{"_id":"6aded50b305b7eb52304e2b0","slug":"bofors-gun-selection-and-defence-deal-controversy-2026-10-26","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"खुशवंत सिंह लिटफेस्ट: चार तोपों के परीक्षण के बाद बोफोर्स बनी सेना की पसंद, सौदे में गड़बड़ी का था विवाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खुशवंत सिंह लिटफेस्ट: चार तोपों के परीक्षण के बाद बोफोर्स बनी सेना की पसंद, सौदे में गड़बड़ी का था विवाद
Mon, 26 Oct 2026 09:50 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, कसौली (सोलन)।
संवाद न्यूज एजेंसी, कसौली (सोलन)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 26 Oct 2026 09:50 AM IST
भारतीय सेना के लिए 1981 में शुरू हुई तोपों की तलाश के दौरान चार विकल्पों का परीक्षण किया गया, जिनमें बोफोर्स भी शामिल थी। प्रोबल दासगुप्ता के अनुसार, बोफोर्स तोप सेना के लिए उपयुक्त थी, लेकिन उसके सौदे में कथित गड़बड़ी विवाद का विषय बनी रही।
विज्ञापन
प्रोबल दासगुप्ता/खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के समापन अवसर पर मौजूद लोग व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
पूर्व भारतीय सैन्य अधिकारी और लेखक प्रोबल दासगुप्ता ने कहा कि जनरल सुंदरजी ने बोफोर्स तोप को भारतीय सेना के लिए उपयुक्त माना था। उनका स्पष्ट कहना था कि तोप अच्छी थी, लेकिन सौदे में गड़बड़ी थी। दासगुप्ता के अनुसार पूरी जांच प्रक्रिया के बाद जनरल सुंदरजी इस मामले में बेदाग पाए गए। सुंदरजी ने रक्षा सचिव एसके भटनागर को नोट भेजकर बोफोर्स सौदे में कथित तौर पर किकबैक (गुप्त रूप से कमीशन) प्राप्त करने वालों के नाम बताने की मांग की थी।
विज्ञापन
सरकार ने ये नाम नहीं बताए, जिसके बाद तत्कालीन रक्षा राज्य मंत्री मंत्री अरुण सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। बोफोर्स तोपों की तलाश 1981 में शुरू हुई थी। इस दौरान चार तोपों की पहचान की गई थी, जिनमें ऑस्ट्रियाई, फ्रांसीसी सोफमा, बोफोर्स और एक ब्रिटिश तोप शामिल थीं। अन्य तोपों के मानदंडों पर खरा न उतरने के बाद बोफोर्स विकल्प के रूप में उभरी।
विज्ञापन
Trending Videos
पारिवारिक त्रासदी ने बदली डॉ. अरविंद की जिंदगी
पद्मश्री ब्रिगेडियर डॉ. अरविंद लाल ने कॉर्पोरेट योगी: फ्रॉम सीकर टू सीईओ सत्र में अपने जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ पर बात की। उन्होंने 1977 में हुई एक पारिवारिक त्रासदी को याद किया, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इस घटना ने उन्हें नौसेना के लड़ाकू पायलट बनने की महत्वाकांक्षा छोड़कर अपने पिता की नैदानिक प्रयोगशाला का नेतृत्व करने के लिए मजबूर किया। उनके पिता ने 1949 में प्रयोगशाला की स्थापना की थी, जिसे डॉ. लाल पैथलैब्स का आधार बनाया गया। डॉ. लाल ने 1977 में इसका कार्यभार संभाला और सेवाओं का विस्तार व आधुनिकीकरण किया।
ऑपरेशन ब्रास टैक्स: प्रोबल दासगुप्ता ने ऑपरेशन ब्रास टैक्स को एक विशाल सैन्य अभ्यास बताया। इस अभ्यास ने भारत को पाकिस्तान की परमाणु क्षमता के विकास से पहले उसे निष्क्रिय करने का संभावित अवसर दिया था। यह सैन्य अभ्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और तीनों सेनाओं के प्रमुखों की साझा सोच का परिणाम था।
पद्मश्री ब्रिगेडियर डॉ. अरविंद लाल ने कॉर्पोरेट योगी: फ्रॉम सीकर टू सीईओ सत्र में अपने जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ पर बात की। उन्होंने 1977 में हुई एक पारिवारिक त्रासदी को याद किया, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इस घटना ने उन्हें नौसेना के लड़ाकू पायलट बनने की महत्वाकांक्षा छोड़कर अपने पिता की नैदानिक प्रयोगशाला का नेतृत्व करने के लिए मजबूर किया। उनके पिता ने 1949 में प्रयोगशाला की स्थापना की थी, जिसे डॉ. लाल पैथलैब्स का आधार बनाया गया। डॉ. लाल ने 1977 में इसका कार्यभार संभाला और सेवाओं का विस्तार व आधुनिकीकरण किया।
ऑपरेशन ब्रास टैक्स: प्रोबल दासगुप्ता ने ऑपरेशन ब्रास टैक्स को एक विशाल सैन्य अभ्यास बताया। इस अभ्यास ने भारत को पाकिस्तान की परमाणु क्षमता के विकास से पहले उसे निष्क्रिय करने का संभावित अवसर दिया था। यह सैन्य अभ्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और तीनों सेनाओं के प्रमुखों की साझा सोच का परिणाम था।