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एफसीआरए बिल: जेपीसी के कामकाज पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, लोकसभा स्पीकर को लिखे पत्र में पार्टी ने क्या की मांग?
Thu, 01 Oct 2026 02:44 PM IST
अमन मौर्या
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Thu, 01 Oct 2026 02:44 PM IST
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने एफसीआरए संशोधन बिल 2026 पर बनी जेपीसी के कामकाज पर चिंता जताते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले में व्यापक विचार-विमर्श की मांग की है।
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जेपीसी के कामकाज पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' की जांच कर रही जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी (जेपीसी) के कामकाज पर चिंता जताई है। उन्होंने इस पर व्यापक बातचीत की मांग की है। अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में वेणुगोपाल ने एफसीआरए बिल, 2026 पर जेपीसी के कामकाज को लेकर लोकसभा स्पीकर को लिखे पत्र की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक बेहद संवेदनशील बिल है, जिसका अल्पसंख्यकों और सिविल सोसाइटी समूहों के संवैधानिक अधिकारों पर व्यापक असर पड़ेगा।
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कांग्रेस ने क्या मांग की?
उन्होंने कहा कि जेपीसी का मकसद सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स से इनपुट लेना और दोबारा पेश करने से पहले ड्राफ्ट बिल की बारीकी से जांच करना था। वेनुगोपाल ने सवाल उठाया कि क्या व्यापक फीडबैक और जांच प्रक्रिया अपनाई गई है? हमारा मानना है कि जेपीसी से निकलने वाला कोई भी बिल त्रुटिहीन होना चाहिए और संसद को यह भरोसा होना चाहिए कि यह एक सघन परामर्श प्रक्रिया से गुजरा है। ऐसा सुनिश्चित किए बिना जोपीसी का कोई महत्व नहीं है और संसद के साथ धोखा है। अपने पत्र में वेणुगोपाल ने स्पीकर से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि कमेटी एक सघन परामर्श प्रक्रिया अपनाए, जिसमें एनजीओ, चैरिटेबल संस्थाओं, धार्मिक निकायों, स्वैच्छिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और राज्य सरकारों से लिखित सबमिशन और मौखिक साक्ष्य भी शामिल हों। वेणुगोपाल ने स्पीकर से बिल के हर क्लॉज पर विस्तृत चर्चा के लिए पर्याप्त समय की भी मांग की। उन्होंने कहा कि संसद को यह भरोसा होना चाहिए कि सदन में विचार किए जाने से पहले इस कानून की बारीकी से जांच की गई है।
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जेपीसी को कब भेजा गया बिल?
बता दें कि 12 अगस्त को एफसीआरए बिल 31 सदस्यों वाली जेपीसी को भेजा गया था। समिति से संसद के शीतकालीन सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब जेपीसी के कई सदस्य बिल की जांच करने और जनता की राय लेने के लिए और समय की मांग कर रहे हैं। विपक्ष के सदस्यों ने समिति की 12 अक्टूबर की बैठक को कम से कम चार सप्ताह के लिए टालने और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लेने की अवधि को भी चार सप्ताह तक बढ़ाने का अनुरोध किया है।
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डीएमके भी कर चुकी है मांग
डीएमके सांसद पी. विल्सन ने अलग से मांग की है कि समिति द्वारा स्टेकहोल्डर्स से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे जाए। उनका तर्क है कि सात दिन का समय संगठनों और विशेषज्ञों के लिए विस्तृत सुझाव तैयार करने के लिए अपर्याप्त था। जेपीसी, बिल की जांच के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ पहले ही चर्चा कर चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, अभी 14,440 सक्रिय एफसीआरए खाते हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि 'गहन परामर्श प्रक्रिया' के बिना जेपीसी का कोई खास मकसद पूरा नहीं होगा और उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया कि संसद में बिल पर विचार करने से पहले इसकी व्यापक जांच सुनिश्चित की जाए।
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कांग्रेस ने क्या मांग की?
उन्होंने कहा कि जेपीसी का मकसद सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स से इनपुट लेना और दोबारा पेश करने से पहले ड्राफ्ट बिल की बारीकी से जांच करना था। वेनुगोपाल ने सवाल उठाया कि क्या व्यापक फीडबैक और जांच प्रक्रिया अपनाई गई है? हमारा मानना है कि जेपीसी से निकलने वाला कोई भी बिल त्रुटिहीन होना चाहिए और संसद को यह भरोसा होना चाहिए कि यह एक सघन परामर्श प्रक्रिया से गुजरा है। ऐसा सुनिश्चित किए बिना जोपीसी का कोई महत्व नहीं है और संसद के साथ धोखा है। अपने पत्र में वेणुगोपाल ने स्पीकर से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि कमेटी एक सघन परामर्श प्रक्रिया अपनाए, जिसमें एनजीओ, चैरिटेबल संस्थाओं, धार्मिक निकायों, स्वैच्छिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और राज्य सरकारों से लिखित सबमिशन और मौखिक साक्ष्य भी शामिल हों। वेणुगोपाल ने स्पीकर से बिल के हर क्लॉज पर विस्तृत चर्चा के लिए पर्याप्त समय की भी मांग की। उन्होंने कहा कि संसद को यह भरोसा होना चाहिए कि सदन में विचार किए जाने से पहले इस कानून की बारीकी से जांच की गई है।
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जेपीसी को कब भेजा गया बिल?
बता दें कि 12 अगस्त को एफसीआरए बिल 31 सदस्यों वाली जेपीसी को भेजा गया था। समिति से संसद के शीतकालीन सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब जेपीसी के कई सदस्य बिल की जांच करने और जनता की राय लेने के लिए और समय की मांग कर रहे हैं। विपक्ष के सदस्यों ने समिति की 12 अक्टूबर की बैठक को कम से कम चार सप्ताह के लिए टालने और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लेने की अवधि को भी चार सप्ताह तक बढ़ाने का अनुरोध किया है।
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डीएमके भी कर चुकी है मांग
डीएमके सांसद पी. विल्सन ने अलग से मांग की है कि समिति द्वारा स्टेकहोल्डर्स से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे जाए। उनका तर्क है कि सात दिन का समय संगठनों और विशेषज्ञों के लिए विस्तृत सुझाव तैयार करने के लिए अपर्याप्त था। जेपीसी, बिल की जांच के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ पहले ही चर्चा कर चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, अभी 14,440 सक्रिय एफसीआरए खाते हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि 'गहन परामर्श प्रक्रिया' के बिना जेपीसी का कोई खास मकसद पूरा नहीं होगा और उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया कि संसद में बिल पर विचार करने से पहले इसकी व्यापक जांच सुनिश्चित की जाए।