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हिमाचल: मंदिर में चल रही 285 बच्चों की पढ़ाई, दानी ने दी जमीन-पैसा; सरकारी प्रक्रिया में अटका स्कूल भवन
Fri, 30 Oct 2026 10:27 AM IST
Ankesh Dogra
जसवीर ठाकुर, ऊना।
जसवीर ठाकुर, ऊना।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 30 Oct 2026 10:27 AM IST
ऊना जिले के गगरेट क्षेत्र में सरकारी स्कूल के 285 बच्चे पिछले तीन वर्षों से शिव मंदिर परिसर में पढ़ाई कर रहे हैं। पुराना भवन असुरक्षित घोषित होने के बाद गिरा दिया गया था। समाजसेवी महेंद्र शर्मा ने जमीन और करीब 50 लाख रुपये देकर नए भवन का निर्माण शुरू करवाया, लेकिन काम अब तक 70 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।
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स्कूल की जगह मंदिर में पढ़ाई!
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
स्कूल की घंटी बजती है, बच्चे कक्षाओं में पहुंचते हैं और पढ़ाई भी रोजाना की तरह होती है, लेकिन यहां न तो स्कूल की अपनी इमारत है और न ही नियमित कक्षाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं। यह स्थिति किसी अस्थायी शिविर की नहीं, बल्कि ऊना जिले के गगरेट क्षेत्र की राजकीय प्राथमिक पाठशाला बढ़ेड़ा राजपूतां की है। यहां पिछले तीन वर्षों से 285 बच्चों की पढ़ाई शिव मंदिर परिसर में चल रही है।
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विडंबना यह है कि स्कूल के लिए जमीन और भवन निर्माण पर करीब 50 लाख रुपये खर्च करने की पहल एक समाजसेवी ने की, लेकिन सरकारी प्रक्रियाओं और निर्माण कार्य में देरी के चलते बच्चों को अब तक अपनी नई इमारत नहीं मिल पाई है।
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वर्ष 1965 में स्थापित इस स्कूल का पुराना भवन वर्ष 2023 में असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भवन को गिरा दिया गया। इसके बाद स्कूल की कक्षाएं शिव मंदिर परिसर में स्थानांतरित कर दी गईं। तब से लेकर अब तक पढ़ाई के लिए स्थायी भवन उपलब्ध नहीं हो पाया है।
285 बच्चों के लिए मंदिर परिसर ही बना स्कूल
इस विद्यालय में प्री-प्राइमरी के 83 और प्राथमिक कक्षाओं के 202 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कुल 285 विद्यार्थियों की पढ़ाई मंदिर परिसर में संचालित हो रही है। स्कूल का दायरा भी छोटा नहीं है। करीब आठ किलोमीटर के क्षेत्र से अभिभावक अपने बच्चों को वाहनों के माध्यम से यहां पहुंचाते हैं। मंदिर परिसर में पढ़ाई जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं तो की गई हैं, लेकिन इतने बच्चों के लिए स्थायी स्कूल भवन की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। बच्चों की संख्या को देखते हुए पर्याप्त कक्षाएं और सुविधाएं उपलब्ध करवाना भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इस विद्यालय में प्री-प्राइमरी के 83 और प्राथमिक कक्षाओं के 202 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कुल 285 विद्यार्थियों की पढ़ाई मंदिर परिसर में संचालित हो रही है। स्कूल का दायरा भी छोटा नहीं है। करीब आठ किलोमीटर के क्षेत्र से अभिभावक अपने बच्चों को वाहनों के माध्यम से यहां पहुंचाते हैं। मंदिर परिसर में पढ़ाई जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं तो की गई हैं, लेकिन इतने बच्चों के लिए स्थायी स्कूल भवन की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। बच्चों की संख्या को देखते हुए पर्याप्त कक्षाएं और सुविधाएं उपलब्ध करवाना भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
समाजसेवी ने जमीन दी, करीब 50 लाख से शुरू करवाया निर्माण
स्कूल की इमारत की समस्या के बीच स्थानीय समाजसेवी महेंद्र शर्मा आगे आए। उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन शिक्षा विभाग के नाम करवाई और करीब 50 लाख रुपये की लागत से नए स्कूल भवन का निर्माण अपने स्तर पर शुरू करवाया।
स्कूल की इमारत की समस्या के बीच स्थानीय समाजसेवी महेंद्र शर्मा आगे आए। उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन शिक्षा विभाग के नाम करवाई और करीब 50 लाख रुपये की लागत से नए स्कूल भवन का निर्माण अपने स्तर पर शुरू करवाया।
स्थानीय विधायक राकेश कालिया ने भी भवन निर्माण के लिए तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। इसके बावजूद निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं हो पाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नए भवन का करीब 70 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्कूल के लिए जमीन और आर्थिक सहयोग की व्यवस्था हो चुकी है, तो बच्चों को स्थायी भवन मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
पेयजल और शौचालय की व्यवस्था के बीच चल रही पढ़ाई
स्कूल की केंद्रीय मुख्य शिक्षिका नीता जसवाल के अनुसार, मंदिर परिसर में पेयजल, शौचालय और भोजन की वैकल्पिक व्यवस्था के बीच कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए सरकार से अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि 285 बच्चों की जिम्मेदारी को देखते हुए स्कूल में शिक्षकों की संख्या बढ़ाना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
स्कूल की केंद्रीय मुख्य शिक्षिका नीता जसवाल के अनुसार, मंदिर परिसर में पेयजल, शौचालय और भोजन की वैकल्पिक व्यवस्था के बीच कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए सरकार से अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि 285 बच्चों की जिम्मेदारी को देखते हुए स्कूल में शिक्षकों की संख्या बढ़ाना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
एसएमसी ने उठाया अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती का मुद्दा
स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के प्रधान विक्रम सिंह ने भी बच्चों की शिक्षा और सुविधाओं को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि महेंद्र शर्मा ने जमीन उपलब्ध करवाने और भवन निर्माण के लिए करीब 50 लाख रुपये खर्च करके अपनी जिम्मेदारी निभाई है। अब विभाग को भी निर्माण कार्य पूरा करवाने और स्कूल की व्यवस्थाएं सुधारने के लिए तेजी दिखानी चाहिए। उन्होंने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के निर्धारित मानकों के अनुसार अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति करने और प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए अलग शिक्षक तैनात करने की मांग उठाई है।
स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के प्रधान विक्रम सिंह ने भी बच्चों की शिक्षा और सुविधाओं को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि महेंद्र शर्मा ने जमीन उपलब्ध करवाने और भवन निर्माण के लिए करीब 50 लाख रुपये खर्च करके अपनी जिम्मेदारी निभाई है। अब विभाग को भी निर्माण कार्य पूरा करवाने और स्कूल की व्यवस्थाएं सुधारने के लिए तेजी दिखानी चाहिए। उन्होंने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के निर्धारित मानकों के अनुसार अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति करने और प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए अलग शिक्षक तैनात करने की मांग उठाई है।
शिक्षा विभाग ने अगले सत्र से भवन में कक्षाएं शुरू करने का रखा लक्ष्य
इस मामले पर प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक ऊना सोम लाल धीमान ने बताया कि जमीन विभाग के नाम दर्ज हो चुकी है और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। भवन निर्माण का काम जारी है। उन्होंने आगामी शैक्षणिक सत्र से नए भवन में कक्षाएं शुरू करवाने का लक्ष्य निर्धारित होने की जानकारी दी है। अब देखना होगा कि निर्माण कार्य तय समय में पूरा हो पाता है या नहीं। फिलहाल बढ़ेड़ा राजपूतां स्कूल के 285 विद्यार्थियों के लिए मंदिर परिसर ही पढ़ाई का ठिकाना बना हुआ है। बच्चों और अभिभावकों को इंतजार है कि उन्हें जल्द अपना स्थायी स्कूल भवन मिल सके।
इस मामले पर प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक ऊना सोम लाल धीमान ने बताया कि जमीन विभाग के नाम दर्ज हो चुकी है और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। भवन निर्माण का काम जारी है। उन्होंने आगामी शैक्षणिक सत्र से नए भवन में कक्षाएं शुरू करवाने का लक्ष्य निर्धारित होने की जानकारी दी है। अब देखना होगा कि निर्माण कार्य तय समय में पूरा हो पाता है या नहीं। फिलहाल बढ़ेड़ा राजपूतां स्कूल के 285 विद्यार्थियों के लिए मंदिर परिसर ही पढ़ाई का ठिकाना बना हुआ है। बच्चों और अभिभावकों को इंतजार है कि उन्हें जल्द अपना स्थायी स्कूल भवन मिल सके।