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हिमाचल के हाल: 13 साल से भवन का इंतजार, कुल्लू के इस मिडिल स्कूल में एक कमरे में चलती हैं तीन कक्षाएं

Tue, 27 Oct 2026 10:29 AM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 27 Oct 2026 10:29 AM IST
सार
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कुल्लू के ढमाह मिडिल स्कूल को 2013 में दर्जा मिलने के बाद भी अपना भवन नहीं मिला है। एक जर्जर कमरे में तीन कक्षाओं के 14 बच्चे पढ़ रहे हैं और भवन निर्माण के लिए बजट का इंतजार है।

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dhamah middle school kullu no building no budget 13 years
इस एक कमरे में चलता है नित्थर का ढमाह स्कूल। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

उप तहसील नित्थर के अंतर्गत आने वाली राजकीय माध्यमिक पाठशाला ढमाह आज भी व्यवस्था की बेरुखी का शिकार है। वर्ष 2013 में माध्यमिक स्कूल का दर्जा मिलने के बावजूद यह विद्यालय करीब 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी अपने भवन में संचालित नहीं हो पाया है।  वर्तमान में यह स्कूल प्राथमिक पाठशाला के एकमात्र खस्ताहाल कमरे में संचालित हो रहा है। बीते 13 वर्षों में सरकारें और अधिकारी बदलते रहे, लेकिन इस पाठशाला की तकदीर संवारने वाला कोई खेवनहार सामने नहीं आया। स्कूल भवन निर्माण की योजनाएं वर्षों से अधर में लटकी हैं। न तो भवन निर्माण के लिए बजट का प्रावधान किया गया और न ही अतिरिक्त कमरों की कोई व्यवस्था हो पाई। 

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पाठशाला ढमाह की स्थिति बेहद दयनीय है। जिस कमरे में यह स्कूल चल रहा है, उसकी छत जगह-जगह से उखड़ चुकी है। हर समय हादसे का अंदेशा बना रहता है। विशेषकर बरसात के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले लेती है, जिससे स्कूल स्टाफ और बच्चों में हमेशा डर का माहौल रहता है। विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। 
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इसी एक कमरे में छठी, सातवीं और आठवीं की कक्षाएं एक साथ लगाई जा रही हैं। इसके साथ ही स्कूल का कार्यालय भी इसी कमरे से संचालित हो रहा है। सुविधाओं के अभाव के चलते ग्रामीण अपने बच्चों का दाखिला इस स्कूल में करवाने से कतरा रहे हैं। 
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वर्तमान समय में इस विद्यालय में छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा में कुल 14 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ये विद्यार्थी ढमाह सहित नींथा और केउरी जैसे दूर-दराज के गांवों से यहां आते हैं। बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा के अभाव में अभिभावक अपने बच्चों को लेकर हमेशा चिंतित रहते हैं।

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स्कूल भवन की स्थिति की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है। जैसे ही बजट का प्रावधान होगा, वैसे ही भवन निर्माण की आगामी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। यह मामला विभाग के संज्ञान में है।  - वंदना, खंड शिक्षा अधिकारी (बीईईओ), निरमंड

सरकार शिक्षा में सुधार के बड़े-बड़े दावे कर रही है, मगर बच्चों के बैठने के लिए कमरे तक नहीं हैं। मैं इस गंभीर विषय को शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रमुखता से उठाऊंगा। - लोकेंद्र कुमार, विधायक, आनी

एक जर्जर कमरे में तीन कक्षाएं चल रही हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण अन्य ग्रामीण यहां बच्चों का दाखिला नहीं करवाते। हमें हर समय बच्चों की सुरक्षा का डर सताता है। सरकार को जल्द नए कमरों का निर्माण कराना चाहिए। - कमलजीत, अभिभावक
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