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जामिया में कब होंगे छात्र संघ चुनाव?: रजिस्ट्रार ने बताया पूरा प्लान, अब भी भूख हड़ताल जारी; जानें पूरा मामला
Sat, 24 Oct 2026 05:30 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sat, 24 Oct 2026 05:30 PM IST
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर 13वें दिन भी आंदोलन जारी है। रजिस्ट्रार ने संविधान का मसौदा मिलते ही चुनाव की घोषणा का आश्वासन दिया है। अभी भी पांच छात्र भूख हड़ताल पर हैं।
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जामिया में आंदोलन जारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने शनिवार को कहा कि विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव की घोषणा संविधान का मसौदा (ड्राफ्ट) मिलते ही कर देगा। उन्होंने यह बात प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात के बाद कही। छात्रों की भूख हड़ताल शनिवार को 13वें दिन में प्रवेश कर गई।
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प्रदर्शनकारी छात्र जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (जेएमआईएसयू) को बहाल करने, छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर को हटाने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
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पत्रकारों से बात करते हुए रजिस्ट्रार रिजवी ने कहा कि उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और छात्र संघ चुनाव कराने की उनकी मांग पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि 'छात्र संघ चुनाव कराने की उनकी मांग के संबंध में मैंने उन्हें बताया कि हम पहले ही एक मसौदा समिति गठित कर चुके हैं, जिसे संविधान तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बाद उन्होंने समयसीमा के बारे में पूछा। मैंने उनसे कहा कि वे जितनी जल्दी संविधान का मसौदा तैयार करेंगे, हम उतनी ही जल्दी चुनाव कराएंगे। इस प्रस्ताव पर वे सहमत हो गए।'
रजिस्ट्रार ने बताया कि छात्रों ने चुनाव की तारीखों के बारे में पूछा था। इस पर उन्होंने दोहराया कि समिति द्वारा तैयार संविधान का मसौदा मिलने के बाद विश्वविद्यालय चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा। इस समिति में छात्रों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। रिजवी ने कहा कि 'जब आपने स्वयं संविधान का मसौदा तैयार करने का प्रस्ताव दिया है और समिति में अपने प्रतिनिधियों को शामिल किया है, तो मसौदा मिलते ही हम चुनाव की घोषणा कर देंगे।'
रजिस्ट्रार ने बताया कि छात्रों ने चुनाव की तारीखों के बारे में पूछा था। इस पर उन्होंने दोहराया कि समिति द्वारा तैयार संविधान का मसौदा मिलने के बाद विश्वविद्यालय चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा। इस समिति में छात्रों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। रिजवी ने कहा कि 'जब आपने स्वयं संविधान का मसौदा तैयार करने का प्रस्ताव दिया है और समिति में अपने प्रतिनिधियों को शामिल किया है, तो मसौदा मिलते ही हम चुनाव की घोषणा कर देंगे।'
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अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा होगी
छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग पर रजिस्ट्रार ने कहा कि विश्वविद्यालय संबंधित मामलों की समीक्षा करेगा और उन्हें अनुशासनात्मक समिति (डीसी) के समक्ष रखेगा। उन्होंने कहा, "मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि हम इन कार्रवाइयों की समीक्षा करेंगे, मामले को अनुशासनात्मक समिति के सामने रखेंगे और जो छात्र निर्दोष पाए जाएंगे, उन्हें बहाल किया जाएगा।"
'फ्री कश्मीर' लिखे जाने की निंदा
जामिया के रजिस्ट्रार रिजवी ने परिसर में कथित तौर पर 'फ्री कश्मीर' लिखे जाने की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ अनधिकृत लोग विश्वविद्यालय परिसर में दाखिल हुए थे। उन्होंने कहा कि 'कल दीवारों पर लिखे गए 'फ्री कश्मीर' नारे की हम कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। हम किसी भी परिस्थिति में इसका समर्थन नहीं करेंगे।'
छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग पर रजिस्ट्रार ने कहा कि विश्वविद्यालय संबंधित मामलों की समीक्षा करेगा और उन्हें अनुशासनात्मक समिति (डीसी) के समक्ष रखेगा। उन्होंने कहा, "मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि हम इन कार्रवाइयों की समीक्षा करेंगे, मामले को अनुशासनात्मक समिति के सामने रखेंगे और जो छात्र निर्दोष पाए जाएंगे, उन्हें बहाल किया जाएगा।"
'फ्री कश्मीर' लिखे जाने की निंदा
जामिया के रजिस्ट्रार रिजवी ने परिसर में कथित तौर पर 'फ्री कश्मीर' लिखे जाने की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ अनधिकृत लोग विश्वविद्यालय परिसर में दाखिल हुए थे। उन्होंने कहा कि 'कल दीवारों पर लिखे गए 'फ्री कश्मीर' नारे की हम कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। हम किसी भी परिस्थिति में इसका समर्थन नहीं करेंगे।'
राजनीतिक नेताओं के परिसर में प्रवेश का जिक्र करते हुए रिजवी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद इमरान मसूद दीवार तोड़कर अंदर आए थे, जबकि इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रवेश के लिए ताला तोड़ा था। उन्होंने कहा, "ये अनधिकृत लोग हैं। हमने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और उनसे कार्रवाई करने को कहा है। एआईएमआईएम के कुछ अन्य लोग भी परिसर में दाखिल हुए थे।"
जामिया में अगले आदेश तक ऑनलाइन होंगी कक्षाएं
जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने परिसर में जारी घटनाक्रम और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल प्रभाव से सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं अगले आदेश तक ऑनलाइन संचालित करने का फैसला किया है।
जामिया में अगले आदेश तक ऑनलाइन होंगी कक्षाएं
जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने परिसर में जारी घटनाक्रम और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल प्रभाव से सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं अगले आदेश तक ऑनलाइन संचालित करने का फैसला किया है।
इमरान मसूद बोले- छात्रों की मांगें सुने प्रशासन
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों की मांगों पर विचार करने और उनके निष्कासन के फैसले वापस लेने की अपील की है। वह शुक्रवार को प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने परिसर पहुंचे थे। मसूद ने एएनआई से कहा, 'जामिया की स्थिति बेहद गंभीर है। मैं कल परिसर गया था। छात्र 12 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को उनकी बात सुननी चाहिए, उनका निष्कासन वापस लिया जाना चाहिए और उनकी मांगों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे ही चुनाव की तारीखों की घोषणा होगी, यह प्रदर्शन तुरंत समाप्त हो जाएगा।'
'फ्री कश्मीर' के नारे लगाए जाने से इनकार करते हुए मसूद ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान नारे नहीं लगाए गए थे, बल्कि दीवारों पर लिखे गए थे। उन्होंने कहा, 'कोई नारा नहीं लगाया गया था। ये केवल दीवारों पर लिखे गए थे। मैंने वहां स्पष्ट रूप से कहा था कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहां मौजूद सभी छात्रों ने इसका समर्थन किया।'
शुक्रवार रात जामिया परिसर के दौरे के दौरान दिल्ली पुलिस ने इमरान मसूद को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में उन्होंने एएनआई से कहा कि वहां 'फ्री कश्मीर' के समर्थन में एक भी नारा नहीं लगाया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सभी के सामने ऐसे नारों की कड़ी निंदा की और कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों की मांगों पर विचार करने और उनके निष्कासन के फैसले वापस लेने की अपील की है। वह शुक्रवार को प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने परिसर पहुंचे थे। मसूद ने एएनआई से कहा, 'जामिया की स्थिति बेहद गंभीर है। मैं कल परिसर गया था। छात्र 12 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को उनकी बात सुननी चाहिए, उनका निष्कासन वापस लिया जाना चाहिए और उनकी मांगों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे ही चुनाव की तारीखों की घोषणा होगी, यह प्रदर्शन तुरंत समाप्त हो जाएगा।'
'फ्री कश्मीर' के नारे लगाए जाने से इनकार करते हुए मसूद ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान नारे नहीं लगाए गए थे, बल्कि दीवारों पर लिखे गए थे। उन्होंने कहा, 'कोई नारा नहीं लगाया गया था। ये केवल दीवारों पर लिखे गए थे। मैंने वहां स्पष्ट रूप से कहा था कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहां मौजूद सभी छात्रों ने इसका समर्थन किया।'
शुक्रवार रात जामिया परिसर के दौरे के दौरान दिल्ली पुलिस ने इमरान मसूद को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में उन्होंने एएनआई से कहा कि वहां 'फ्री कश्मीर' के समर्थन में एक भी नारा नहीं लगाया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सभी के सामने ऐसे नारों की कड़ी निंदा की और कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।
फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने भी की टिप्पणी
फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने भी कथित नारों की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि देश के अन्य शैक्षणिक संस्थानों और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं। पंडित ने कहा, 'यह देश में पहली बार नहीं हुआ है। हमने जेएनयू और अन्य विश्वविद्यालयों में भी ऐसी घटनाएं देखी हैं। हमने कश्मीर की आजादी और जेल में बंद उमर खालिद तथा शरजील इमाम जैसे लोगों की रिहाई की मांग वाले नारे देखे हैं। ये लोग कौन हैं? ये ताकतें कौन हैं? ये छात्र, प्रोफेसर और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लोगों की पहचान के पीछे छिपकर ऐसे काम कर रहे हैं, जिन्हें मैं आतंकवादी गतिविधियां मानता हूं। मैं इन्हें आतंकवादी कहता हूं।' उन्होंने आगे कहा कि सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है। उनके मुताबिक, सामान्य कानूनों के तहत कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है।
पंडित ने कहा कि सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों को नष्ट करने में सफलता हासिल की है, लेकिन देश के भीतर शैक्षणिक संस्थानों में कथित तौर पर फैल रही ऐसी गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग छात्र और प्रोफेसर होने की पहचान के पीछे ऐसी विचारधारा फैला रहे हैं, जिसे वह आतंकवाद मानते हैं।
उन्होंने जेएनयू की एक महिला प्रोफेसर के कथित बयान का भी जिक्र किया और कहा कि भारत की पहचान और अस्तित्व के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर भी घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में फैल रहे इस तरह के विचारों को खत्म करने की जरूरत बताई।
फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने भी कथित नारों की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि देश के अन्य शैक्षणिक संस्थानों और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं। पंडित ने कहा, 'यह देश में पहली बार नहीं हुआ है। हमने जेएनयू और अन्य विश्वविद्यालयों में भी ऐसी घटनाएं देखी हैं। हमने कश्मीर की आजादी और जेल में बंद उमर खालिद तथा शरजील इमाम जैसे लोगों की रिहाई की मांग वाले नारे देखे हैं। ये लोग कौन हैं? ये ताकतें कौन हैं? ये छात्र, प्रोफेसर और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लोगों की पहचान के पीछे छिपकर ऐसे काम कर रहे हैं, जिन्हें मैं आतंकवादी गतिविधियां मानता हूं। मैं इन्हें आतंकवादी कहता हूं।' उन्होंने आगे कहा कि सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है। उनके मुताबिक, सामान्य कानूनों के तहत कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है।
पंडित ने कहा कि सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों को नष्ट करने में सफलता हासिल की है, लेकिन देश के भीतर शैक्षणिक संस्थानों में कथित तौर पर फैल रही ऐसी गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग छात्र और प्रोफेसर होने की पहचान के पीछे ऐसी विचारधारा फैला रहे हैं, जिसे वह आतंकवाद मानते हैं।
उन्होंने जेएनयू की एक महिला प्रोफेसर के कथित बयान का भी जिक्र किया और कहा कि भारत की पहचान और अस्तित्व के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर भी घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में फैल रहे इस तरह के विचारों को खत्म करने की जरूरत बताई।
12 अक्तूबर से जारी है भूख हड़ताल
जामिया में भूख हड़ताल 12 अक्तूबर को शुरू हुई थी। शनिवार को भी पांच छात्र प्रदर्शन जारी रखे हुए थे। उनकी प्रमुख मांगों में मार्च 2006 में भंग किए गए छात्र संघ की बहाली और मुख्य प्रॉक्टर को पद से हटाना शामिल है। शुरुआत से भूख हड़ताल पर बैठे जासिम अली खान ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने छात्रों का निलंबन वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसर में निर्धारित प्रदर्शन स्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की थी। इसके बाद प्रदर्शन और तेज हो गया था। इससे पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करने, उनकी मांगों की जांच करने और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने के उपाय सुझाने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था।
जामिया में भूख हड़ताल 12 अक्तूबर को शुरू हुई थी। शनिवार को भी पांच छात्र प्रदर्शन जारी रखे हुए थे। उनकी प्रमुख मांगों में मार्च 2006 में भंग किए गए छात्र संघ की बहाली और मुख्य प्रॉक्टर को पद से हटाना शामिल है। शुरुआत से भूख हड़ताल पर बैठे जासिम अली खान ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने छात्रों का निलंबन वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसर में निर्धारित प्रदर्शन स्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की थी। इसके बाद प्रदर्शन और तेज हो गया था। इससे पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करने, उनकी मांगों की जांच करने और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने के उपाय सुझाने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था।