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यमुना एक्सप्रेस-वे हादसा: दिल्ली में फिर निजी बसों की मनमानी, छत पर सामान और इमरजेंसी गेट बंद; पड़ताल खुलासा

Thu, 15 Oct 2026 08:52 AM IST
अनुज कुमार राजकुमार शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजकुमार शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 15 Oct 2026 08:52 AM IST
सार
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यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग से नौ लोगों की मौत के बीस दिन बाद भी सबक नहीं लिया गया है। अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन के सामने दिल्ली से नोएडा जाने वाली सड़क पर निजी बसें फिर से नियमों की अनदेखी कर रही हैं।

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Even 20 days after Yamuna Expressway accident private buses continue to operate arbitrarily at Akshardham
अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन के सामने निजी बसों का आवाजाही शुरू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

20 दिन पहले यमुना एक्सप्रेसवे पर दिल्ली से महोबा जा आ रही स्लीपर बस में आग से नौ लोगों की मौत को कुछ ही दिन में अधिकारी और निजी बस चलवाने और चलाने वाले भूल गए। अब फिर से अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन के सामने दिल्ली से नोएडा जाने वाली सड़क पर शाम ढलते ही निजी बसों की आवाजाही पहले की तरह ही है। वह हर दिन नियमों को नजरअंदाज करती हैं। 
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पड़ताल के दौरान यहां हर घंटे सैकड़ों बसें निकलतीं दिखाई दीं। इतना ही नहीं इन बसों की छतों पर भारी सामान लदा था। सामान को तिरपाल या बड़े कपड़े से ढककर ले जाया जा रहा था। ऐसे में बसों की सुरक्षा और यात्रियों की जान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। छत पर जरूरत से ज्यादा सामान होने से बस का संतुलन बिगड़ सकता है। तेज रफ्तार या अचानक मोड़ लेने की स्थिति में हादसे का खतरा बढ़ सकता है। 
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बसों के शीशे पर लगाए थे काले फिल्म
कुछ बसों की खिड़कियों पर काली फिल्म लगी दिखाई दीं, जिससे बाहर से अंदर देखना मुश्किल हो रहा था। इसके अलावा, कुछ बसों में आपातकालीन निकास के स्थान पर सीटें लगाकर उसे बंद किए जाने जैसा दृश्य भी नजर आया। अगर आपातकालीन दरवाजे या रास्ते बंद हैं, तो आग अथवा दुर्घटना के समय यात्रियों को बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है।
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चिंता की बात यह भी है कि पिछले दो महीनों में निजी बसों से जुड़े दो बड़े मामले सामने आने के बावजूद सड़क पर सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल बने हुए हैं। 

स्थानीय स्तर पर यह भी देखने को मिला कि पिछले दिनों जिस निजी कंपनी की बस में आग लगी थी, उसकी बसें दोबारा सड़क पर चलती दिखाई दीं। हालांकि, इन बसों की फिटनेस और सुरक्षा जांच की स्थिति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी। 


सवाल है कि हादसों के बाद कुछ दिनों तक जांच और कार्रवाई दिखाई देती है, लेकिन समय बीतने के साथ निगरानी कमजोर क्यों पड़ जाती है? परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को इन बसों के भार, फिटनेस, खिड़कियों और आपातकालीन निकास की जांच करनी चाहिए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से समझौता न हो।

ये मनमानियां जारी
बस की छत पर सामान
काली फिल्म लगे वाहन
आपातकालीन दरवाजा बंद करना
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