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उच्च शिक्षा: डीटीयू में पढ़ सकेंगे सेना के कैडेट, मेडिकल बोर्ड आउट छात्रों को मिलेगा इंजीनियरिंग में दाखिला
Sat, 26 Sep 2026 10:26 AM IST
शाहीन परवीन
अमर उजाला, ब्यूरो
अमर उजाला, ब्यूरो
Published by: शाहीन परवीन
Updated Sat, 26 Sep 2026 10:26 AM IST
दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) ने भारतीय सेना के तकनीकी प्रशिक्षण संस्थानों के उन कैडेट्स को इंजीनियरिंग में दाखिले का अवसर देने का फैसला किया है, जो मेडिकल बोर्ड आउट होने के कारण अपना सैन्य प्रशिक्षण पूरा नहीं कर पाते। इससे ऐसे कैडेट्स अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे और इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर सकेंगे।
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- फोटो : https://dtu.ac.in/
विस्तार
भारतीय सेना के तकनीकी प्रशिक्षण संस्थानों से मेडिकल बोर्ड आउट होने वाले कैडेट के लिए दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई का रास्ता खोल दिया है। विश्वविद्यालय ने ऐसे कैडेट के लिए स्नातक कार्यक्रमों में लेटरल एब्जॉर्शन के दिशा-निर्देश जारी कर दिए है।
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इसके तहत हर शैक्षणिक वर्ष में अधिकतम तीन सुपरन्यूमेरेरी सीटें रखी जाएंगी। एक सीट सिविल इंजीनियरिंग, एक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और एक इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल इंजीनियरिंग में होगी। इन सीटों पर सेना के मेडिकल बोर्ड आउट कैडेट को प्रथम से चौथे वर्ष तक प्रवेश दिया जा सकेगा। हालांकि प्राथमिकता प्रथम वर्ष में प्रवेश चाहने वाले कैडेट को दी जाएगी। इसके बाद दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष के आवेदकों को मौका मिलेगा।
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किसी शाखा में एक से अधिक योग्य आवेदक होने और दूसरी शाखाओं में सीट उपलब्ध होने पर सीट स्थानांतरित की जा सकेगी। हालांकि एक शैक्षणिक वर्ष में किसी शाखा में कुल प्रवेश दो कैडेट से अधिक नहीं होगा। अधिसूचना के अनुसार कैडेट का नामांकन भारतीय सेना करेगी लेकिन अंतिम चयन और प्रवेश का निर्णय डीटीयू के सक्षम प्राधिकारी के पास रहेगा।
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दाखिले की नीति समय-समय पर होगी संशोधित :
डीटीयू ने इस व्यवस्था के लिए एसओपी तैयार की है। नीति को अकादमिक काउंसिल और बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की मंजूरी और सेना के साथ कानूनी रूप से स्वीकृत एमओयू के प्रावधानों के अनुसार लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालय अलग से माइग्रेशन और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट नीति भी तैयार करेगा।
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