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सीजी: पोलावरम परियोजना के विरोध में कांग्रेस ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, तीन जिलों के गांव प्रभावित

Tue, 06 Oct 2026 02:15 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 06 Oct 2026 02:15 PM IST
सार
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पोलावरम परियोजना से छत्तीसगढ़ के सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा के गांवों पर संभावित डूब के खतरे को लेकर कांग्रेस ने विरोध जताया। राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर सर्वे, पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग की गई।

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Congress submits memorandum to Governor opposing Polavaram project, villages in three districts affected
पोलावरम परियोजना के विरोध में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आंध्र प्रदेश में बन रही पोलावरम बहुउद्देश्यीय सिंचाई परियोजना से छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में संभावित डूब और विस्थापन को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। इस मुद्दे को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी सुकमा और आदिवासी कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने पोलावरम परियोजना के संभावित डूब क्षेत्र का नए सिरे से सर्वे कराने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास तथा उचित मुआवजे की ठोस नीति बनने तक बांध का निर्माण कार्य तत्काल रोकने की मांग की है।
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आदिवासी गांव प्रभावित
सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि पोलावरम बांध के बैकवाटर से सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले के सैकड़ों आदिवासी गांव प्रभावित हो सकते हैं। इस परियोजना के कारण आदिवासियों की उपजाऊ खेती की जमीन, मकान और वनभूमि के जलमग्न होने की भारी आशंका है। इसके साथ ही आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर भी प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा बना हुआ है। प्रभावित आदिवासी क्षेत्र के लोग लंबे समय से पोलावरम परियोजना का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से आदिवासी हितों को प्राथमिकता देते हुए परियोजना के प्रभावों का नए सिरे से आकलन करने की मांग की है।
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दोरला जनजाति के अस्तित्व का संकट
बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद पोलावरम परियोजना से सबसे ज्यादा नुकसान आदिवासी समुदाय को होने की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बांध का निर्माण होने से स्थानीय दोरला जनजाति के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा और यह विशेष समुदाय लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुंच सकता है। विक्रम मंडावी ने कहा कि सरकार को समय रहते प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। यदि समय रहते उचित समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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सात प्रमुख मांगों का ज्ञापन
कांग्रेस ने राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कुल सात प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें डूब क्षेत्र का दोबारा सर्वे कराना, पुनर्वास और मुआवजे की नीति बनने तक निर्माण कार्य रोकना तथा केंद्र सरकार का हस्तक्षेप शामिल है। इसके अतिरिक्त आदिवासियों को वन अधिकार पट्टा देने, जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई करने, स्थानीय युवाओं को रोजगार देने, बेरोजगारी भत्ता देने और गांवों से स्मार्ट मीटर हटाकर निर्बाध बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।
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