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'वन नेशन, वन टाइम' की पहल: देशभर में अब एक ही समय मानक होगा 'इंडियन स्टैंडर्ड टाइम', सरकार ने जारी किए नए नियम
Sun, 30 Aug 2026 05:49 PM IST
पवन पांडेय
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 30 Aug 2026 05:49 PM IST
केंद्र सरकार ने देशभर में भारतीय मानक समय यानी इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (आईएसटी) को एकमात्र आधिकारिक समय मानक बनाने के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं। नियम 180 दिन यानी छह महीने बाद मार्च महीने के आसपास लागू होंगे। यह बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, रेलवे, टेलीकॉम, बिजली और सरकारी सेवाओं में समय की एकरूपता के साथ भारतीय सिस्टम को बढ़ावा देने की पहल है।
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देशभर में अब एक ही आधिकारिक समय
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केंद्र सरकार ने देशभर में भारतीय मानक समय (आईएसटी) को आधिकारिक समय के तौर पर अनिवार्य करने के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं। इसके तहत अगले साल मार्च से कानूनी, प्रशासनिक, कारोबारी, डिजिटल और अन्य आधिकारिक कामों में आईएसटी को ही समय के मानक के तौर पर इस्तेमाल करना होगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 27 अगस्त 2026 को ‘लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026’ को अधिसूचित किया। ये नियम गजट में प्रकाशित होने के 180 दिन बाद लागू होंगे, यानी मार्च 2027 के आसपास से इनका पालन अनिवार्य हो जाएगा।
नियमों के मुताबिक, जब तक सरकार की ओर से किसी खास मामले में छूट नहीं दी जाती, सभी कानूनी, प्रशासनिक और आधिकारिक दस्तावेजों में समय के संदर्भ के लिए आईएसटी का इस्तेमाल करना होगा। सरकार के मुताबिक, इन नियमों का मकसद देशभर में समय के इस्तेमाल में एकरूपता लाना और अलग-अलग समय संदर्भों के कारण होने वाले भ्रम को दूर करना है। सरकारी विभागों, कंपनियों और अन्य संस्थानों को इस दौरान अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव करने होंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है।
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क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार के मुताबिक, आज बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, टेलीकॉम, रेलवे, बिजली व्यवस्था और कंप्यूटर नेटवर्क जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं सटीक और एक जैसे समय पर निर्भर हैं। फिलहाल अलग-अलग प्रणालियों में समय के लिए अलग-अलग स्रोतों का इस्तेमाल होने से टाइम स्टांप में अंतर आ सकता है। इससे लेन-देन, रिकॉर्ड रखने और अलग-अलग सेवाओं के बीच तालमेल में परेशानी हो सकती है। एक समान समय मानक लागू होने से इन सभी सेवाओं में समय की गणना और रिकॉर्डिंग अधिक सटीक और एक जैसी होगी।
बैंकिंग से लेकर रेलवे तक होगा फायदा
सरकार के अनुसार, भारतीय मानक समय को एकमात्र समय मानक बनाने से कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बेहतर तालमेल हो सकेगा। इनमें शामिल हैं:
विदेशी टाइम सोर्स पर निर्भरता घटाने की तैयारी
नए नियमों में एक खास जोर विदेशी सैटेलाइट आधारित टाइम सोर्स पर निर्भरता कम करने पर है। सरकार के मुताबिक, कई महत्वपूर्ण सिस्टम फिलहाल ऐसे विदेशी टाइम सोर्स का इस्तेमाल करते हैं। सरकार अब भारतीय संस्थानों और लीगल मेट्रोलॉजी लैबोरेटरी के जरिए देशभर में सटीक भारतीय मानक समय उपलब्ध कराने का बुनियादी ढांचा तैयार कर रही है। इसके साथ ही भारत के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम NavIC और सरकार की ओर से मंजूर अन्य भारतीय टाइमिंग सोर्स का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
'वन नेशन, वन टाइम' की पहल
भारतीय मानक समय को पूरे देश में एक समान तरीके से लागू करने की योजना को सरकार ‘वन नेशन, वन टाइम’ (एक देश, एक समय) पहल के तहत आगे बढ़ा रही है। जुलाई 2026 में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बंगलूरू स्थित रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लेबोरेटरी (आरआरएसएल) में ‘व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी’ पर आधारित भारतीय मानक समय प्रसार प्रदर्शन नेटवर्क शुरू किया था। इस पायलट प्रोजेक्ट में यह दिखाया गया कि किस तरह सटीक भारतीय मानक समय को बैंकिंग, टेलीकॉम, बिजली, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकता है।
एनएसई तक पहुंचाया गया भारतीय मानक समय
एक अन्य प्रदर्शन में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सीएसआईआर-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी, इसरो, सेबी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बीएसएनएल के साथ मिलकर भारतीय मानक समय के सुरक्षित ट्रांसमिशन का प्रदर्शन किया। इस दौरान बंगलूरू स्थित आरआरएसएल से चेन्नई स्थित एनएसई तक भारतीय मानक समय को सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की प्रक्रिया दिखाई गई।
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180 दिन का समय क्यों?
सरकार ने नियमों को लागू करने से पहले 180 दिन का ट्रांजिशन पीरियड रखा है। इस दौरान सरकारी विभागों, कारोबारियों और संस्थानों को अपने मौजूदा सिस्टम की समीक्षा करनी होगी। उन्हें जहां जरूरत हो, वहां तकनीकी बदलाव और सॉफ्टवेयर अपग्रेड करने होंगे, ताकि नियम लागू होने के बाद सभी संबंधित सिस्टम एक समान भारतीय मानक समय के अनुसार काम कर सकें। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से देश में समय के इस्तेमाल और रिकॉर्डिंग में एकरूपता आएगी और डिजिटल दौर में महत्वपूर्ण सेवाओं के बीच समन्वय और सुरक्षा मजबूत होगी।
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नियमों के मुताबिक, जब तक सरकार की ओर से किसी खास मामले में छूट नहीं दी जाती, सभी कानूनी, प्रशासनिक और आधिकारिक दस्तावेजों में समय के संदर्भ के लिए आईएसटी का इस्तेमाल करना होगा। सरकार के मुताबिक, इन नियमों का मकसद देशभर में समय के इस्तेमाल में एकरूपता लाना और अलग-अलग समय संदर्भों के कारण होने वाले भ्रम को दूर करना है। सरकारी विभागों, कंपनियों और अन्य संस्थानों को इस दौरान अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव करने होंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है।
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क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार के मुताबिक, आज बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, टेलीकॉम, रेलवे, बिजली व्यवस्था और कंप्यूटर नेटवर्क जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं सटीक और एक जैसे समय पर निर्भर हैं। फिलहाल अलग-अलग प्रणालियों में समय के लिए अलग-अलग स्रोतों का इस्तेमाल होने से टाइम स्टांप में अंतर आ सकता है। इससे लेन-देन, रिकॉर्ड रखने और अलग-अलग सेवाओं के बीच तालमेल में परेशानी हो सकती है। एक समान समय मानक लागू होने से इन सभी सेवाओं में समय की गणना और रिकॉर्डिंग अधिक सटीक और एक जैसी होगी।
बैंकिंग से लेकर रेलवे तक होगा फायदा
सरकार के अनुसार, भारतीय मानक समय को एकमात्र समय मानक बनाने से कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बेहतर तालमेल हो सकेगा। इनमें शामिल हैं:
- बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट में लेन-देन का सही समय दर्ज करना
- रेलवे, एयरपोर्ट और अन्य परिवहन सेवाओं में बेहतर समन्वय
- टेलीकॉम और इंटरनेट नेटवर्क का अधिक भरोसेमंद संचालन
- बिजली व्यवस्था में सटीक टाइम-कीपिंग
- सरकारी और कानूनी रिकॉर्ड में सही समय दर्ज करना
- आपातकालीन और समय-संवेदनशील सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल
विदेशी टाइम सोर्स पर निर्भरता घटाने की तैयारी
नए नियमों में एक खास जोर विदेशी सैटेलाइट आधारित टाइम सोर्स पर निर्भरता कम करने पर है। सरकार के मुताबिक, कई महत्वपूर्ण सिस्टम फिलहाल ऐसे विदेशी टाइम सोर्स का इस्तेमाल करते हैं। सरकार अब भारतीय संस्थानों और लीगल मेट्रोलॉजी लैबोरेटरी के जरिए देशभर में सटीक भारतीय मानक समय उपलब्ध कराने का बुनियादी ढांचा तैयार कर रही है। इसके साथ ही भारत के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम NavIC और सरकार की ओर से मंजूर अन्य भारतीय टाइमिंग सोर्स का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
'वन नेशन, वन टाइम' की पहल
भारतीय मानक समय को पूरे देश में एक समान तरीके से लागू करने की योजना को सरकार ‘वन नेशन, वन टाइम’ (एक देश, एक समय) पहल के तहत आगे बढ़ा रही है। जुलाई 2026 में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बंगलूरू स्थित रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लेबोरेटरी (आरआरएसएल) में ‘व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी’ पर आधारित भारतीय मानक समय प्रसार प्रदर्शन नेटवर्क शुरू किया था। इस पायलट प्रोजेक्ट में यह दिखाया गया कि किस तरह सटीक भारतीय मानक समय को बैंकिंग, टेलीकॉम, बिजली, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकता है।
एनएसई तक पहुंचाया गया भारतीय मानक समय
एक अन्य प्रदर्शन में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सीएसआईआर-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी, इसरो, सेबी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बीएसएनएल के साथ मिलकर भारतीय मानक समय के सुरक्षित ट्रांसमिशन का प्रदर्शन किया। इस दौरान बंगलूरू स्थित आरआरएसएल से चेन्नई स्थित एनएसई तक भारतीय मानक समय को सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की प्रक्रिया दिखाई गई।
यह भी पढ़ें- ‘जो मुसलमानों को न माने, वो हिंदू नहीं’: भागवत के बयान पर फडणवीस ने क्यों कहा- हमला हुआ तो देंगे करारा जवाब?
180 दिन का समय क्यों?
सरकार ने नियमों को लागू करने से पहले 180 दिन का ट्रांजिशन पीरियड रखा है। इस दौरान सरकारी विभागों, कारोबारियों और संस्थानों को अपने मौजूदा सिस्टम की समीक्षा करनी होगी। उन्हें जहां जरूरत हो, वहां तकनीकी बदलाव और सॉफ्टवेयर अपग्रेड करने होंगे, ताकि नियम लागू होने के बाद सभी संबंधित सिस्टम एक समान भारतीय मानक समय के अनुसार काम कर सकें। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से देश में समय के इस्तेमाल और रिकॉर्डिंग में एकरूपता आएगी और डिजिटल दौर में महत्वपूर्ण सेवाओं के बीच समन्वय और सुरक्षा मजबूत होगी।