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उत्तराखंड: प्रदेश के करीब 27 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, यूपीसीएल का 5900 करोड़ का दावा खारिज

Tue, 06 Oct 2026 07:41 AM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Tue, 06 Oct 2026 07:41 AM IST
सार
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यूपी से परिसंपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे का असर अब सीधे बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने से रोक दिया गया है। नियामक आयोग ने यूपीसीएल के हजारों करोड़ के दावे की पड़ताल के बाद प्रशासनिक देरी का बोझ जनता पर डालने से साफ इनकार कर दिया।

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Uttarakhand electricity regulatory commission rejects UPCL  5,900 Crore claim consumers get relief
बिजली उपभोक्ताओं को राहत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रदेश के करीब 27 बिजली उपभोक्ताओं को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने बड़ी राहत दी है। आयोग ने यूपी से परिसंपत्ति देनदारी बंटवारे का यूपीसीएल का 5900 करोड़ का दावा खारिज कर दिया। आयोग ने केवल 389 करोड़ मंजूर किए हैं, जो कि आने वाले टैरिफ में प्रस्तावित किए जाएंगे या राज्य सरकार देगी।

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नियामक आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा, सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी ने मामले में पहले जनसुनवाई की थी। आयोग ने साफ कहा कि 2003 में स्कीम बनने के बाद यूपीसीएल वर्षों तक फाइल दबाकर बैठा रहा। 2013 के बाद सीधे छह साल तक कोई पत्राचार नहीं हुआ। 2022 में अधिसूचना जारी होने के बाद भी चार साल तक आयोग के पास नहीं आया।

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शेयर पूंजी में बदलने के आधार पर रिटर्न भी आयोज ने खारिज किया
आयोग ने दो-टूक कहा कि निगम और शासन के ढुलमुल रवैये व प्रशासनिक लेटलतीफी का हर्जाना राज्य की जनता पर नहीं थोपा जा सकता। आयोग के मुताबिक, यूपीसीएल के कुल 5,900 करोड़ के दावे में वास्तविक दावा मात्र 936.37 करोड़ का था। बाकी करीब 4,963.65 करोड़ केवल वर्षों की देरी पर चक्रवृद्धि रूप में मांगा गया ब्याज(कैरिंग कॉस्ट) था।
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यूपीसीएल ने केंद्र सरकार के उपक्रमों के बकाए वाले 572 करोड़ को राज्य सरकार की ओर से शेयर पूंजी में बदलने के आधार पर रिटर्न भी आयोज ने खारिज कर दिया। कुल मिलाकर आयोग ने केवल 389.33 करोड़ रुपये का दावा ही मंजूर किया है।

सरकार दे या अगले टैरिफ प्रस्ताव में लाए यूपीसीएल
आयोग ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। आयोग ने सुझाव दिया कि स्वीकृत 389.33 करोड़ की राशि यदि सरकार चाहे तो यूपीसीएल के राज्य सरकार को देय देनदारियों के साथ समायोजित करके निपटा ले। यदि नहीं तो केवल 389.33 करोड़ को आगामी टैरिफ प्रस्तावों में चरणबद्ध तरीके से शामिल करने पर विचार होगा, जिससे जनता पर एकमुश्त भार न पड़े।

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ये है मामला

उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 के बाद नवंबर 2001 में केंद्र सरकार के आदेशानुसार उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड और नवगठित यूपीसीएल के बीच संपत्तियों व देनदारियों का बंटवारा हुआ था। 12 अक्तूबर 2003 को दोनों निगमों के बीच संपत्ति ट्रांसफर स्कीम बनी लेकिन इसे राज्य सरकार की ओर से औपचारिक रूप से अधिसूचित करने में लगभग दो दशक लग गए। यह आठ मार्च 2022 को जाकर गजट में अधिसूचित हुई। यूपीसीएल ने इस ट्रांसफर स्कीम के तहत बची हुई संपत्तियों के आधार पर डेप्रिसिएशन(मूल्यह्रास), इक्विटी पर रिटर्न, वर्किंग कैपिटल पर ब्याज और सबसे बड़ा हिस्सा-सालों के विलंब पर लगने वाली 4,963.65 करोड़ की कैरिंग कॉस्ट जोड़ते हुए कुल 5,900.01 करोड़ के अतिरिक्त एआरआर का दावा किया था।

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आयोग ने किस मद में कितना माना जायज?

मूल्यह्रास : 288.70 करोड़

रीजनेबल रिटर्न : 97.75 करोड़

कार्यशील पूंजी पर ब्याज : 2.88 करोड़

कैरिंग कॉस्ट : शून्य

कुल : 389.33 करोड़(5,900.01 करोड़)

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