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दिल्ली मास्टर प्लान- 2047: घरों के बीच गोदाम, सड़कों पर माल और वाहनों का दबाव होगा खत्म; नियोजन का खाका तैयार
Wed, 26 Aug 2026 04:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 26 Aug 2026 04:03 AM IST
मास्टर प्लान-2047 ने इन बेतरतीब गोदामों को हटाने का प्रस्ताव दिया है। ये गोदाम सड़क पर जाम, पार्किंग और सुरक्षा जैसी समस्याएं पैदा करते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली के रिहायशी इलाकों, गांवों और पुराने बाजारों में बने गोदाम अब हमेशा के लिए नहीं चल पाएंगे। मास्टर प्लान-2047 ने इन बेतरतीब गोदामों को हटाने का प्रस्ताव दिया है। ये गोदाम सड़क पर जाम, पार्किंग और सुरक्षा जैसी समस्याएं पैदा करते हैं।
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योजना के तहत, पहले ऐसे गोदामों को नियमित किया जाएगा। जो गोदाम नियमों के दायरे में नहीं आएंगे, उन्हें एकीकृत माल ढुलाई केंद्रों या नियोजित थोक बाजारों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसका उद्देश्य भविष्य में माल भंडारण के लिए अलग और सुविधाओं से लैस क्षेत्र तैयार करना है। दिल्ली में रोज करीब 1.69 लाख मालवाहक वाहन प्रवेश करते और बाहर निकलते हैं। इनमें मालवाहक ऑटो की हिस्सेदारी 32.1 प्रतिशत है।
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दिल्ली में फिलहाल गाजीपुर और नरेला में दो एकीकृत माल ढुलाई केंद्र और संजय गांधी नगर, आजादपुर तथा पंजाबी बाग में तीन परिवहन नगर हैं। वहीं आजादपुर, केशवपुरम, ओखला और गाजीपुर की चार प्रमुख फल-सब्जी मंडियां रोज करीब 21,123 टन माल संभालती हैं।
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पुरानी दिल्ली के गोदाम भी होंगे बाहर
पुरानी दिल्ली के घने इलाकों में थोक कारोबार और भंडारण के कारण पैदा होने वाले दबाव को देखते हुए वहां की थोक और गोदाम गतिविधियों को उपयुक्त क्षेत्रों में स्थानांतरित करने का प्रावधान है। स्थानीय निकाय और दिल्ली सरकार इसके लिए समय-सारणी तैयार कर सकते हैं। साथ ही मौजूदा थोक बाजारों और मंडियों के आधुनिकीकरण की योजना है।
तुगलकाबाद के अंतर्देशीय माल कंटेनर केंद्र को भी शहर से बाहर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के किसी दूसरे स्थान पर ले जाने की संभावना प्राथमिकता से तलाशने की बात कही गई है। इंटरनेट आधारित कारोबार बढ़ने के साथ छोटे गोदाम और औद्योगिक क्षेत्रों में नए गोदाम विकसित करने की अनुमति देकर माल वितरण को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटने की योजना है।
21 जून 2018 से पहले बने गैर-निर्धारित गोदाम समूहों को नियमित करने के लिए कई शर्तें रखी गई हैं। समूह का क्षेत्र कम से कम दो हेक्टेयर होना चाहिए, 55 प्रतिशत से अधिक भूखंडों पर गोदाम गतिविधि होनी चाहिए और उसकी सीधी पहुंच कम से कम 30 मीटर चौड़ी सड़क से होनी चाहिए।
सड़क, पार्किंग और अग्निशमन भी गोदाम के साथ
पुनर्विकसित गोदाम क्षेत्र में अधिकतम 100 का फर्श क्षेत्र अनुपात और भूखंड पर अधिकतम 70 प्रतिशत निर्माण की अनुमति होगी। कुल क्षेत्र का 10 प्रतिशत तक साझा पार्किंग, मालवाहक वाहनों के खड़े होने और माल चढ़ाने-उतारने के लिए रखना होगा। बिजली उपकेंद्र, पानी, अग्निशमन केंद्र, पुलिस चौकी और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं के लिए भी जगह अनिवार्य होगी। पार्किंग प्रति 100 वर्गमीटर निर्माण क्षेत्र पर दो कार समकक्ष स्थान के हिसाब से करनी होगी।
20 हजार वर्गमीटर का होगा नियोजित गोदाम क्षेत्र
मास्टर प्लान में नियोजित गोदाम क्षेत्र के लिए न्यूनतम 20,000 वर्गमीटर भूखंड तय किया गया है। 500 वर्गमीटर तक के भूखंड के लिए 140 का फर्श क्षेत्र अनुपात और 12 मीटर सड़क, 500 से 2,000 वर्गमीटर के लिए 120 और 18 मीटर सड़क तथा 2,000 वर्गमीटर से बड़े भूखंड के लिए 100 और 24 मीटर सड़क का प्रावधान है।
गोदाम के भीतर ही माल चढ़ाने-उतारने की व्यवस्था करनी होगी। 500 वर्गमीटर या उससे बड़े भूखंड में वर्षा जल संचयन, पानी की टंकी, कचरा प्रबंधन और सौर ऊर्जा जैसी सुविधाएं भी जरूरी होंगी। गोदामों में केवल गैर-खतरनाक सामग्री रखने की अनुमति होगी।