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गुजरात में सूखे की मार: चार जिलों में अकाल घोषित; मुख्यमंत्री ने क्या कहा, किसानों को कितनी मदद मिलेगी?
Mon, 26 Oct 2026 09:12 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 26 Oct 2026 09:12 PM IST
गुजरात में कम बारिश के कारण चार जिलों को अकालग्रस्त घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की सहायता देने और पशुपालकों के लिए चारे व पशु शिविरों की व्यवस्था करने का फैसला किया है। एक नवंबर से लागू होने वाले इन फैसलों से किसानों और पशुपालकों को कितनी राहत मिलेगी? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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मुख्यमत्री भूपेंद्र पटेल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किसानों और पशुपालकों के हित में बड़ा फैसला लिया है। इस साल कम बारिश के कारण गुजरात के चार जिलों को अकालग्रस्त घोषित किया गया है। इन जिलों के प्रभावित किसानों को फसलों के नुकसान के लिए सहायता दी जाएगी। पशुओं के चारे और पशु शिविरों के लिए भी मदद दी जाएगी।
राज्य सरकार ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों और पशुपालकों के हितों को हमेशा प्राथमिकता दी गई है। सरकार भविष्य में भी किसी आपदा के समय उनकी मदद करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
किन जिलों को अकालग्रस्त घोषित किया गया?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी की मौजूदगी में गांधीनगर में मीडिया के सामने यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के अकाल निर्धारण दिशानिर्देश-2016 के अनुसार जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इस संबंध में उच्चस्तरीय बैठकें भी हुईं। इसके बाद राज्य सरकार ने चार जिलों को अकालग्रस्त घोषित करने का फैसला किया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल पूरे गुजरात में औसतन लगभग 89 फीसदी बारिश हुई है। हालांकि, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, कच्छ और जामनगर जिलों में बारिश कम हुई है। कम बारिश से पैदा हुए हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने इन चारों जिलों के किसानों को राहत देने के लिए कई फैसले लिए हैं।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार किसानों और पशुपालकों के व्यापक हितों को प्राथमिकता देती है। पहले भी किसानों पर मुश्किलें आने पर सरकार उनके साथ खड़ी रही है। मौजूदा स्थिति में भी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ किसानों की मदद कर रही है। भविष्य में किसानों और पशुपालकों पर किसी भी आपदा के समय जरूरत के मुताबिक सहायता देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
किसानों को कितनी सहायता मिलेगी?
मुख्यमंत्री ने बताया कि अकालग्रस्त घोषित जिलों में फसलों को हुए नुकसान के लिए राज्य सरकार ने राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के मानदंडों के अनुसार सहायता देने का फैसला किया है। इसके तहत किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर जमीन की सीमा में प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की सहायता दी जाएगी।
अकाल घोषित होने से पहले ही चारा वितरण शुरू
पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देरी से हुई बारिश की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी की थी। किसानों और पशुपालकों को सहारा देने के लिए अकाल घोषित होने से पहले ही जून-जुलाई 2026 से पूरे राज्य में राहत दर पर चारा वितरण शुरू कराने की मंजूरी दी गई थी। विशेष मामलों में चारा वितरण के लिए जिला कलेक्टरों को भी अधिकृत किया गया था।
राज्य में अब तक लगभग 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा वितरित किया जा चुका है। यह चारा दो रुपये प्रति किलोग्राम की राहत दर पर दिया गया है। फिलहाल राज्य सरकार के पास तीन करोड़ किलोग्राम चारा उपलब्ध है। इसके अलावा, अतिरिक्त चारा खरीदने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
पशु शिविरों के लिए कितनी मदद मिलेगी?
अकालग्रस्त घोषित तहसीलों में पशु शिविरों के पशुओं के लिए प्रतिदिन प्रति पशु 80 रुपये की सहायता दी जाएगी। यह सहायता दो महीने तक एसडीआरएफ से मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालकों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए इसके बाद ऐसी सहायता का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
ये भी पढ़ें: जमीन अधिग्रहण में धोखाधड़ी: 30 साल पुरानी प्रक्रिया रद्द; सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पलटा हाईकोर्ट का फैसला?
ग्रामीणों को 150 दिन का रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालग्रस्त घोषित तहसीलों में ग्रामीण लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए वीबी-जी राम-जी योजना के तहत 150 मानव दिवस का रोजगार देने का फैसला किया गया है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार के ये सभी फैसले 1 नवंबर 2026 से लागू होंगे।
सिंचाई के लिए पानी की क्या व्यवस्था है?
राज्य में सिंचाई के पानी की स्थिति पर मुख्यमंत्री ने बताया कि खरीफ मौसम में मांग के आधार पर 44 बांधों के कमांड क्षेत्र में पानी उपलब्ध कराया गया है। चालू वर्ष में राज्य के 206 प्रमुख बांधों में 66 फीसदी जल संग्रह हुआ है। राज्य सरकार ने आगामी रबी मौसम के लिए 76 बांधों के कमांड क्षेत्रों में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इसके साथ ही पेयजल को भी प्राथमिकता दी गई है। पीने के पानी के लिए 30 जून 2027 तक पानी आरक्षित रखा गया है।
किन क्षेत्रों के बांधों से मिलेगा सिंचाई का पानी?
राज्य सरकार की योजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के बांधों से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
- उत्तर गुजरात: धरोई और दांतीवाड़ा सहित 11 बांध।
- मध्य गुजरात: करजण और पानम सहित 12 बांध।
- दक्षिण गुजरात: उकाई, काकरापार और दमणगंगा सहित 9 बांध।
- अन्य क्षेत्रों में: शेत्रुंजी, ब्राह्मणी और मच्छू सहित 39 बांध।
- कच्छ क्षेत्र: 5 बांध।
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राज्य सरकार ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों और पशुपालकों के हितों को हमेशा प्राथमिकता दी गई है। सरकार भविष्य में भी किसी आपदा के समय उनकी मदद करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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किन जिलों को अकालग्रस्त घोषित किया गया?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी की मौजूदगी में गांधीनगर में मीडिया के सामने यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के अकाल निर्धारण दिशानिर्देश-2016 के अनुसार जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इस संबंध में उच्चस्तरीय बैठकें भी हुईं। इसके बाद राज्य सरकार ने चार जिलों को अकालग्रस्त घोषित करने का फैसला किया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल पूरे गुजरात में औसतन लगभग 89 फीसदी बारिश हुई है। हालांकि, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, कच्छ और जामनगर जिलों में बारिश कम हुई है। कम बारिश से पैदा हुए हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने इन चारों जिलों के किसानों को राहत देने के लिए कई फैसले लिए हैं।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार किसानों और पशुपालकों के व्यापक हितों को प्राथमिकता देती है। पहले भी किसानों पर मुश्किलें आने पर सरकार उनके साथ खड़ी रही है। मौजूदा स्थिति में भी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ किसानों की मदद कर रही है। भविष्य में किसानों और पशुपालकों पर किसी भी आपदा के समय जरूरत के मुताबिक सहायता देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
किसानों को कितनी सहायता मिलेगी?
मुख्यमंत्री ने बताया कि अकालग्रस्त घोषित जिलों में फसलों को हुए नुकसान के लिए राज्य सरकार ने राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के मानदंडों के अनुसार सहायता देने का फैसला किया है। इसके तहत किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर जमीन की सीमा में प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की सहायता दी जाएगी।
अकाल घोषित होने से पहले ही चारा वितरण शुरू
पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देरी से हुई बारिश की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी की थी। किसानों और पशुपालकों को सहारा देने के लिए अकाल घोषित होने से पहले ही जून-जुलाई 2026 से पूरे राज्य में राहत दर पर चारा वितरण शुरू कराने की मंजूरी दी गई थी। विशेष मामलों में चारा वितरण के लिए जिला कलेक्टरों को भी अधिकृत किया गया था।
राज्य में अब तक लगभग 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा वितरित किया जा चुका है। यह चारा दो रुपये प्रति किलोग्राम की राहत दर पर दिया गया है। फिलहाल राज्य सरकार के पास तीन करोड़ किलोग्राम चारा उपलब्ध है। इसके अलावा, अतिरिक्त चारा खरीदने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
पशु शिविरों के लिए कितनी मदद मिलेगी?
अकालग्रस्त घोषित तहसीलों में पशु शिविरों के पशुओं के लिए प्रतिदिन प्रति पशु 80 रुपये की सहायता दी जाएगी। यह सहायता दो महीने तक एसडीआरएफ से मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालकों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए इसके बाद ऐसी सहायता का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
ये भी पढ़ें: जमीन अधिग्रहण में धोखाधड़ी: 30 साल पुरानी प्रक्रिया रद्द; सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पलटा हाईकोर्ट का फैसला?
ग्रामीणों को 150 दिन का रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालग्रस्त घोषित तहसीलों में ग्रामीण लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए वीबी-जी राम-जी योजना के तहत 150 मानव दिवस का रोजगार देने का फैसला किया गया है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार के ये सभी फैसले 1 नवंबर 2026 से लागू होंगे।
सिंचाई के लिए पानी की क्या व्यवस्था है?
राज्य में सिंचाई के पानी की स्थिति पर मुख्यमंत्री ने बताया कि खरीफ मौसम में मांग के आधार पर 44 बांधों के कमांड क्षेत्र में पानी उपलब्ध कराया गया है। चालू वर्ष में राज्य के 206 प्रमुख बांधों में 66 फीसदी जल संग्रह हुआ है। राज्य सरकार ने आगामी रबी मौसम के लिए 76 बांधों के कमांड क्षेत्रों में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इसके साथ ही पेयजल को भी प्राथमिकता दी गई है। पीने के पानी के लिए 30 जून 2027 तक पानी आरक्षित रखा गया है।
किन क्षेत्रों के बांधों से मिलेगा सिंचाई का पानी?
राज्य सरकार की योजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के बांधों से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
- उत्तर गुजरात: धरोई और दांतीवाड़ा सहित 11 बांध।
- मध्य गुजरात: करजण और पानम सहित 12 बांध।
- दक्षिण गुजरात: उकाई, काकरापार और दमणगंगा सहित 9 बांध।
- अन्य क्षेत्रों में: शेत्रुंजी, ब्राह्मणी और मच्छू सहित 39 बांध।
- कच्छ क्षेत्र: 5 बांध।