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सेमीकंडक्टर की वैश्विक रेस में भारत: अरबों का निवेश और सेमीकंडक्टर सुपरपावर बनने का सपना, क्या है पूरा प्लान?

Wed, 14 Oct 2026 08:31 AM IST
संकल्प प्रकाश सिंह स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: संकल्प प्रकाश सिंह Updated Wed, 14 Oct 2026 08:31 AM IST
सार
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भारत सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भर बनने के लिए बड़े निवेश कर रहा है। इससे देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि, इसमें कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। 

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India Semiconductor Mission: India's Race To Become A Global Semiconductor Manufacturing Hub
Semiconductor Chips - फोटो : Amar Ujala AI Generated

विस्तार

दुनिया अब चौथी औद्योगिक क्रांति में प्रवेश कर चुकी है। यह दौर डाटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। एआई की क्षमता में जिस तेजी से विकास हो रहा है वह शिक्षा, उद्योग, ई-कॉमर्स, मेडिकल से लेकर तमाम क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आ रही है। हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमता को गति देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका सेमीकंडक्टर चिप्स की है।

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इस कारण विश्वशक्तियां सेमीकंडक्टर की रेस में आगे बने रहने के लिए कई बड़े और रणनीतिक फैसले ले रही हैं। इनमें चिप्स की सप्लाई चेन से लेकर कैसे उन्नत किस्म की माइक्रो चिप्स को बनाया जा सकता है ये सभी चीजें शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि सेमीकंडक्टर चिप्स के क्षेत्र में भारत क्या फैसले ले रहा है? और इसको लेकर देश के समक्ष क्या सबसे बड़ी चुनौतियां हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से - 

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क्या है भारत का सेमीकंडक्टर मिशन?

दुनिया में सेमीकंडक्टर बनाने की प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। कई विकसित देश चिप निर्माण से जुड़ी कंपनियों को भारी आर्थिक सहायता प्रदान कर रहे हैं। ऐसे में भारत ने भी अपनी सेमीकंडक्टर योजना में बदलाव करते हुए निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इसके तहत चिप निर्माण, डिस्प्ले बनाने वाली फैक्ट्रियों और चिप डिजाइन के क्षेत्र में आर्थिक मदद को मजबूत किया जाएगा।

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वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण से जुड़े संशोधित कार्यक्रम के लिए 8,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इसका उद्देश्य देश में चिप निर्माण के लिए निवेश बढ़ाना, बेहतर रोजगार के अवसर पैदा करना और चिप्स की मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग तथा डिजाइन के क्षेत्र में भारत की क्षमता को मजबूत करना है। 

सेमीकंडक्टर की रेस में आगे बने रहने के लिए भारत सरकार इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का संचालन कर रही है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले बनाने से जुड़े उद्योगों को मजबूत करना है ताकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण और डिजाइन के क्षेत्र में दुनिया का एक प्रमुख केंद्र बन सके। सरकार ने 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ सेमीकॉन इंडिया मिशन 2.0 को भी मंजूरी दी है। इसका मकसद देश को सिर्फ चिप असेंबल तक सीमित नहीं रखना है बल्कि भारत में ही मशीनें, केमिकल, गैस और रॉ मटेरियल बनाना है। 

वर्तमान में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार लगभग 64 अरब डॉलर का है। वहीं अनुमान है कि 2035 तक यह 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत साल 2035 तक ग्लोबल सेमीकंडक्टर चिप मार्केट का 10 प्रतिशत से 13 प्रतिशत हिस्सा अपने नाम करना चाहता है। 2035 तक भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने के लिए 4-5 सिलिकॉन फैब्स, 8-10 कंपाउंड फैब्स और 20-25 ऐसी इकाइयां स्थापित करने की योजना है, जहां चिप्स की पैकेजिंग और टेस्टिंग की जाएंगी।

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Semiconductor Chips - फोटो : Amar Ujala AI Generated

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत के पास वैश्विक चिप डिजाइनिंग वर्कफोर्स का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा इंटेल इंडिया और इंट्रोडक्शन टू सेमीकंडक्टर जैसे कोर्सेस की मदद से देश में हजारों की संख्या में इंजीनियर्स को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के मुताबिक भारत अपनी इस कुशल प्रतिभा और बड़े घरेलू बाजार की मदद से सेमीकंडक्टर की वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी एक मजबूत हिस्सेदारी बनाने की स्थिति में है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत वर्तमान में 28nm से 90nm सेगमेंट पर काम कर रहा है। वहीं सरकार 2035 तक अत्याधुनिक 3nm और 2nm सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण करना चाहती है। 

क्या हैं बड़ी चुनौतियां? 

सेमीकंडक्टर फैक्ट्री चलाना सिर्फ आधुनिक मशीनें लगाने तक सीमित नहीं है। चिप बनाने की प्रक्रिया में बेहद शुद्ध पानी की जरूरत होती है। एक मध्यम आकार की फैक्ट्री में रोजाना करीब 2 से 3 करोड़ लीटर अल्ट्रा-प्योर वॉटर इस्तेमाल हो सकता है। इसके साथ ही उत्पादन को लगातार जारी रखने के लिए चौबीसों घंटे बिना रुकावट बिजली की आपूर्ति जरूरी है। बिजली में कुछ पल की गड़बड़ी भी उत्पादन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है और करोड़ों रुपये के चिप वेफर्स खराब होने का खतरा पैदा कर सकती है।

इस कारण सेमीकंडक्टर क्षेत्र में फैब्रिकेशन प्लांट स्थापित करने के लिए संसाधनों की उपलब्धता और बिजली की स्थिर आपूर्ति को महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में देखा जाता है। चिप निर्माण के लिए पर्याप्त शुद्ध पानी, भरोसेमंद बिजली और मजबूत बुनियादी ढांचा जरूरी है। इसलिए भारत में सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियां स्थापित करने की योजना बनाते समय इन जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेमीकंडक्टर चिप बनाने के लिए 300 से अधिक प्रकार के विशेष रसायनों, अल्ट्रा-प्योर नियॉन और हीलियम जैसी गैसों तथा गैलियम और जर्मेनियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत होती है। इसके अलावा चिप निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लिथोग्राफी मशीनें भी बेहद जरूरी हैं।

गौर करने वाली बात है कि इन कच्चे मालों और अत्याधुनिक मशीनों की आपूर्ति के लिए भारत काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर है। इनमें ताइवान, जापान, अमेरिका और यूरोप के वैश्विक सप्लायर्स शामिल हैं। सरकार ने यह खुद स्वीकार किया है कि सेमीकंडक्टर के लिए कच्चे माल के घरेलू इकोसिस्टम की कमी देश के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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