प्रदूषण पर एमसीडी का विंटर प्लान: धूल-कूड़ा, मलबा और लैंडफिल पर फोकस, रोज सड़क की 180 टन डस्ट हो रही जमा
एमसीडी ने सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए शीतकालीन कार्य योजना बनाई है। इसमें धूल नियंत्रण, सफाई व्यवस्था, सड़कों की मरम्मत, प्रदूषण हॉटस्पॉट की निगरानी और लैंडफिल आदि पर काम किया जाएगा।
विस्तार
सर्दियों में प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने सड़क की धूल, कूड़ा, मलबा, निर्माण गतिविधियों और लैंडफिल को निशाने पर रखते हुए विंटर एक्शन प्लान तैयार किया है। धूल नियंत्रण के लिए 167 वाटर स्प्रिंकलर और 28 एंटी-स्मॉग गन तैनात की गई हैं। सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए 70 नई मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें और 1,000 मोटराइज्ड लिटर पिकर चरणबद्ध तरीके से लगाए जाएंगे।
एमसीडी के अधिकार क्षेत्र में करीब 6,127 किलोमीटर सड़कों की नियमित मैनुअल सफाई होती है, जिसमें करीब 57 हजार सफाई मित्र लगे हैं। वहीं 66 मौजूदा मैकेनिकल स्वीपर करीब 4,000 किलोमीटर सड़क की एक दिन छोड़कर सफाई कर रहे हैं। इनसे रोजाना लगभग 180 टन सड़क की धूल एकत्र की जा रही है।
1202 किमी सड़कों की रिसर्फेसिंग
सड़क की धूल कम करने के लिए 2026 में 1,202 किलोमीटर सड़कों की एंड-टू-एंड रिसर्फेसिंग और सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य रखा गया है। जनवरी से अगस्त तक 689 किलोमीटर काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। अप्रैल से अगस्त के बीच 6,797 गड्ढे भी भरे गए। गड्ढों की वैज्ञानिक मरम्मत के लिए एसओपी जारी करने के साथ सीएसआईआर-सीआरआरआई के साथ एमओयू किया गया है।
46 हॉटस्पॉट पर संयुक्त निगरानी
डीपीसीसी ने दिल्ली में 46 प्रदूषण हॉटस्पॉट चिह्नित किए हैं। इन क्षेत्रों में एमसीडी के जोनल उपायुक्तों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। 11 राजस्व जिलों में मॉनिटरिंग कमेटियां और संयुक्त टीमें गठित की गई हैं, जो ग्रैप के प्रावधानों के पालन, फील्ड निरीक्षण और प्रदूषण स्रोतों पर कार्रवाई करेंगी।
कूड़ा जलाने और मलबा डालने पर कार्रवाई
संयुक्त प्रवर्तन दल बायोमास जलाने, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल, अनधिकृत ईंधन के इस्तेमाल और खुले में कूड़ा या सीएंडडी कचरा डालने पर कार्रवाई करेंगे। दिल्ली में रोजाना करीब 5,000 से 6,000 मीट्रिक टन सीएंडडी कचरा निकलता है। इसके संग्रह और निस्तारण के लिए मार्च में ‘मालबा ऐप’ शुरू किया गया था। अब तक 143 अनुरोधों के जरिये 10,463.9 मीट्रिक टन मलबा हटाया गया है।
तीनों लैंडफिल पर 102 लाख टन कचरा बाकी
ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल से जुलाई 2022 से सितंबर 2026 तक 220.06 लाख मीट्रिक टन विरासत कचरा हटाया जा चुका है। इसके बावजूद 12 सितंबर तक तीनों साइटों पर 102.16 लाख मीट्रिक टन कचरा बचा था। इसमें गाजीपुर में 66.95 लाख, भलस्वा में 19.54 लाख और ओखला में 15.67 लाख टन कचरा शामिल है। ओखला को अक्तूबर 2026, भलस्वा को दिसंबर 2026 और गाजीपुर को दिसंबर 2027 तक रेमेडिएट करने का लक्ष्य है।
5,900 टन अतिरिक्त निस्तारण क्षमता
ताजा कचरे के लिए भलस्वा, शिंगोला, ओखला, नरेला-बवाना और गाजीपुर में कुल 5,900 टन प्रतिदिन अतिरिक्त निस्तारण क्षमता विकसित करने की योजना है। अप्रैल-अगस्त के बीच 4,00,282 पौधे लगाए गए और 9.53 लाख वर्गमीटर क्षेत्र को हरित किया गया। वहीं मार्च-सितंबर के दौरान रेलवे ट्रैक के 123 स्थानों से 44,016 मीट्रिक टन विरासत कचरा हटाया गया।