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इंटरव्यू: सोशल मीडिया पाेस्ट के कमेंट्स में क्या ढूंढती थीं हरलीन? बोली- मैं डस्की थी और मेरा भाई गोरा
Harleen Sethi Interview: अभिनेत्री हरलीन सेठी ने ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’, ‘कोहरा’, ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ जैसे प्रोजेक्ट्स में अलग-अलग किरदार निभाए हैं। लेकिन एक्टिंग का यह सफर उनके लिए सिर्फ किरदार निभाने तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान उन्हें खुद को स्वीकार करना भी सीखना पड़ा। पढ़िए क्या बोलीं हरलीन...
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हरलीन सेठी, अभिनेत्री
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
एक्ट्रेस हरलीन सेठी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि वह अपने गोरे-चिट्टे भाई से खुद की तुलना करती थीं। रंग को लेकर यह झिझक एक्टिंग में आने के बाद भी उनका पीछा करती रही। ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ के दौरान वह दर्शकों के कमेंट्स में भी अपनी स्किन को लेकर प्रतिक्रिया ढूंढती थीं। फिर एक वक्त ऐसा आया, जब उन्हें एहसास हुआ कि लोग उन्हें उनके रंग के लिए नहीं, उनके काम के लिए पसंद कर रहे हैं।
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हरलीन सेठी
- फोटो : इंस्टाग्राम@itsharleensethi
‘मैं डस्की थी और मेरा भाई गोरा-चिट्टा’
हरलीन के मुताबिक, रंग को लेकर उनकी झिझक किसी एक व्यक्ति की कही बात से नहीं आई। वह खुद की दूसरों से तुलना करती रहीं और धीरे-धीरे यह बात उनके मन में बैठ गई।
अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में हरलीन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि ये ज्यादा सेल्फ-इन्फ्लिक्टेड ही था। जब आप एक तरीके के दिखते हो और आपकी मम्मी एक अलग तरीके की दिखती हैं, तो आपको लगता है कि यार, ये कैसे है? मेरा भाई मेरी मां पर गया था। मेरा भाई भी बहुत सुंदर है। वो एकदम गोरा-चिट्टा था और मैं डस्की। तो मुझे लगता है कि ये चीज खुद से ही आई।’
वह बताती हैं कि बचपन से ही भाई करण के लुक्स की खूब तारीफ होती थी। ‘सब उसको कहते थे कि तुम कितना सुंदर हो। हम कहीं भी जाते थे तो लोग पूछते थे कि यार, तू कब हीरो बन रहा है, तू कब एक्टर है। उसको इतना गुड लुकिंग कहते थे। उसके दिमाग में डाल देते थे कि तुम अच्छे दिखते हो, तुम कैमरे के सामने आ सकते हो।मैं खुद को अपनी मॉम से कंपेयर करती थी और फिर अपने भाई से। आप पापा के फेवरेट हो और भाई का फेवरेट है। तो एक तो मॉम के साथ कंपेयर, ऊपर से भाई वैसे ही सुंदर है और वो भी फेवरेट है। तो बहुत सारी चीजें थीं।’
हरलीन के मुताबिक, रंग को लेकर उनकी झिझक किसी एक व्यक्ति की कही बात से नहीं आई। वह खुद की दूसरों से तुलना करती रहीं और धीरे-धीरे यह बात उनके मन में बैठ गई।
अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में हरलीन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि ये ज्यादा सेल्फ-इन्फ्लिक्टेड ही था। जब आप एक तरीके के दिखते हो और आपकी मम्मी एक अलग तरीके की दिखती हैं, तो आपको लगता है कि यार, ये कैसे है? मेरा भाई मेरी मां पर गया था। मेरा भाई भी बहुत सुंदर है। वो एकदम गोरा-चिट्टा था और मैं डस्की। तो मुझे लगता है कि ये चीज खुद से ही आई।’
वह बताती हैं कि बचपन से ही भाई करण के लुक्स की खूब तारीफ होती थी। ‘सब उसको कहते थे कि तुम कितना सुंदर हो। हम कहीं भी जाते थे तो लोग पूछते थे कि यार, तू कब हीरो बन रहा है, तू कब एक्टर है। उसको इतना गुड लुकिंग कहते थे। उसके दिमाग में डाल देते थे कि तुम अच्छे दिखते हो, तुम कैमरे के सामने आ सकते हो।मैं खुद को अपनी मॉम से कंपेयर करती थी और फिर अपने भाई से। आप पापा के फेवरेट हो और भाई का फेवरेट है। तो एक तो मॉम के साथ कंपेयर, ऊपर से भाई वैसे ही सुंदर है और वो भी फेवरेट है। तो बहुत सारी चीजें थीं।’
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हरलीन सेठी
- फोटो : इंस्टाग्राम
‘मैं खुद से ही लड़ रही थी’, हरलीन ने बताया 15 साल की उम्र से स्किन का स्ट्रगल
हरलीन के मुताबिक, किसी ने उन्हें सीधे तौर पर खूबसूरत न होने का एहसास नहीं कराया।
‘मुझे किसी ने इतना ये सब डायरेक्टली नहीं बोला। मुझे लगता है कि ये ज्यादा सेल्फ-इन्फ्लिक्टेड था। मैं खुद को कंपेयर करती थी।’ करीब 15 साल की उम्र से ही हरलीन अपनी स्किन को लेकर परेशान थीं। उन्हें काफी बाद में इसकी वजह और PCOD- PCOS के बारे में पता चला।
‘मैंने अपनी स्किन के साथ बचपन से बहुत स्ट्रगल किया है। करीब 15 साल की उम्र से। जब मैं करीब 23 साल की हुई, तब मुझे पता चला कि PCOD, PCOS नाम की कोई बीमारी होती है। उसकी वजह से ये सब हो रहा था। इतने साल तो पहले रूट कॉज ही नहीं पता चला। फिर पता चला तो उसको कैसे ट्रीट करना है, वो नहीं पता था। उस टाइम पर उतनी अवेयरनेस नहीं थी। मैं खुद से ही लड़ रही थी।’
हरलीन के मुताबिक, किसी ने उन्हें सीधे तौर पर खूबसूरत न होने का एहसास नहीं कराया।
‘मुझे किसी ने इतना ये सब डायरेक्टली नहीं बोला। मुझे लगता है कि ये ज्यादा सेल्फ-इन्फ्लिक्टेड था। मैं खुद को कंपेयर करती थी।’ करीब 15 साल की उम्र से ही हरलीन अपनी स्किन को लेकर परेशान थीं। उन्हें काफी बाद में इसकी वजह और PCOD- PCOS के बारे में पता चला।
‘मैंने अपनी स्किन के साथ बचपन से बहुत स्ट्रगल किया है। करीब 15 साल की उम्र से। जब मैं करीब 23 साल की हुई, तब मुझे पता चला कि PCOD, PCOS नाम की कोई बीमारी होती है। उसकी वजह से ये सब हो रहा था। इतने साल तो पहले रूट कॉज ही नहीं पता चला। फिर पता चला तो उसको कैसे ट्रीट करना है, वो नहीं पता था। उस टाइम पर उतनी अवेयरनेस नहीं थी। मैं खुद से ही लड़ रही थी।’
हरलीन सेठी, अभिनेत्री
- फोटो : सोशल मीडिया
‘ब्रोकन में डर था कि लोग मुझे देखकर क्या कहेंगे’
हरलीन ने 29 साल की उम्र में एक्टिंग शुरू की। ऐसे में कैमरे के सामने अपने लुक्स को लेकर वह पहले से ज्यादा कॉन्शस थीं। ‘मेरा तो ऐसा भी नहीं था कि बचपन से मुझे पता था कि मुझे एक्टर बनना है, बड़े पर्दे पर आना है। मैंने उस तरीके से कभी एक्टिंग नहीं सीखी। कभी अपने लुक्स का ध्यान नहीं दिया। मैंने बहुत लेट शुरुआत की, 29 पर। आप लड़कियों का करियर ग्राफ देखो जो फिल्मों वगैरह में आती हैं। वो सब 16-17 पर शुरू करती हैं। तो मैं 29 पर शुरू कर रही हूं। तो कॉन्शसनेस होती है कि क्या आप अच्छे दिखते हो स्क्रीन पर, आप कैसे दिखते हो।’
हरलीन ने 29 साल की उम्र में एक्टिंग शुरू की। ऐसे में कैमरे के सामने अपने लुक्स को लेकर वह पहले से ज्यादा कॉन्शस थीं। ‘मेरा तो ऐसा भी नहीं था कि बचपन से मुझे पता था कि मुझे एक्टर बनना है, बड़े पर्दे पर आना है। मैंने उस तरीके से कभी एक्टिंग नहीं सीखी। कभी अपने लुक्स का ध्यान नहीं दिया। मैंने बहुत लेट शुरुआत की, 29 पर। आप लड़कियों का करियर ग्राफ देखो जो फिल्मों वगैरह में आती हैं। वो सब 16-17 पर शुरू करती हैं। तो मैं 29 पर शुरू कर रही हूं। तो कॉन्शसनेस होती है कि क्या आप अच्छे दिखते हो स्क्रीन पर, आप कैसे दिखते हो।’
हरलीन सेठी, अभिनेत्री
- फोटो : सोशल मीडिया
‘मैं कमेंट्स में ढूंढती थी कि किसी ने मेरी स्किन के बारे में कुछ कहा या नहीं’
‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ के दौरान हरलीन के मन में सबसे बड़ा डर अपनी स्किन को लेकर था।
‘सबसे ज्यादा तनाव इस बात का था कि ब्रोकन में जब मुझे लोग देखेंगे तो कैसे देखेंगे। मुझे इतना प्यार मिला। लोग मेरी एक्टिंग की तारीफ कर रहे थे। लेकिन मैं उन कमेंट्स और डीएम में ढूंढती थी कि यार, स्किन के बारे में किसी ने कुछ कहा? इतने प्यार के बीच आज तक मुझे याद नहीं कि एक भी कमेंट मेरी स्किन को लेकर आया हो। वो मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। उस समय मैं अपनी मां के सामने रोई। तब मुझे समझ आया कि लोग आपके स्किल, टैलेंट और स्क्रीन पर आपके काम की तारीफ करते हैं। यह सिर्फ इस बारे में नहीं है कि आप कैसे दिखते हैं। मुझे लगता है कि मेरे लिए यह एक बहुत अलग शुरुआत थी। ब्रोकन ने मुझे एक बहुत बड़ी चीज दी।’
‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ के दौरान हरलीन के मन में सबसे बड़ा डर अपनी स्किन को लेकर था।
‘सबसे ज्यादा तनाव इस बात का था कि ब्रोकन में जब मुझे लोग देखेंगे तो कैसे देखेंगे। मुझे इतना प्यार मिला। लोग मेरी एक्टिंग की तारीफ कर रहे थे। लेकिन मैं उन कमेंट्स और डीएम में ढूंढती थी कि यार, स्किन के बारे में किसी ने कुछ कहा? इतने प्यार के बीच आज तक मुझे याद नहीं कि एक भी कमेंट मेरी स्किन को लेकर आया हो। वो मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। उस समय मैं अपनी मां के सामने रोई। तब मुझे समझ आया कि लोग आपके स्किल, टैलेंट और स्क्रीन पर आपके काम की तारीफ करते हैं। यह सिर्फ इस बारे में नहीं है कि आप कैसे दिखते हैं। मुझे लगता है कि मेरे लिए यह एक बहुत अलग शुरुआत थी। ब्रोकन ने मुझे एक बहुत बड़ी चीज दी।’
हरलीन सेठी, अभिनेत्री
- फोटो : सोशल मीडिया
‘आज भी स्किन को लेकर कॉन्शसनेस रहती है’
दर्शकों के प्यार ने हरलीन का कॉन्फिडेंस जरूर बढ़ाया। लेकिन वह मानती हैं कि यह कॉन्शसनेस पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
‘मुझे नहीं लगता कि वो पूरी तरह खत्म हो जाती है। एक बार आप मोटे थे, तो आपके दिमाग में हमेशा उसकी कॉन्शसनेस रहती है। तो स्किन के साथ भी ऐसा ही होता है। वो कॉन्शसनेस रहती है।’
‘कभी पफी आंखें, कभी ब्लोटिंग’, हार्मोन्स के साथ बदलता है चेहरा
इसके बाद हरलीन उम्र और हार्मोनल बदलावों की भी बात करती हैं।
‘पीसीओडी एक ऐसी चीज है, जो आपकी लाइफस्टाइल से रिलेटेड है। जैसी आपकी लाइफ है, सोना, खाना, पीना, वर्कआउट नहीं करना, बहुत सारी चीजें हैं। तो वो ऊपर-नीचे चलता रहता है। साथ ही, इस उम्र में ये बहुत हार्मोनल भी है। हम जिस एज में जा रहे हैं, गर्ल्स, हार्मोन्स के साथ हर रोज आप अलग दिखते हो। कभी आपकी आंखें पफी हैं, कभी फेस पर वॉटर रिटेंशन है, कभी बॉडी में ब्लोटिंग है। हार्मोन्स वैसे इतनी चीजें बदलते रहते हैं, तो स्क्रीन पर भी तो आता ही है।’
दर्शकों के प्यार ने हरलीन का कॉन्फिडेंस जरूर बढ़ाया। लेकिन वह मानती हैं कि यह कॉन्शसनेस पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
‘मुझे नहीं लगता कि वो पूरी तरह खत्म हो जाती है। एक बार आप मोटे थे, तो आपके दिमाग में हमेशा उसकी कॉन्शसनेस रहती है। तो स्किन के साथ भी ऐसा ही होता है। वो कॉन्शसनेस रहती है।’
‘कभी पफी आंखें, कभी ब्लोटिंग’, हार्मोन्स के साथ बदलता है चेहरा
इसके बाद हरलीन उम्र और हार्मोनल बदलावों की भी बात करती हैं।
‘पीसीओडी एक ऐसी चीज है, जो आपकी लाइफस्टाइल से रिलेटेड है। जैसी आपकी लाइफ है, सोना, खाना, पीना, वर्कआउट नहीं करना, बहुत सारी चीजें हैं। तो वो ऊपर-नीचे चलता रहता है। साथ ही, इस उम्र में ये बहुत हार्मोनल भी है। हम जिस एज में जा रहे हैं, गर्ल्स, हार्मोन्स के साथ हर रोज आप अलग दिखते हो। कभी आपकी आंखें पफी हैं, कभी फेस पर वॉटर रिटेंशन है, कभी बॉडी में ब्लोटिंग है। हार्मोन्स वैसे इतनी चीजें बदलते रहते हैं, तो स्क्रीन पर भी तो आता ही है।’
हरलीन सेठी, अभिनेत्री
- फोटो : सोशल मीडिया
‘अब लगता है लोग लुक से ज्यादा स्किल के लिए पसंद करते हैं’
दर्शकों के प्यार ने हरलीन का नजरिया जरूर बदला। ‘एक टाइम के बाद ये कॉन्फिडेंस भी आने लगता है कि लोग आपको लुक से ज्यादा आपकी स्किल के लिए पसंद करते हैं। तो फिर लुक से थोड़ा फोकस हटने लगता है।’
‘बतौर एक्टर आपको भूलना पड़ता है कि आप कैसे दिख रहे हो’
हरलीन के लिए खुद को स्क्रीन पर देखना आज भी आसान नहीं है।
‘अपने आपको देखना वैसे भी हर एक्टर की बस की बात नहीं है। अपने आपको स्क्रीन पर देखना बिल्कुल आसान नहीं है। आप खुद ही जज कर रहे होते हो। आपका इमोशन, गुस्सा एक तरीके से फेस पर दिखता है। सैडनेस एक तरीके से फेस पर दिखती है। तो आप इतने कॉन्शस नहीं हो सकते। मुझे लगता है, अपने आपको देखना हार्ड होता है। आप कॉन्स्टेंट कॉन्फ्लिक्ट में रहते हो दिमाग में।’
दर्शकों के प्यार ने हरलीन का नजरिया जरूर बदला। ‘एक टाइम के बाद ये कॉन्फिडेंस भी आने लगता है कि लोग आपको लुक से ज्यादा आपकी स्किल के लिए पसंद करते हैं। तो फिर लुक से थोड़ा फोकस हटने लगता है।’
‘बतौर एक्टर आपको भूलना पड़ता है कि आप कैसे दिख रहे हो’
हरलीन के लिए खुद को स्क्रीन पर देखना आज भी आसान नहीं है।
‘अपने आपको देखना वैसे भी हर एक्टर की बस की बात नहीं है। अपने आपको स्क्रीन पर देखना बिल्कुल आसान नहीं है। आप खुद ही जज कर रहे होते हो। आपका इमोशन, गुस्सा एक तरीके से फेस पर दिखता है। सैडनेस एक तरीके से फेस पर दिखती है। तो आप इतने कॉन्शस नहीं हो सकते। मुझे लगता है, अपने आपको देखना हार्ड होता है। आप कॉन्स्टेंट कॉन्फ्लिक्ट में रहते हो दिमाग में।’
हरलीन सेठी, अभिनेत्री
- फोटो : सोशल मीडिया
‘कैमरे पर अच्छा दिखना ही सबकुछ नहीं’
हरलीन अब मानती हैं कि एक्टिंग में अपने लुक से ज्यादा किरदार पर ध्यान देना जरूरी है। ‘एक कॉमन मैन भी सेल्फी खींचता है तो 10 खिंचाता है। 10 में से एक चूज करता है और वो सोशल मीडिया पर डालता है। एक एक्टर के लिए कितना हार्ड है सोचो। अगर आपने एक ही टेक दिया और वो उस एंगल से है जो डायरेक्टर को जाएगा। हो सकता है वो सबसे फ्लैटरिंग न हो, लेकिन सीन के लिए राइट हो। तो ये चीजें आप कंट्रोल नहीं कर सकते। आपको बस ये भूलना पड़ता है कि आप कैसे दिख रहे हो। बस कैरेक्टर के माइंड में रहो। कैमरे पर अच्छा दिखना ही सबकुछ नहीं।'
हरलीन अब मानती हैं कि एक्टिंग में अपने लुक से ज्यादा किरदार पर ध्यान देना जरूरी है। ‘एक कॉमन मैन भी सेल्फी खींचता है तो 10 खिंचाता है। 10 में से एक चूज करता है और वो सोशल मीडिया पर डालता है। एक एक्टर के लिए कितना हार्ड है सोचो। अगर आपने एक ही टेक दिया और वो उस एंगल से है जो डायरेक्टर को जाएगा। हो सकता है वो सबसे फ्लैटरिंग न हो, लेकिन सीन के लिए राइट हो। तो ये चीजें आप कंट्रोल नहीं कर सकते। आपको बस ये भूलना पड़ता है कि आप कैसे दिख रहे हो। बस कैरेक्टर के माइंड में रहो। कैमरे पर अच्छा दिखना ही सबकुछ नहीं।'