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जनगणना 2026: संवेदनशील सवाल पूछने की कर्मियों को मिलेगी ट्रेनिंग, जाति-धर्म से शादी तक कौन-कौन से होंगे सवाल?
Mon, 28 Sep 2026 02:17 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
अजीत खरे, अमर उजाला ब्यूरो
अजीत खरे, अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Mon, 28 Sep 2026 02:17 PM IST
जनगणना के दूसरे चरण से पहले कर्मियों को संवेदनशील सवाल पूछने की खास ट्रेनिंग दी जा रही है। जाति, धर्म, लिंग, प्रजनन क्षमता, दिव्यांगता और प्रवासन से जुड़े सवाल सम्मानपूर्वक पूछने के निर्देश हैं। जवाब पर बहस या सवाल नहीं उठाना होगा। 34 लाख से अधिक कर्मियों की ट्रेनिंग की गुणवत्ता पर आंकड़ों की सटीकता निर्भर करेगी।
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जनगणना
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब व गोवा जैसे राज्यों में जहां जनगणना का दूसरा चरण दिसंबर में ही शुरू हो रहा है, वहां संवेदनशील व मुश्किल सवालों को पूछने के तौर तरीकों को लेकर खासी तैयारी की जा रही है। सबसे ज्यादा जोर नागरिकों से सम्मानजनक संवाद, जवाब को सही से दर्ज करना व धारणाओं व पक्षपात से पूर्णतः बचने पर है। जनगणना कर्मियों से कहा गया है कि जनगणना के दौरान प्रत्येक उत्तरदाता का विश्वास अर्जित करने के लिए मानवीय संवाद की गुणवत्ता बहुत जरूरी है। इस काम में लगे जनगणना कर्मियों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही कि कैसे संवदेनशील सवालों को पूछें। इसमें किसी तरह की बहस की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए और न ही नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी पर सवाल खड़े करने चाहिए। दिव्यांगता, प्रवासन, प्रजनन क्षमता और आर्थिक गतिविधियां संबंधी सवाल पर भी लोगों से सही जानकारी पाने के लिए खास निर्देश दिए जा रहे हैं। लिंग, जाति, प्रजननता और धर्म से संबंधित प्रश्नों के प्रति संवेदनशीलता बरतने को कहा गया है।
नतीजों की सटीकता प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर होगी निर्भर
भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने देश के सभी राज्यों को इस तरह के निर्देश भेजे हैं। उनका कहना है कि सटीकता, पूर्णता और अखंडता 34 लाख से अधिक प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को प्रदान किए जाने वाले प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी, जो जनसंख्या गणना का कार्य करेंगे।
सीएमएमएस पोर्टल से रियल टाइम निगरानी
प्रशिक्षण की गुणवत्ता और उसे समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए सभी स्तरों पर रियल टाइम आधार पर निगरानी सीएमएमएस पोर्टल पर उपलब्ध प्रशिक्षण डैशबोर्ड के माध्यम से होगी। इसमें एचबीएल क्रिएटर वेब मैप जैसी तकनीक का इस्तेमाल होगा। देश में आजादी के बाद पहली बार जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों में जातीय संरचना का विस्तृत रिकॉर्ड दर्ज होगा।
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परिवारों के साथ बातचीत का एक व्यवस्थित ढांचा
परिवारों के साथ बातचीत का एक व्यवस्थित ढांचा प्ररामान तैयार किया गया है। जनगणना के दौरान जनगणना कर्मी पहचान, संबंध, अनुरोध, मदद, आंकड़ों की शुद्धता व निष्ठा के लक्ष्य के साथ काम करेंगे। इसी आधार पर प्रगणकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद अधिकारियों द्वारा इन्हें सेवा भाव की शपथ दिलाई जाएगी।
विधानसभा चुनाव के चलते उत्तर प्रदेश, गोवा, पंजाब व उत्तराखंड में जनगणना तय कार्यक्रम से पहले इस साल पांच दिसंबर से शुरू कराई जाएगी। धर्म, मातृभाषा, विवाह, संतान, शिक्षा, जाति जैसे नाजुक सवालों को पूछने के तरीके को लेकर खास हिदायत दी गई है। चुनाव वाले राज्यों में जनगणना प्रगणकों की ट्रेनिंग का काम 21 नवंबर तक पूरा करना होगा, ताकि जनसंख्या गणना शुरू होने से पहले संशोधन, अंतिम तैयारी और तैनाती के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध हो। बाकी राज्यों में जहां जनगणना का दूसरा चरण अगले वर्ष होगा, वहां प्रशिक्षण 15 जनवरी 2027 तक पूरा करना है। जनसंख्या गणना का दूसरा चरण केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में पहले से चल रहा है।
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नतीजों की सटीकता प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर होगी निर्भर
भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने देश के सभी राज्यों को इस तरह के निर्देश भेजे हैं। उनका कहना है कि सटीकता, पूर्णता और अखंडता 34 लाख से अधिक प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को प्रदान किए जाने वाले प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी, जो जनसंख्या गणना का कार्य करेंगे।
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सीएमएमएस पोर्टल से रियल टाइम निगरानी
प्रशिक्षण की गुणवत्ता और उसे समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए सभी स्तरों पर रियल टाइम आधार पर निगरानी सीएमएमएस पोर्टल पर उपलब्ध प्रशिक्षण डैशबोर्ड के माध्यम से होगी। इसमें एचबीएल क्रिएटर वेब मैप जैसी तकनीक का इस्तेमाल होगा। देश में आजादी के बाद पहली बार जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों में जातीय संरचना का विस्तृत रिकॉर्ड दर्ज होगा।
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परिवारों के साथ बातचीत का एक व्यवस्थित ढांचा
परिवारों के साथ बातचीत का एक व्यवस्थित ढांचा प्ररामान तैयार किया गया है। जनगणना के दौरान जनगणना कर्मी पहचान, संबंध, अनुरोध, मदद, आंकड़ों की शुद्धता व निष्ठा के लक्ष्य के साथ काम करेंगे। इसी आधार पर प्रगणकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद अधिकारियों द्वारा इन्हें सेवा भाव की शपथ दिलाई जाएगी।
विधानसभा चुनाव के चलते उत्तर प्रदेश, गोवा, पंजाब व उत्तराखंड में जनगणना तय कार्यक्रम से पहले इस साल पांच दिसंबर से शुरू कराई जाएगी। धर्म, मातृभाषा, विवाह, संतान, शिक्षा, जाति जैसे नाजुक सवालों को पूछने के तरीके को लेकर खास हिदायत दी गई है। चुनाव वाले राज्यों में जनगणना प्रगणकों की ट्रेनिंग का काम 21 नवंबर तक पूरा करना होगा, ताकि जनसंख्या गणना शुरू होने से पहले संशोधन, अंतिम तैयारी और तैनाती के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध हो। बाकी राज्यों में जहां जनगणना का दूसरा चरण अगले वर्ष होगा, वहां प्रशिक्षण 15 जनवरी 2027 तक पूरा करना है। जनसंख्या गणना का दूसरा चरण केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में पहले से चल रहा है।