ई-मुद्रा के डिजिटल सर्टिफिकेट सिस्टम पर साइबर हमला?: जांच के लिए बनी विशेष टीम; आईटी मंत्रालय ने क्या कदम उठा
ई-मुद्रा के वैश्विक डिजिटल प्रमाणपत्र तंत्र से जुड़ी सुरक्षा घटना की जांच जारी है, लेकिन भारत में डिजिटल हस्ताक्षर और ई-साइन सेवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ अकाउंट इस घटना को लेकर डर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हकीकत इससे अलग है।
विस्तार
ई-मुद्रा के पब्लिक की इन्फ्रास्ट्रक्चर (पीकेआई) से जुड़ी एक सुरक्षा घटना सामने आने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने मामले को गंभीरता से लिया है। इसकी जांच के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ अकाउंट इस घटना को लेकर डर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हकीकत इससे अलग है। मामले में किन सेवाओं पर असर पड़ा है और कौन-सी सेवाएं सुरक्षित हैं, इसे समझना जरूरी है।
ई-मुद्रा के कामकाज के दो प्रमुख हिस्से
- ई-मुद्रा मुख्य रूप से दो तरह की सेवाएं देता है। पहली, डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जारी करना और ई-साइन की सुविधा देना। इन सेवाओं की निगरानी भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाला कंट्रोलर ऑफ सर्टिफाइंग अथॉरिटीज (सीसीए) करता है।
- दूसरी सेवा के तहत कंपनी ऐसे डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करती है, जिन पर दुनिया के प्रमुख वेब ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्टम भरोसा करते हैं। इन प्रमाणपत्रों की मदद से वेबसाइटों, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट पर होने वाले डिजिटल संचार को सुरक्षित बनाया जाता है।
सुरक्षा की घटना किससे जुड़ी है?
सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा से जुड़ी यह घटना ई-मुद्रा के दूसरे कामकाज यानी वैश्विक डिजिटल प्रमाणपत्र तंत्र से संबंधित है। यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत काम करती है और इसके सुरक्षा इंतजामों की स्वतंत्र एजेंसियां जांच करती हैं। इनमें बीडीओ इंटरनेशनल लिमिटेड जैसी संस्था द्वारा किया जाने वाला वेबट्रस्ट ऑडिट भी शामिल है। इस व्यवस्था का ऑडिट सीसीए के दायरे में नहीं आता। यानी डिजिटल हस्ताक्षर और ई-साइन सेवाओं की निगरानी करने वाली भारतीय नियामक व्यवस्था और वैश्विक डिजिटल प्रमाणपत्र तंत्र अलग-अलग हैं।
भारतीय वेबसाइटों और ऐप पर कितना असर पड़ा?
सूत्रों के अनुसार, इस घटना का भारतीय वेबसाइटों और ऐप पर असर बेहद सीमित रहा और वह भी बहुत कम समय के लिए था। इसलिए सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर किए जा रहे व्यापक दावों को सही तस्वीर मानना ठीक नहीं होगा। किसी भी सुरक्षा घटना के असर का आकलन उसके वास्तविक दायरे और उपलब्ध तकनीकी जानकारी के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
एमईआईटीवाई और सर्ट-इन की क्या भूमिका है?
एमईआईटीवाई मामले को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के संपर्क में है। वहीं, भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन) ने भी इस घटना को लेकर एडवाइजरी जारी की है। इसमें सुरक्षा जोखिम से निपटने के लिए जरूरी उपाय बताए गए हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद घटना से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी साझा किए जाने की बात कही गई है।
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डिजिटल हस्ताक्षर और ई-साइन सेवाएं सुरक्षित
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि सीसीए के नियमन के तहत आने वाली ई-मुद्रा की डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र और ई-साइन सेवाएं इस घटना से अप्रभावित हैं। यानी वैश्विक डिजिटल प्रमाणपत्र तंत्र से जुड़ी सुरक्षा घटना को भारत में डिजिटल हस्ताक्षर और ई-साइन सेवाओं पर असर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।