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दिल्ली हाईकोर्ट: 'पति-पत्नी का रिश्ता सबसे खूबसूरत, लेकिन गलतियां बढ़ें तो हो जाता है भयानक'; अहम टिप्पणी

Tue, 25 Aug 2026 05:23 PM IST
Rahul Kumar Tiwari पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Tue, 25 Aug 2026 05:23 PM IST
सार
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच विवाद समय पर नहीं सुलझे तो ‘बेहतर आधा’ ‘कड़वाहट भरा आधा’ बन जाता है। अदालत ने रिश्तों में समय पर समाधान की जरूरत बताई और कीटनाशक मामले में पर्याप्त सबूत न मिलने पर पति को बरी कर दिया।

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Delhi high court comment Better half becomes bitter half in marriage if issues not resolved between spouses
दिल्ली हाईकोर्ट ने रिश्तों में कड़वाहट पर की टिप्पणी - फोटो : अमर उजाला GFX

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने विवाह की संस्था को विरोधाभासी बताते हुए कहा है कि यदि पति-पत्नी के बीच के मुद्दों का जल्द समाधान नहीं किया जाता है, तो ‘बेहतर आधा’ (better half) ‘कड़वाहट भरा आधा’ (bitter half) बन जाता है। न्यायालय ने कहा कि मानव संबंधों में सबसे खूबसूरत पति-पत्नी का रिश्ता तब सबसे भयानक हो जाता है, जब वैवाहिक गठबंधन में चीजें गलत हो जाती हैं।

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न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव ने यह टिप्पणी एक ऐसे व्यक्ति की अपील स्वीकार करते हुए की, जिसे निचली अदालत ने अपनी पत्नी के मुंह में कीटनाशक डालकर उसकी हत्या के प्रयास के मामले में तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय ने नाफे सिंह को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत इरादे और ज्ञान के संबंध में कोई ठोस सबूत नहीं था।

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अदालत ने कहा, 'विवाह की संस्था विरोधाभासी और चरमताओं का संसार है। यदि सावधानी से न संभाला जाए तो सबसे अच्छा, पल भर में सबसे बुरा हो जाता है। यदि मुद्दों का ध्यान नहीं रखा जाता और जल्द से जल्द समाधान नहीं किया जाता, तो बेहतर आधा कड़वाहट भरा आधा बन जाता है।'

न्यायालय ने कहा कि समय हालांकि एक बड़ा मरहम है और जीवन के कई दर्द को कम करता है, लेकिन रिश्तों में लिया गया समय प्रति-उत्पादक भी हो सकता है। अदालत के अनुसार, यदि रिश्तों को सावधानीपूर्वक और समय पर नहीं संभाला जाए तो वे पूरी तरह से अलग, अवांछित और अप्रत्याशित दिशा में जा सकते हैं।

उच्च न्यायालय ने आगे कहा कि विवाह की संस्था विश्वास, साथ और एक-दूसरे के प्रति भरोसे पर आधारित होती है। पति-पत्नी के बीच इस बंधन में आने वाली परेशानियां केवल विवाह की संस्था को ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज को भी प्रभावित करती हैं।

अदालत ने कहा कि विश्वास और भरोसे पर आधारित रिश्ता संघर्ष क्षेत्र में बदल जाता है, जहां अक्सर शारीरिक हिंसा भी आ जाती है। ऐसे में पति-पत्नी के बीच पैदा होने वाले विवादों का समय रहते समाधान करना जरूरी है।
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यह मामला नाफे सिंह और उनकी पत्नी से जुड़ा था। दोनों ने वर्ष 2000 में शादी की थी, लेकिन एक साल के भीतर ही उनके रिश्ते में खटास आ गई थी। अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2001 में एक वैवाहिक विवाद के दौरान पति ने कथित तौर पर पहले अपनी पत्नी को कीटनाशक पिलाने की कोशिश की। जब वह इसमें असफल रहा तो उसने सीधे कंटेनर से कीटनाशक उसके गले में डाल दिया।

इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी और निचली अदालत ने नाफे सिंह को दोषी ठहराते हुए तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने अपील पर सुनवाई करते हुए अभियोजन के साक्ष्यों की जांच की और पाया कि धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास के लिए जरूरी इरादे और ज्ञान को साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत नहीं हैं। इसके बाद अदालत ने नाफे सिंह को बरी कर दिया।
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