साइबर ठगी: फर्जी एप बनाता था सॉफ्टवेयर डेवलपर; 9,673 लोगों से ₹15.75 करोड़ की धोखाधड़ी, आरोपी गिरफ्तार
फर्जी एप के जरिए होने वाली साइबर धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि इन एप्स का इस्तेमाल लोगों से बैंक और निजी जानकारी हासिल करने के लिए किया जाता था। मामले में पुलिस ने फर्जी एप तैयार करने वाले सॉफ्टवेयर डेवलपर को गिरफ्तार किया है।
विस्तार
मुंबई क्राइम ब्रांच ने फर्जी एपीके फाइल्स बनाकर साइबर ठगों के अलग-अलग गिरोहों को बेचने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के मुख्य सरगनाथ का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में 36 साल के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने अब तक 2,805 फर्जी एपीके फाइल्स तैयार कर साइबर अपराधियों के अलग-अलग गिरोहों को बेची थीं। इन फर्जी फाइल्स के जरिए देशभर में करीब 9,673 लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक, इन मामलों में अब तक करीब 15 करोड़ 75 लाख रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है।
किससे जुड़ा है यह मामला?
इस मामले का बैकग्राउंड 13 अगस्त से जुड़ा हुआ है, जब 72 साल के एक बुजुर्ग के पास अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का सीनियर मैनेजर दिनेश कुमार बताते हुए बुजुर्ग को सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने का झांसा दिया। बातचीत के दौरान उसने बुजुर्ग का भरोसा जीत लिया और उनके व्हाट्सऐप पर 'सीनियर सिटीजन कार्ड वेरिफिकेशन' नाम से एक एपीके फाइल भेजी। इसके बाद बुजुर्ग से इस फाइल में अपनी निजी जानकारी और डेबिट कार्ड की जानकारी भरने को कहा गया। जैसे ही उन्होंने जानकारी भरी, उनके बैंक खाते से 5 लाख 62 हजार रुपये निकाल लिए गए।
ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने भायखला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। बाद में मुंबई पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। डीसीपी राज तिलक रौशन ने बताया कि ठगी में इस्तेमाल की गई एपीके फाइल की तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में अहम सुराग मिले। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने मध्य प्रदेश से एक सॉफ्टवेयर डेवलपर को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी के दफ्तर पर छापे के दौरान पुलिस ने एक पेनड्राइव, एक सीपीयू, तीन हार्ड डिस्क, एक वाई-फाई राउटर और तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी अलग-अलग कंपनियों के सर्वर का इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस को शक है कि इन्हीं के जरिए वह फर्जी एपीके फाइल्स तैयार कर उन्हें साइबर ठगी करने वाले गिरोहों तक पहुंचाता था।