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मंडी: दवाड़ा फ्लाईओवर के तीन पिलर नए सिरे से बनेंगे, झलोगी टनल का मुहाना 300 मीटर आगे करने की तैयारी
Thu, 17 Sep 2026 12:52 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 17 Sep 2026 12:52 PM IST
मंडी में कीरतपुर-मनाली फोरलेन के आपदा प्रभावित हिस्से को सुरक्षित बनाने के लिए एनएचएआई ने तीन अहम कार्य प्रस्तावित किए हैं। दवाड़ा फ्लाईओवर के तीन पिलर नए सिरे से बनाए जाएंगे। झलोगी टनल का मुहाना करीब 300 मीटर आगे किया जाएगा, जबकि हणोगी की बाईं सुरंग को केबल एंकरिंग से पहाड़ के साथ सुरक्षित किया जाएगा। इन कार्यों को स्वीकृति मिलने के बाद यातायात व्यवस्था और बेहतर होने की उम्मीद है।
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दवाड़ा फ्लाईओवर के तीन पिलर नए सिरे से बनेंगे
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सफर को और सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने तीन अहम कार्य प्रस्तावित किए हैं। दवाड़ा फ्लाईओवर के क्षतिग्रस्त तीन पिलर नए सिरे से बनाए जाएंगे। इसके साथ ही झलोगी सुरंग का मुहाना मौजूदा स्थान से करीब 300 मीटर आगे करने की तैयारी है। हणोगी में बाईं सुरंग को पहाड़ से अतिरिक्त सुरक्षा देने के लिए केबल एंकरिंग की योजना भी बनाई गई है।
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वर्ष 2025 में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान पहाड़ से भारी चट्टानें और मलबा गिरने के कारण दवाड़ा फ्लाईओवर के पिलर और स्लैब क्षतिग्रस्त हो गए थे। झलोगी सुरंग का मुहाना भी इसकी चपेट में आया था। इसके बाद इस हिस्से में यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। अब तकनीकी जांच के बाद एनएचएआई ने प्रभावित ढांचे को दोबारा मजबूत करने की योजना तैयार की है।
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प्रस्ताव के अनुसार दवाड़ा फ्लाईओवर के चार क्षतिग्रस्त स्लैब हटाए जाएंगे। इसके अलावा तीन पिलरों को भी पूरी तरह हटाकर नए सिरे से बनाया जाएगा। एनएचएआई का उद्देश्य फ्लाईओवर को पहले से अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाना है, ताकि भविष्य में पहाड़ से गिरने वाले मलबे या चट्टानों की स्थिति में नुकसान की आशंका कम हो।
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झलोगी सुरंग के मामले में क्षतिग्रस्त मुहाने को पुराने स्थान पर बनाने के बजाय करीब 300 मीटर आगे निकालने की तैयारी है। इससे सुरंग की लंबाई भी बढ़ेगी। माना जा रहा है कि मुहाना आगे करने से पहाड़ी से गिरने वाले मलबे और चट्टानों से सुरंग के प्रवेश हिस्से को बचाने में मदद मिलेगी।
वहीं, हणोगी में बाईं सुरंग को सुरक्षित करने के लिए केबल एंकरिंग की योजना प्रस्तावित है। इस तकनीक के जरिए पहाड़ की चट्टानों को मजबूत केबल और एंकर के माध्यम से बांधा जाएगा। इससे चट्टानों के खिसकने और भूस्खलन के खतरे को कम करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
झलोगी टनल और फ्लाईओवर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए दोनों कार्यों को एक साथ करवाने की योजना है। डयोड और हणोगी सुरंगों के शुरू होने से कुल्लू-मनाली जाने वाले यात्रियों को पहले ही राहत मिली है। अब दवाड़ा, झलोगी और हणोगी में प्रस्तावित कार्य पूरे होने के बाद इस मार्ग पर यातायात और सुगम होने की उम्मीद है। फिलहाल प्रभावित हिस्सों में जरूरत के अनुसार यातायात संचालित किया जा रहा है। प्रस्तावित कार्यों को धरातल पर उतारने से पहले विभिन्न स्तरों पर चर्चा और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी है।
एनएचएआई पीआईयू मंडी के परियोजना निदेशक वरुण चारी ने बताया कि आपदा में हुए नुकसान के बाद इन कार्यों को दोबारा करने की योजना बनाई गई है। तीन प्रमुख कार्य प्रस्तावित हैं और विभिन्न स्तरों पर चर्चा के बाद इनके लिए स्वीकृति मिलना बाकी है।
झलोगी टनल और फ्लाईओवर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए दोनों कार्यों को एक साथ करवाने की योजना है। डयोड और हणोगी सुरंगों के शुरू होने से कुल्लू-मनाली जाने वाले यात्रियों को पहले ही राहत मिली है। अब दवाड़ा, झलोगी और हणोगी में प्रस्तावित कार्य पूरे होने के बाद इस मार्ग पर यातायात और सुगम होने की उम्मीद है। फिलहाल प्रभावित हिस्सों में जरूरत के अनुसार यातायात संचालित किया जा रहा है। प्रस्तावित कार्यों को धरातल पर उतारने से पहले विभिन्न स्तरों पर चर्चा और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी है।
एनएचएआई पीआईयू मंडी के परियोजना निदेशक वरुण चारी ने बताया कि आपदा में हुए नुकसान के बाद इन कार्यों को दोबारा करने की योजना बनाई गई है। तीन प्रमुख कार्य प्रस्तावित हैं और विभिन्न स्तरों पर चर्चा के बाद इनके लिए स्वीकृति मिलना बाकी है।