फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   dogs attacks increase banned breeds still being sold why no monitoring despite rules

कुत्तों के हमले बढ़े: प्रतिबंधित नस्लों की बिक्री जारी; नियम तो हैं फिर निगरानी क्यों नहीं?

Himanshu Mishra हिमांशु अरविंद मिश्र
Updated Sat, 03 Oct 2026 05:30 AM IST
सार
Register For Event

देश में कुत्तों के काटने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। प्रतिबंधित नस्लों की बिक्री पर रोक के बावजूद निगरानी की व्यवस्था कमजोर दिख रही है। आखिर नियम होने के बाद भी कुत्तों और उनकी नस्लों पर नजर क्यों नहीं रखी जा रही? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

विज्ञापन
dogs attacks increase banned breeds still being sold why no monitoring despite rules
dog bite, dog attack - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश में कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन पालतू कुत्तों और उनकी नस्लों की निगरानी का कोई राष्ट्रीय तंत्र नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में 30.43 लाख, 2024 में 37.17 लाख और 2025 में 47.48 लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए। यानी करीब 17 लाख मामलों की बढ़ोतरी हुई। वहीं, कई शहरों और राज्यों में प्रतिबंधित नस्लों की खरीद-बिक्री पर रोक के बावजूद इनकी उपलब्धता सामने आ रही है। मार्च 2024 में केंद्र ने करीब 23 खतरनाक मानी गई नस्लों के आयात, प्रजनन और बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। 
विज्ञापन


लापरवाही पर मालिक की जिम्मेदारी
कुत्ते के मालिक की लापरवाही से किसी व्यक्ति की जान या सुरक्षा खतरे में पड़ने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 291 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें छह महीने तक की सजा, पांच हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
विज्ञापन


डॉग बाइट के मामले
  • 2025 : 47.48 लाख
  • 2024 : 37.17 लाख
  • 2023 : 30.43 लाख
  • 2019 घरेलू कुत्ते : 94.3 लाख
  • 2019 लावारिस कुत्ते : 1.53 करोड़
  • नस्लवार हमलों का राष्ट्रीय आंकड़ा : उपलब्ध नहीं
ये भी पढ़ें: मौसम की बेरुखी पड़ने वाली है भारी: फसलों पर कहीं सूखे की आफत तो कहीं बारिश की मार...बिजली भी कर सकती है परेशान
विज्ञापन
विज्ञापन


अलग-अलग राज्यों में अलग नियम
उत्तर प्रदेश : लखनऊ में 10 हजार पालतू कुत्ते हैं। अप्रैल से अब तक 3,400 पंजीकृत हुए जिनका लाइसेंस बना। पिछले साल 8200 कुत्तों के लाइसेंस बने थे। लावारिस कुत्ते 86 हजार है। सात वर्षों में महज एक लाख कुत्तों का ही बधिया हो पाया। 23 हजार अब भी बाकी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कुत्तों की नसबंदी की बेहतर प्रगति मानते हुए सराहना की थी।

उत्तराखंड : प्रदेश में कुत्ते अनगिनत हैं। पंजीयन केवल 100 का, एक मामले में 50 हजार का जुर्माना, एक महीने में 2446 को काटा, हर दिन औसतन 6-7 पीड़ित एंटी रैबीज लगवाने अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।

हरियाणा : प्रदेश में 9 विक्रेताओं का ही पंजीयन है। 87 निकायों के पास इनका कोई आंकड़ा नहीं है।

पंजाब : यहां 30 हजार कुत्तों के बधियाकरण के लिए करीब 5 करोड़ का प्रस्ताव है। 2025 में कुत्तों के काटने की संख्या 3.34 लाख पहुंच गई थी।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed