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मास्टर प्लान लागू करने के लिए सरकार के पास है राजनीतिक इच्छाशक्ति: आशीष सूद
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लैंड पूलिंग, पुनर्विकास और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट से दिल्ली के नियोजित विकास पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पहले के मास्टर प्लानों को लागू करने में देरी हुई, लेकिन मास्टर प्लान-2047 को लागू करने के लिए मौजूदा सरकार के पास राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट विजन है। केंद्र, केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार योजना को लागू करने को लेकर गंभीर हैं।
मीडिया से बातचीत में सूद ने कहा कि दिल्ली में जमीन सीमित है, इसलिए शहर का विस्तार करने के बजाय उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग जरूरी है। लैंड पूलिंग के जरिए 2,000 वर्गमीटर तक की जमीन को एक साथ लेकर नियोजित विकास किया जा सकेगा। इससे बड़े और अधिक मकानों की संभावनाएं बढ़ेंगी।
3,000 वर्गमीटर के नियोजित क्षेत्रों में 75 प्रतिशत से अधिक निवासी पुनर्विकास के पक्ष में हों तो 1.5 फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) के साथ पुनर्विकास की अनुमति होगी। इससे पुराने और कम उपयोग वाले आवासीय क्षेत्रों में अतिरिक्त आवास तैयार किए जा सकेंगे। अनधिकृत कॉलोनियों के 2,000 वर्गमीटर क्षेत्र में भी नियोजित विकास का रास्ता खुलेगा।
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मंत्री ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को अहम बताते हुए कहा कि मेट्रो व सार्वजनिक परिवहन के आसपास विकास से यातायात और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। पुराने क्षेत्रों में रेट्रोफिटिंग से मौजूदा ढांचे को बेहतर किया जाएगा।
खादर में नए निर्माण पर रोक
यमुना के खादर क्षेत्र में नए विकास की अनुमति नहीं होगी। अरावली में हरित क्षेत्र विकसित करने के साथ 52 किमी साइकिल ट्रैक और 200 किमी से अधिक लंबे पार्क कनेक्टर की योजना है। साहिबी नदी के आसपास हरित पट्टी विकसित की जाएगी। लैंड पूलिंग से गांवों के आसपास नियोजित विकास को गति देने तथा लाल डोरे के विस्तार और गांवों के शहरीकरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर भी काम होगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पहले के मास्टर प्लानों को लागू करने में देरी हुई, लेकिन मास्टर प्लान-2047 को लागू करने के लिए मौजूदा सरकार के पास राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट विजन है। केंद्र, केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली सरकार योजना को लागू करने को लेकर गंभीर हैं।
मीडिया से बातचीत में सूद ने कहा कि दिल्ली में जमीन सीमित है, इसलिए शहर का विस्तार करने के बजाय उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग जरूरी है। लैंड पूलिंग के जरिए 2,000 वर्गमीटर तक की जमीन को एक साथ लेकर नियोजित विकास किया जा सकेगा। इससे बड़े और अधिक मकानों की संभावनाएं बढ़ेंगी।
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3,000 वर्गमीटर के नियोजित क्षेत्रों में 75 प्रतिशत से अधिक निवासी पुनर्विकास के पक्ष में हों तो 1.5 फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) के साथ पुनर्विकास की अनुमति होगी। इससे पुराने और कम उपयोग वाले आवासीय क्षेत्रों में अतिरिक्त आवास तैयार किए जा सकेंगे। अनधिकृत कॉलोनियों के 2,000 वर्गमीटर क्षेत्र में भी नियोजित विकास का रास्ता खुलेगा।
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मंत्री ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को अहम बताते हुए कहा कि मेट्रो व सार्वजनिक परिवहन के आसपास विकास से यातायात और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। पुराने क्षेत्रों में रेट्रोफिटिंग से मौजूदा ढांचे को बेहतर किया जाएगा।
खादर में नए निर्माण पर रोक
यमुना के खादर क्षेत्र में नए विकास की अनुमति नहीं होगी। अरावली में हरित क्षेत्र विकसित करने के साथ 52 किमी साइकिल ट्रैक और 200 किमी से अधिक लंबे पार्क कनेक्टर की योजना है। साहिबी नदी के आसपास हरित पट्टी विकसित की जाएगी। लैंड पूलिंग से गांवों के आसपास नियोजित विकास को गति देने तथा लाल डोरे के विस्तार और गांवों के शहरीकरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर भी काम होगा।