असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती मामला: असफल उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया को नहीं दे सकते चुनौती, याचिका खारिज
अदालत ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन में निर्धारित शर्तों को स्वीकार कर चयन प्रक्रिया में शामिल होने वाले उम्मीदवार असफल होने के बाद भर्ती प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकते।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन में निर्धारित शर्तों को स्वीकार कर चयन प्रक्रिया में शामिल होने वाले उम्मीदवार असफल होने के बाद भर्ती प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकते। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने भास्कर सहगल और अन्य की ओर से भर्ती रद्द कर दोबारा साक्षात्कार करवाने की मांग खारिज कर दी है। मामला हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से 22 जुलाई 2014 को जारी भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है।
भर्ती के लिए कुल 2,655 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था
इसके तहत अनुबंध आधार पर असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल), क्लास-1 राजपत्रित पदों को भरा जाना था। भर्ती के लिए कुल 2,655 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद 109 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। अंतिम परिणाम में चयन नहीं होने पर याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि अंतिम चयन का एकमात्र आधार 100 अंकों का साक्षात्कार रखा गया और स्क्रीनिंग टेस्ट के अंकों को मेरिट में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने इंटरव्यू के अंकों का अलग-अलग वर्गीकरण नहीं किए जाने को भी मनमाना बताते हुए भर्ती रद्द कर दोबारा साक्षात्कार करवाने की मांग की थी।
अंतिम चयन साक्षात्कार में प्रदर्शन के आधार पर : आयोग
राज्य लोक सेवा आयोग ने अदालत को बताया कि विज्ञापन में स्पष्ट किया गया था कि आवेदकों की संख्या अधिक होने पर स्क्रीनिंग टेस्ट केवल उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए होगा। अंतिम चयन साक्षात्कार में प्रदर्शन के आधार पर किया जाना था। हाईकोर्ट ने आयोग की दलील स्वीकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने विज्ञापन की शर्तों को जानने और समझने के बाद चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। ऐसे में चयन में असफल रहने के बाद वे प्रक्रिया को अवैध नहीं ठहरा सकते।