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ईडी की बड़ी कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग केस में 23.35 करोड़ की संपत्ति की कुर्क; अब तक कितनी जब्ती हुई?

Tue, 27 Oct 2026 07:18 PM IST
अमन मौर्या डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन मौर्या Updated Tue, 27 Oct 2026 07:18 PM IST
सार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केसी वीरेंद्र और अन्य आरोपियों की 23.35 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। इसके साथ ही अब तक कुल 343 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अटैच की जा चुकी है।

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ईडी एक्शन - फोटो : amarujala.com

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के तहत, केसी वीरेंद्र और अन्य लोगों के मामले में 13,76,96,706 रुपये मूल्य की चल संपत्ति और 9,58,50,000 रुपये मूल्य की अचल संपत्ति, यानी कुल 23,35,46,706 रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) किया है। यह कार्रवाई 23 अक्तूबर के 'प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर' संख्या 42/2026 के जरिए की गई है। यह जब्त की गई संपत्ति, के. सी. वीरेंद्र, गुलशन खट्टर और नेहा टंडन के पास से मिले 'अपराध से प्राप्त धन' के बराबर मूल्य की है।
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ईडी ने कई एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी, जिनमें ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ प्लेटफॉर्म के जरिए धोखाधड़ी, किसी और का रूप धरकर धोखा देना, आपराधिक साजिश और जबरन वसूली के आरोप लगाए गए थे। जांच में सट्टेबाजी वेबसाइटों, पेमेंट गेटवे, शेल कंपनियों और 'म्यूल अकाउंट्स' के एक देशव्यापी नेटवर्क का पता चला। आरोप है कि केसी वीरेंद्र और उनके सहयोगी इस नेटवर्क को नियंत्रित करते थे, ताकि 'अपराध से प्राप्त धन' बनाया जा सके और उसे लॉन्डर (मनी लॉन्ड्रिंग) किया जा सके।
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कथित तौर पर, अपराधों से हासिल इस रकम को जटिल वित्तीय लेन-देन के जरिए कई परतों में घुमाया गया और इसका इस्तेमाल संपत्ति खरीदने तथा निजी लाभ के लिए किया गया। इसके बाद ईसीआईआर दर्ज की गई और पीएमएलए के प्रावधानों के तहत जांच शुरू हुई। इस निदेशालय द्वारा की गई जांच से पता चला है कि केसी वीरेंद्र और उनके साथियों ने पेमेंट गेटवे, शेल कंपनियों और 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरों के नाम पर खोले गए खातों) के एक नेटवर्क के जरिए 'किंग567' जैसे अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म चलाए। इसके माध्यम से खिलाड़ियों को पैसे जमा करने के लिए उकसाया गया और फिर सट्टेबाजी की प्रक्रियाओं में हेरफेर करके तथा पैसे निकालने (विड्रॉल) पर रोक लगाकर उनके साथ धोखाधड़ी की गई।

जांच में 2,300 करोड़ रुपये से अधिक की 'अपराध से प्राप्त रकम' का पता चला है। इस रकम को कई खातों, हवाला चैनलों और विदेशी संस्थाओं के जरिए घुमाया गया और इसका इस्तेमाल लग्जरी संपत्तियां खरीदने, बिजनेस में निवेश करने, विदेश में पैसा भेजने और निजी खर्चों के लिए किया गया। इससे यह साबित होता है कि आरोपी अपराध से प्राप्त इस रकम को छिपाने, अपने पास रखने, इस्तेमाल करने और इसे 'साफ-सुथरी' (वैध) संपत्ति के रूप में पेश करने में शामिल थे। यह पीएमएलए की धारा 3 के तहत 'मनी लॉन्ड्रिंग' (धन शोधन) का अपराध है।

इस मामले में, अपराध से प्राप्त रकम 'मेसर्स फोनपैसा पेमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड' के पास पहुंची। इस कंपनी के असली मालिक गुलशन खट्टर हैं, जिन्होंने अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के तंत्र में एक मुख्य पेमेंट गेटवे और वित्तीय मध्यस्थ के रूप में सेवाएं देकर भारी कमीशन प्राप्त किया था। अपराध से प्राप्त इस रकम में से लगभग 33 करोड़ रुपये की संपत्तियों को 29.01.2026 के एक आदेश (पीएओ) के जरिए जब्त (अटैच) कर लिया गया है। जांच के दौरान यह भी पता चला कि 'मेसर्स सिमटेक' को 'किंग567' से जुड़े उन 'म्यूल बैंक अकाउंट्स' से पैसे मिले थे, जिनकी पहचान की जा चुकी है।

'मेसर्स सिमटेक आईटी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड' की निदेशक नेहा टंडन की कंपनी के प्रबंधन में कोई सक्रिय भूमिका नहीं थी। इसका पूरा कामकाज उनके पति गुलशन खट्टर संभालते थे। 'मेसर्स सिमटेक' को अवैध तरीके से प्राप्त धन का मिलना, साथ ही कंपनी पर गुलशन खट्टर का नियंत्रण होना और 'मेसर्स फोनपैसा' के जरिए अपराध से प्राप्त रकम को बनाने और इधर-उधर भेजने में उनकी भूमिका, यह आधार बनाती है कि नेहा टंडन के नाम पर मौजूद संपत्तियां असल में 'अपराध से प्राप्त रकम' (पीओसी) ही हैं।


इससे पहले, इस मामले में ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत कई राज्यों में 60 से अधिक जगहों पर व्यापक तलाशी और जब्ती अभियान चलाया था। इस दौरान भारी मात्रा में नकदी, सोने की ईंटें, सोने-चांदी के गहने, 'म्यूल अकाउंट्स' में जमा रकम, गाड़ियां, डिजिटल डिवाइस और अपराध से जुड़े अहम दस्तावेज जब्त किए गए या फ्रीज कर दिए गए। ईडी ने पीएमएलए की धारा 19 के तहत केसी वीरेंद्र को भी गिरफ्तार किया था। पीएमएलए के तहत हुई जांच के बाद, 18 अक्तूबर को एक 'प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट' (अभियोजन शिकायत) और 20.02.2026 को एक 'सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट' (पूरक अभियोजन शिकायत) दायर की गई। इसके आधार पर, पीएमएलए की विशेष अदालत ने 4 मई को मामले का संज्ञान लिया।

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चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने या फ्रीज करने की प्रक्रिया के तहत, इससे पहले इस निदेशालय ने 177.30 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) किया था, जिसे बाद में नई दिल्ली स्थित पीएमएलए की 'एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी' (निर्णायक प्राधिकरण) ने भी मंजूरी दे दी। इसके अलावा, इस नए 'प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर' (पीएओ) के जरिए 23.35 करोड़ रुपये मूल्य की और चल-अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है। इस तरह, पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत अब तक अटैच/जब्त/फ्रीज की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 343 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यह अस्थायी अटैचमेंट, पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के अनुसार 'अपराध से प्राप्त आय' के मूल्य को सुरक्षित रखने के लिए किया गया है।
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