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जीवन धारा: कृष्ण जीवन की सभी कलाओं में माहिर हैं, साथ जाने का रास्ता चुनने पर शुरुआत में ही अहंकार छोड़ना होगा
Fri, 04 Sep 2026 09:35 AM IST
ज्योति भास्कर
ओशो
ओशो
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 04 Sep 2026 09:35 AM IST
जो कोई श्रीकृष्ण के साथ जाने का रास्ता चुनता है, उसे शुरुआत में ही अपने ‘मैं’ (अहंकार) को छोड़ना होता है। इसमें नाकाम रहने पर श्रीकृष्ण के साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता।
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कृष्ण जीवन की सभी कलाओं में माहिर हैं (प्रतीकात्मक)
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
श्रीकृष्ण कोई साधक नहीं हैं। वह सिद्ध हैं, निपुण हैं, जीवन की सभी कलाओं में माहिर हैं। और इस सिद्ध अवस्था में, वह जो कहते हैं, वह आपको अहंकारी लग सकता है, पर ऐसा है नहीं। मुश्किल यह है कि श्रीकृष्ण को भी उसी भाषाई ‘मैं’ का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसका आप करते हैं, लेकिन उनके ‘मैं’ और आपके ‘मैं’ के अर्थ में बहुत बड़ा अंतर है। जब आप ‘मैं’ कहते हैं, तो उसका मतलब होता है, आपके शरीर में कैद व्यक्ति, पर जब श्रीकृष्ण ऐसा कहते हैं, तो उनका मतलब उस चीज से होता है, जो पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त है। इसीलिए, उनमें अर्जुन से यह कहने का साहस है, ‘बाकी सब छोड़ दो और मेरी शरण में आ जाओ।’
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श्रीकृष्ण का ‘मैं’ अहंकार के हर निशान से पूरी तरह मुक्त है, और इसी वजह से वह अर्जुन को खुद के प्रति पूरी तरह समर्पित होने के लिए कह सके। यहां, ‘मेरी शरण में आओ’ का असल मतलब है, ‘समग्र के प्रति समर्पित हो जाओ। उस आदिम और रहस्यमयी ऊर्जा के प्रति समर्पित हो जाओ, जो पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त है।’
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बुद्ध और महावीर को भी अहंकार-मुक्ति मिलती है, लेकिन उन्हें यह लंबे, संघर्ष और मेहनत के बाद मिलती है। हो सकता है कि उनके ज्यादातर अनुयायियों को यह न मिले, क्योंकि उनके रास्तों पर यह सबसे आखिर में आने वाली चीज है। लेकिन कृष्ण के मामले में अहंकार-मुक्ति सबसे पहले आती है; वह वहीं से शुरू करते हैं, जहां बुद्ध और महावीर का सफर खत्म होता है। इसलिए, जो कोई श्रीकृष्ण के साथ जाने का रास्ता चुनता है, उसे शुरुआत में ही यह करना होता है। इसमें नाकाम रहने पर श्रीकृष्ण के साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता।
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आप महावीर के साथ ‘मैं’ (अहंकार) के साथ भी काफी दूर तक चल सकते हैं, पर श्रीकृष्ण के साथ आपको पहला कदम उठाते ही अपना ‘मैं’ छोड़ना होगा। आपका ‘मैं’ महावीर के साथ तो कुछ हद तक निभ सकता है, पर श्रीकृष्ण के साथ बिल्कुल नहीं।