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महाराष्ट्र आरक्षण विवाद: मनोज जरांगे के अनशन के बीच ओबीसी कार्यकर्ताओं ने भी शुरू की भूख हड़ताल, टकराव क्यों?
Sun, 06 Sep 2026 06:46 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, जालना।
पीटीआई, जालना।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 06 Sep 2026 06:46 PM IST
जालना में मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच ओबीसी समुदाय ने भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। ओबीसी कार्यकर्ता मराठों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने की मांग का विरोध कर रहे हैं और अपने आरक्षण हिस्से की सुरक्षा की बात कह रहे हैं। वहीं मनोज जरांगे मराठा समुदाय को ओबीसी आरक्षण दिलाने की मांग पर नौवें दिन भी अनशन पर हैं। दोनों आंदोलनों की नजदीकी को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है।
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मराठा आरक्षण
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महाराष्ट्र के जालना में मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच अब ओबीसी समुदाय ने भी मोर्चा खोल दिया है। रविवार को ओबीसी कार्यकर्ताओं ने मनोज जरांगे के प्रदर्शन स्थल से कुछ ही मीटर की दूरी पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। यह आंदोलन अंतरवाली सराटी गांव के सोनिया नगर में शुरू हुआ है। मंगेश ससाणे, विठ्ठल तालेकर, सतीश कुलाल और बाबासाहेब बाटुले इसमें शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे ओबीसी समुदाय के सांविधानिक अधिकार और आरक्षण में हिस्सेदारी की रक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
क्या है मनोज जरांगे की मांग?
मनोज जरांगे का अनिश्चितकालीन अनशन रविवार को नौवें दिन में पहुंच गया। उनके साथियों का दावा है कि उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई है। बताया गया है कि जरांगे पिछले दो दिनों से पानी, इलाज और नस के जरिए दी जाने वाली फ्लूड्स लेने से भी इनकार कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में आरक्षण देने की है। इसके लिए वह हैदराबाद गजट और सातारा गजट के रिकॉर्ड लागू करने के साथ-साथ पात्र मराठा लोगों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।
क्या है कुनबी का मुद्दा?
ओबीसी कार्यकर्ताओं को किस बात की आशंका?
ओबीसी कार्यकर्ता मंगेश ससाणे का आरोप है कि जरांगे के आंदोलन के जरिए राज्य सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्हें आशंका है कि मराठों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने से ओबीसी समुदाय के मौजूदा आरक्षण हिस्से पर असर पड़ सकता है। ससाणे ने दावा किया कि अब तक मराठा समुदाय के करीब 22 लाख जाति प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील और एमएलसी प्रसाद लाड उन्हें हर संभव समर्थन दे रहे हैं।
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यह भी पढ़ें: भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ की बड़ी कार्रवाई: 17 करोड़ से ज्यादा का सोना जब्त, कौन है पकड़ा गया तस्कर?
सरकार के फैसले पर सवाल क्यों?
ससाणे ने मराठों को कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर जाति प्रमाणपत्र देने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति को ‘अवैध’ बताया। उनका कहना है कि जांच के दौरान पहले जारी किए गए कई मराठा जाति प्रमाणपत्रों को सत्यापन समितियों ने खारिज किया है।
ससाणे ने सवाल उठाया कि जब जाति सत्यापन समितियों ने कुछ प्रमाणपत्र खारिज किए, तो जरांगे इस फैसले पर सवाल क्यों उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मंत्री मराठों को ओबीसी श्रेणी में शामिल कराने के लिए साजिश कर रहे हैं। ससाणे ने सरकार पर एक समुदाय को ‘विशेष व्यवहार’ देने का आरोप लगाया। हालांकि, ये सभी आरोप ओबीसी कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। ओबीसी प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण के मुद्दे पर कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले युवाओं के परिवारों को आर्थिक मदद देने की मांग की। उन्होंने ऐसे परिवारों के पात्र सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की भी मांग रखी है।
दोनों आंदोलनों के आमने-सामने होने से क्या स्थिति?
ओबीसी कार्यकर्ताओं ने आंदोलन के बीच आने वाले मंत्रियों को भी चेतावनी दी है। ससाणे ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर मंत्रियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। दूसरी तरफ, जरांगे पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह आंदोलन तेज करने के लिए मुंबई तक मार्च करेंगे। जरांगे के साथियों के मुताबिक, सरकार के पहले दिए गए आश्वासनों को लागू करने में देरी के विरोध में उनका अनशन जारी है। दोनों प्रदर्शन स्थल एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। ऐसे में किसी टकराव को रोकने के लिए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।
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क्या है मनोज जरांगे की मांग?
मनोज जरांगे का अनिश्चितकालीन अनशन रविवार को नौवें दिन में पहुंच गया। उनके साथियों का दावा है कि उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई है। बताया गया है कि जरांगे पिछले दो दिनों से पानी, इलाज और नस के जरिए दी जाने वाली फ्लूड्स लेने से भी इनकार कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में आरक्षण देने की है। इसके लिए वह हैदराबाद गजट और सातारा गजट के रिकॉर्ड लागू करने के साथ-साथ पात्र मराठा लोगों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।
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क्या है कुनबी का मुद्दा?
- कुनबी पारंपरिक खेती-किसानी से जुड़ा समुदाय है, जो आधिकारिक तौर पर ओबीसी श्रेणी में आता है।
- कुनबी प्रमाणपत्र मिलने पर पात्र लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सकता है।
ओबीसी कार्यकर्ताओं को किस बात की आशंका?
ओबीसी कार्यकर्ता मंगेश ससाणे का आरोप है कि जरांगे के आंदोलन के जरिए राज्य सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्हें आशंका है कि मराठों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने से ओबीसी समुदाय के मौजूदा आरक्षण हिस्से पर असर पड़ सकता है। ससाणे ने दावा किया कि अब तक मराठा समुदाय के करीब 22 लाख जाति प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील और एमएलसी प्रसाद लाड उन्हें हर संभव समर्थन दे रहे हैं।
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सरकार के फैसले पर सवाल क्यों?
ससाणे ने मराठों को कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर जाति प्रमाणपत्र देने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति को ‘अवैध’ बताया। उनका कहना है कि जांच के दौरान पहले जारी किए गए कई मराठा जाति प्रमाणपत्रों को सत्यापन समितियों ने खारिज किया है।
ससाणे ने सवाल उठाया कि जब जाति सत्यापन समितियों ने कुछ प्रमाणपत्र खारिज किए, तो जरांगे इस फैसले पर सवाल क्यों उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मंत्री मराठों को ओबीसी श्रेणी में शामिल कराने के लिए साजिश कर रहे हैं। ससाणे ने सरकार पर एक समुदाय को ‘विशेष व्यवहार’ देने का आरोप लगाया। हालांकि, ये सभी आरोप ओबीसी कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। ओबीसी प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण के मुद्दे पर कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले युवाओं के परिवारों को आर्थिक मदद देने की मांग की। उन्होंने ऐसे परिवारों के पात्र सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की भी मांग रखी है।
दोनों आंदोलनों के आमने-सामने होने से क्या स्थिति?
ओबीसी कार्यकर्ताओं ने आंदोलन के बीच आने वाले मंत्रियों को भी चेतावनी दी है। ससाणे ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर मंत्रियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। दूसरी तरफ, जरांगे पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह आंदोलन तेज करने के लिए मुंबई तक मार्च करेंगे। जरांगे के साथियों के मुताबिक, सरकार के पहले दिए गए आश्वासनों को लागू करने में देरी के विरोध में उनका अनशन जारी है। दोनों प्रदर्शन स्थल एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। ऐसे में किसी टकराव को रोकने के लिए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।