रायपुर अटल नगर में कला, संस्कृति, संगीत और लोकपरंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। तीन दिवसीय राज्योत्सव के तहत सोमवार को भारतीय कला और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। राज्योत्सव के मुख्य मंच पर ‘मैं अयोध्या हूं' नाट्य का मंचन होगा। वहीं फेमस गायिका स्वास्ति मेहुल अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति से समां बांधेंगी। प्रसिद्ध कलाकारों की संगीतमय प्रस्तुतियां होंगी। वहीं शिल्पग्राम में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए कलाकार अपनी लोककलाओं और सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। राज्योत्सव के दूसरे दिन आयोजित विशेष समारोह में राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि होंगे। 
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‘मैं अयोध्या हूं’ का मंचन आज
राज्योत्सव के दूसरे दिन मुख्य मंच पर शाम 6 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। शाम 6 से 7 बजे तक विशेष नाट्य प्रस्तुति ‘मैं अयोध्या हूं’ का मंचन किया जाएगा। इस नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से अयोध्या की ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। भारतीय संस्कृति, आस्था, परंपरा और गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करने वाला यह नाट्य मंचन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
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यह प्रस्तुति भारतीय सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों को अभिव्यक्त करने के साथ ही दर्शकों को देश की समृद्ध परंपराओं से परिचित कराएगी। 


सुनील सोनी और स्वास्ति मेहुल की सुरीली आवाज से सजेगी महफिल
राज्योत्सव के दूसरे दिन संगीत प्रेमियों के लिए भी विशेष आकर्षण रहेगा। शाम 7 से 8 बजे तक छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक सुनील सोनी अपनी संगीतमय प्रस्तुति देंगे। उनकी प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संगीत की मधुरता और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का रंग राज्योत्सव के मंच पर बिखरेगा। इसके बाद रात 8 बजे से प्रसिद्ध पार्श्व गायिका स्वास्ति मेहुल संगीतमय प्रस्तुति देंगी। उनके गीतों से राज्योत्सव की शाम सुरमयी होगी। लोकसंस्कृति, नाट्य कला और आधुनिक संगीत का यह संगम दर्शकों को विविध सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेगा।
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शिल्पग्राम में होंगी 11 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
राज्योत्सव के मुख्य मंच के साथ ही शिल्पग्राम में भी दो नवंबर को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और भारतीय शास्त्रीय कलाओं की अनुपम छटा देखने को मिलेगी। शिल्पग्राम मंच पर दोपहर 3 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रारंभ होंगे। दूसरे दिन कुल 11 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें लोकसंगीत, पंडवानी, सुआ नृत्य, ओडिसी, कथक, सूफी संगीत, गजल और लोकमंच जैसी विविध कलाओं को स्थान दिया गया है।

कार्यक्रम में प्रसन्ना अवस्थी लोकसंगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति देंगी। सुष्मिता दास ओडिसी नृत्य के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा की सुंदर अभिव्यक्ति प्रस्तुत करेंगी। दुर्ग की समप्रिया पूजा निषाद छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायन परंपरा को मंच पर जीवंत करेंगी।

बिलासपुर के अंकित निर्मलकर सूफी, गजल एवं सुगम गायन की प्रस्तुति देंगे। गरियाबंद की मिलवंतीन बाई पारंपरिक सुआ नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक प्रस्तुत करेंगी। रायपुर की  मेघा बोस ताम्रकार पारंपरिक लोकसंगीत से दर्शकों को परिचित कराएंगी।

इसी क्रम में आंचल पाण्डेय कथक नृत्य की प्रस्तुति देंगी। धमतरी की रुखमनी दीवान लोकमंच के माध्यम से छत्तीसगढ़ी लोकजीवन और परंपराओं को अभिव्यक्त करेंगी। आदित्य मिश्रा बैंड की संगीतमय प्रस्तुति देंगे। विनीता त्रिपाठी कथक नृत्य और तेजराम साहू लोकमंच की प्रस्तुति से सांस्कृतिक कार्यक्रमों को विशेष आकर्षण प्रदान करेंगे।

पंडवानी और सुआ नृत्य की प्रस्तुति
शिल्पग्राम में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककलाओं को विशेष महत्व दिया गया है। पंडवानी छत्तीसगढ़ की विश्वप्रसिद्ध लोकगाथा गायन परंपरा है, जिसके माध्यम से महाभारत की कथाओं को गायन और अभिनय की विशिष्ट शैली में प्रस्तुत किया जाता है। वहीं सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, सामूहिक जीवन और पारंपरिक उत्सवों का महत्वपूर्ण अंग है।

इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, लोकआस्था और सामाजिक परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा। साथ ही ओडिसी और कथक जैसे शास्त्रीय नृत्यों की प्रस्तुतियां भारतीय कला परंपराओं की समृद्धि को प्रदर्शित करेंगी। सूफी संगीत, गजल और सुगम गायन की प्रस्तुतियां आयोजन में संगीत के विविध रंग जोड़ेंगी।

छत्तीसगढ़ सांस्कृति को पहचान दिलायेगा राज्योत्सव: मंत्री राजेश अग्रवाल
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और लोकपरंपराएं प्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं। राज्योत्सव इन गौरवशाली परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाने और स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं की अनूठी विरासत विद्यमान है, जिसका संरक्षण और संवर्धन हमारी प्राथमिकता है।


उन्होंने कहा कि राज्योत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता, जनजातीय परंपराओं और लोककलाओं को व्यापक मंच प्रदान किया जा रहा है। ऐसे आयोजनों से जहां कलाकारों का उत्साहवर्धन होता है, वहीं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
 
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