फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   cisf introduces functional command system to strengthen security at key industrial installations

राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ा बदलाव: सीआईएसएफ ने लागू किया 'फंक्शनल कमांड' सिस्टम; अब कैसे होगी निगरानी?

Sun, 01 Nov 2026 05:25 PM IST
निर्मल कांत डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 01 Nov 2026 05:25 PM IST
सार
Register For Event

सीआईएसएफ ने देश के अहम औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब इलाके के बजाय उद्योगों के हिसाब से अलग-अलग कमांड काम करेंगी। ड्रोन और साइबर हमलों जैसे नए खतरों से निपटने में यह व्यवस्था कितनी कारगर होगी?पढ़िए इस रिपोर्ट में।

विज्ञापन
cisf introduces functional command system to strengthen security at key industrial installations
अब इलाके नहीं, उद्योग के हिसाब से होगी कमान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

मौजूदा दौर में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाते। दुश्मन, देश पर कब्जा किए बिना भी हमारे पावर ग्रिड, ऑयल रिफाइनरी या बंदरगाहों को निशाना बनाकर पूरे सिस्टम को पंगु बना सकता है। इसी आधुनिक चुनौती से निपटने और 'विकसित भारत' के अहम औद्योगिक ढांचे को अभेद्य बनाने के लिए, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने एक नवंबर से अपनी सुरक्षा रणनीति में एक युगांतरकारी बदलाव किया है। गृह मंत्रालय की मंजूरी के साथ, सीआईएसएफ ने अपनी पुरानी 'भौगोलिक क्षेत्र आधारित' (टेरिटोरियल) कमांड प्रणाली को समाप्त कर एक नई और अत्यधिक विशेषज्ञता वाली 'कार्यात्मक' (फंक्शनल) सेक्टर प्रणाली लागू कर दी है।
विज्ञापन


क्या है नया बदलाव और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
पुरानी व्यवस्था में सीआईएसएफ का एक ही सेक्टर मुख्यालय अपने इलाके की 50 से अधिक अलग-अलग तरह की इकाइयों की सुरक्षा देखता था। यानी एक ही अधिकारी कोयला खदानों, बिजली संयंत्रों और बंदरगाहों, सबकी निगरानी कर रहा था। लेकिन एक कोयला खदान की सुरक्षा चुनौतियां किसी हाई-टेक बंदरगाह से बिल्कुल अलग होती हैं। ड्रोन हमले, साइबर-अटैक (ओटी/आईसीएस) और सुनियोजित तोड़फोड़ जैसे आधुनिक खतरों से निपटने के लिए एक ऐसी लीडरशिप चाहिए थी, जो उस खास उद्योग की तकनीकी बारीकियों को गहराई से समझती हो। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, अब सेक्टर का बंटवारा इलाके के आधार पर नहीं, बल्कि प्रतिष्ठान की प्रकृति के आधार पर किया गया है।
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन


देशभर में नए फंक्शनल कमांड का काम शुरू 
  • पावर (विद्युत) सेक्टर: पावर-I (नई दिल्ली) और पावर-II (कोलकाता)
  • कोल (कोयला) सेक्टर: रांची
  • स्टील (इस्पात) सेक्टर: भिलाई
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सेक्टर: गुवाहाटी
  • पोर्ट (बंदरगाह) सेक्टर: वेस्ट कोस्ट (मुंबई) और ईस्ट कोस्ट (चेन्नई)
  • सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक एवं मेट्रो सेक्टर: नई दिल्ली


फंक्शनल मॉडल के शानदार नतीजे 
यह प्रयोग बल के लिए नया नहीं है। विमानन (एविएशन) सेक्टर 2001 से और परमाणु/अंतरिक्ष सेक्टर 2018 से इसी फंक्शनल मॉडल पर शानदार नतीजे दे रहे हैं। अब पूरी फोर्स को इसी सफल मॉडल के सांचे में ढाल दिया गया है। जमीनी स्तर पर सुरक्षा और भी चुस्त होगी, लेकिन प्रक्रियाएं यथावत वैसी ही रहेंगी। क्या इस बड़े बदलाव से गेट पर होने वाली रोजमर्रा की चेकिंग बदल जाएगी, सीआईएसएफ ने स्पष्ट किया है कि आम लोगों और कर्मचारियों के लिए जमीनी स्तर की सुरक्षा प्रक्रियाएं, गश्त (पेट्रोलिंग), और क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) की तैनाती पहले की तरह ही काम करेगी। बदलाव सिर्फ 'पर्यवेक्षण' (सुपरविजन) के स्तर पर हुआ है। इससे वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन ज्यादा सटीक होगा और वे किसी भी खतरे के दौरान अपने खास सेक्टर के लिए तुरंत 'कंटिंजेंसी प्लान' (आपातकालीन योजना) लागू कर सकेंगे।

ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र सूखा: सोलापुर और धाराशिव जाएंगे शरद पवार, किसानों से मिलेंगे; क्या है अगले दो दिन का कार्यक्रम?



नेतृत्व का विजन 
इस ऐतिहासिक बदलाव के फायदों को स्पष्ट करते हुए सीआईएसएफ के महानिदेशक ने कहा, "यह नई व्यवस्था बहु-हितधारक (मल्टी-स्टेकहोल्डर) वातावरण में एक गेम-चेंजर साबित होगी। पहला फायदा यह है कि अब हमारे और प्रतिष्ठान प्रबंधन के बीच तालमेल बहुत आसान हो जाएगा, क्योंकि दोनों तरफ से बातचीत के लिए एक ही 'सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट' होगा। दूसरा, जब नेतृत्व को उस उद्योग की गहरी समझ होगी, तो फैसले लेने में होने वाली देरी खत्म होगी और किसी भी संकट का तुरंत व सटीक जवाब दिया जा सकेगा। 



खुफिया-नेतृत्व और तकनीकी रूप से उन्नत 
कुल मिलाकर, यह नया ढांचा बल में दक्षता, पेशेवर रवैया और जवाबदेही के नए मानक तय करेगा।" यह बदलाव सीआईएसएफ को सिर्फ एक 'गार्डिंग फोर्स' से आगे ले जाकर एक खुफिया-नेतृत्व (इंटेलिजेंस-लेड) और तकनीकी रूप से उन्नत बल बना रहा है। आधुनिक तकनीक, काउंटर-ड्रोन रणनीति और साइबर-फिजिकल सुरक्षा के शानदार तालमेल के साथ सीआईएसएफ अब भारत के औद्योगिक विकास चक्र को किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed