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तकनीक: पहाड़ में पत्थर भी हिलेगा तो होगी जानकारी, हिमालयी राज्यों के लिए कारगर साबित होगा इंटरफेरोमीटर?
Thu, 03 Sep 2026 05:47 AM IST
निर्मल कांत
आफताब अजमत, हैदराबाद।
आफताब अजमत, हैदराबाद।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 03 Sep 2026 05:47 AM IST
पहाड़ों में भू-स्खलन के दौरान अब पत्थर के खिसकने तक की जानकारी वैज्ञानिकों को मिल सकेगी। इंटरफेरोमीटर तकनीक और सैटेलाइट की मदद से जमीन में होने वाले बेहद छोटे बदलाव भी पकड़े जाएंगे। हिमालयी राज्यों को आपदा से पहले अलर्ट करने में यह तकनीक कितनी कारगर होगी, जानिए।
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आपदा (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों में आने वाले समय में भू-स्खलन के चलते पत्थर भी हिलेगा तो वैज्ञानिकों को पता चल सकेगा।
सुनामी चेतावनी प्रणाली में नाम स्थापित कर चुका हैदराबाद का भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (इन्कोइस) इंटरफेरोमीटर तकनीक के जरिये यह काम करेगा। इन्कोइस के वैज्ञानिक डॉ. एन. श्रीनिवास राव ने बताया कि भविष्य में इंटरफेरोमीटर तकनीकी से ये काम आसान होने वाला है। इसके लिए इसरो लगातार सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज रहा है। भारत ने सुनामी जैसी आपदाओं से सीख लेकर ऐसा फ्रेमवर्क तैयार किया है, जिससे देश अब सुनामी से चिंता मुक्त बन चुका है। आस-पड़ोस के करीब 24 देशों को भी हम सुनामी से अलर्ट कर रहे हैं।
क्या होती है इंटर फैरोमीटर तकनीक
इंटरफेरोमीटर तकनीक अत्यंत सटीक और उन्नत मापन तकनीक है, जो तरंगों (आमतौर पर प्रकाश, लेजर या रेडियो तरंगों) के व्यतिकरण के सिद्धांत पर काम करती है। इसका उपयोग विज्ञान और उद्योगों में ऐसी सूक्ष्म चीजों को मापने के लिए किया जाता है, जिन्हें किसी अन्य सामान्य तरीके से मापना नामुमकिन होता है। यह दुनिया की सबसे सटीक दूरी और सतह मापने वाली प्रणालियों में से एक है।
ये भी पढ़ें: कृष्णा-गोदावरी बेसिन में समुद्र के नीचे खिसकी जमीन?: भारत ने शुरू की जांच, मिले बड़े सबूत
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भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है। भूकंप और उससे उठने वाली हर लहर पर वैज्ञानिक 24 घंटे नजर रख रहे हैं। मछुवारों के लिए अनुकूल हालातों की पूरी जानकारी एसएमएस, ई-मेल से दी जा रही है।
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सुनामी चेतावनी प्रणाली में नाम स्थापित कर चुका हैदराबाद का भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (इन्कोइस) इंटरफेरोमीटर तकनीक के जरिये यह काम करेगा। इन्कोइस के वैज्ञानिक डॉ. एन. श्रीनिवास राव ने बताया कि भविष्य में इंटरफेरोमीटर तकनीकी से ये काम आसान होने वाला है। इसके लिए इसरो लगातार सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज रहा है। भारत ने सुनामी जैसी आपदाओं से सीख लेकर ऐसा फ्रेमवर्क तैयार किया है, जिससे देश अब सुनामी से चिंता मुक्त बन चुका है। आस-पड़ोस के करीब 24 देशों को भी हम सुनामी से अलर्ट कर रहे हैं।
क्या होती है इंटर फैरोमीटर तकनीक
इंटरफेरोमीटर तकनीक अत्यंत सटीक और उन्नत मापन तकनीक है, जो तरंगों (आमतौर पर प्रकाश, लेजर या रेडियो तरंगों) के व्यतिकरण के सिद्धांत पर काम करती है। इसका उपयोग विज्ञान और उद्योगों में ऐसी सूक्ष्म चीजों को मापने के लिए किया जाता है, जिन्हें किसी अन्य सामान्य तरीके से मापना नामुमकिन होता है। यह दुनिया की सबसे सटीक दूरी और सतह मापने वाली प्रणालियों में से एक है।
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भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है। भूकंप और उससे उठने वाली हर लहर पर वैज्ञानिक 24 घंटे नजर रख रहे हैं। मछुवारों के लिए अनुकूल हालातों की पूरी जानकारी एसएमएस, ई-मेल से दी जा रही है।