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कुल्लू दशहरा: रूढ़ियां तोड़ देव परंपराओं की कमान संभाल रहीं महिलाएं, कारदार बनकर पूजा पाठ; जानें विस्तार से

Mon, 26 Oct 2026 10:52 AM IST
Ankesh Dogra राकेश कुमार/कुल्लू/धर्मशाला।
राकेश कुमार/कुल्लू/धर्मशाला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 26 Oct 2026 10:52 AM IST
सार
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देवभूमि कुल्लू में महिलाएं सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर देव व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। जिले में छह महिलाएं कारदार के रूप में पूजा-पाठ, देव संपत्ति की देखरेख और सदियों पुरानी परंपराओं के संरक्षण में योगदान दे रही हैं।

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Women Breaking Barriers in Kullu Dev Traditions
कारदार सुधा शर्मा/शकुंतला कटोच, कारदार - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

देवभूमि कुल्लू में महिलाएं अब केवल देव परंपराओं की साक्षी नहीं, बल्कि उनके संचालन की कमान भी संभाल रही हैं। सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए आधी आबादी देवी-देवताओं की कारदार बनकर देव व्यवस्था का कुशल प्रबंधन कर रही है। 

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पूजा-पाठ की व्यवस्था, हारियान क्षेत्र के दौरों, देव संपत्ति की देखरेख से लेकर सदियों पुरानी परंपराओं के संरक्षण तक हर मोर्चे पर उनकी भूमिका अहम साबित हो रही है। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में भी महिला कारदारों की मौजूदगी देव समाज में बदलती सोच और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की मिसाल पेश कर रही है। 
 
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जिले में छह महिलाएं कारदार की भूमिका निभा रही हैं। इनमें कटराईं के देवता वीर नाथ गौहरी की कारदार चंद्रकला कटोच, धाऊगी के देव लक्ष्मी नारायण की शारदा शर्मा, शांघड़ के देव शंगचूल की सुधा शर्मा और राउगी के देव रूमणू नाग की कारदार देवादेई शामिल हैं। इसके अलावा देवता सरबल नाग सौर की करीब दो से तीन दशक तक और देवता  लरांई महादेव की कारदार भी महिलाएं रही हैं।
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जिला देवी देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि देव समाज में कारदार को देवता का प्रतिनिधि माना जाता है और देवता के बाद व्यवस्था प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी उसी पर रहती है। पहले पीढ़ी-दर-पीढ़ी पुरुषों को ही यह दायित्व सौंपा जाता था, लेकिन अब महिलाएं भी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं।

चंद्रकला ने देवता के आदेश पर स्वीकारी जिम्मेदारी 
देव जय वीर नाथ गौहरी की कारदार चंद्रकला कटोच इस बदलाव की मिसाल हैं। पति के निधन के बाद 2019 में उन्हें देवता के आदेश पर कारदार बनाया गया। शुरुआत में दो बार इन्कार के बाद उन्होंने देव आग्रह पर इसे स्वीकार किया। अब वह मंदिर और देव परंपराओं का पूरा प्रबंधन संभाल रही हैं।

सुधा शर्मा ने पिता के बाद संभाली कमान 
शांघड़ के अधिष्ठाता देव शंगचूल महादेव की कारदार सुधा शर्मा बीते आठ वर्षों से यह दायित्व संभाल रही हैं। पिता के देहांत के बाद उन्हें यह कार्य सौंपा गया। वह स्थानीय देव कार्यों के साथ दशहरा उत्सव में भी परंपराओं का निर्वहन कर रही हैं।

शारदा 22 वर्षों से निभा रहीं हैं कारदार का दायित्व
धाऊगी के देव लक्ष्मी नारायण की कारदार शारदा शर्मा 22 वर्षों से देव व्यवस्था संचालित कर रही हैं। पिता के बाद भाई न होने पर यह जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। उनका कहना है कि देवता के आशीर्वाद से वह अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से कर रही हैं।
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