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'मणिपुर को इतनी सुरक्षा की जरूरत थी': दिल्ली प्रदर्शन में भारी पुलिस तैनाती पर भड़की टीएमसी, सरकार को घेरा
Sat, 17 Oct 2026 01:30 PM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, कोलकाता, पश्चिम बंगाल
पीटीआई, कोलकाता, पश्चिम बंगाल
Published by: अमन मौर्या
Updated Sat, 17 Oct 2026 01:30 PM IST
ममता-एआईटीएमसी विधायक कुणाल घोष ने दिल्ली में एसआईआर विरोधी प्रदर्शनों के खिलाफ भारी सुरक्षा तैनाती पर सवाल उठाया है। उन्होंने केंद्र से पूछा कि इतनी फोर्स मणिपुर में क्यों नहीं भेजी गई?
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कुणाल घोष, विधायक, तृणमूल कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (ममता- एआईटीएमसी) के विधायक कुणाल घोष ने दिल्ली में एसआईआर विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए भारी सुरक्षा तैनाती पर सवाल उठाया है। उन्होंने मणिपुर हिंसा पर भी सवाल किया और पूछा कि मणिपुर में (जो तीन साल से अधिक समय से जातीय हिंसा से जूझ रहा है) इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल क्यों तैनात नहीं किए गए? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आरोप पर (विपक्ष बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन चाहता है और युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल अराजकता फैलाने के लिए कर रहा है) घोष ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इतनी भारी सुरक्षा तैनाती यह दिखाती है कि सरकार उनके सवालों का जवाब देने में असमर्थ है।
ये भी पढ़ें: 'सवाल पूछना अराजकता नहीं': दिपके ने भाजपा से पूछा- विपक्ष में रहकर करते थे प्रदर्शन, सत्ता में आने पर डर क्यों
दिल्ली में प्रदर्शन पर क्या बोली टीएमसी?
ममता- एआईटीएमसी के प्रवक्ता ने कहा, 'हम अराजकता का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन जब नई पीढ़ी किसी मुद्दे पर सवाल उठाती है, तो उन्हें संतुष्ट करना आपकी जिम्मेदारी है।' उन्होंने कहा कि आपके पास इतनी सारी पुलिस और अर्धसैनिक बल मौजूद हैं। उन्हें युवाओं के खिलाफ क्यों तैनात किया जा रहा है? आपको इतनी पुलिस और अर्धसैनिक बलों को मणिपुर भेजना चाहिए था। अगर आपने उन्हें सही समय पर मणिपुर भेजा होता, तो वहां की समस्या हल हो गई होती। बता दें कि मणिपुर में घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष (जो मई 2023 में शुरू हुआ था) अब तक कम से कम 306 लोगों की जान ले चुका है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं। इस साल फरवरी से राज्य में कुकी और नागा समुदायों के बीच हुई झड़पों में लगभग 50 लोग मारे गए हैं।
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क्यों हो रहा है विरोध?
घोष की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों और युवा समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। ये लोग मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें: 'मैं माफी मांगता हूं': एसआईआर विवाद पर राउत बोले- सुप्रीम कोर्ट न्याय की आखिरी उम्मीद, जानें और क्या कहा
सीजेपी ने क्या आह्वान किया?
'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) ने शुक्रवार को मध्य दिल्ली में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च का आह्वान किया था। शुक्रवार को प्रदर्शन से पहले पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और छात्र नेता नेहा बोरा समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया। वहीं, कड़ी सुरक्षा के बीच प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस और अन्य जगहों पर इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं, जबकि भाजपा ने विपक्षी दलों पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने और अशांति फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
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दिल्ली में प्रदर्शन पर क्या बोली टीएमसी?
ममता- एआईटीएमसी के प्रवक्ता ने कहा, 'हम अराजकता का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन जब नई पीढ़ी किसी मुद्दे पर सवाल उठाती है, तो उन्हें संतुष्ट करना आपकी जिम्मेदारी है।' उन्होंने कहा कि आपके पास इतनी सारी पुलिस और अर्धसैनिक बल मौजूद हैं। उन्हें युवाओं के खिलाफ क्यों तैनात किया जा रहा है? आपको इतनी पुलिस और अर्धसैनिक बलों को मणिपुर भेजना चाहिए था। अगर आपने उन्हें सही समय पर मणिपुर भेजा होता, तो वहां की समस्या हल हो गई होती। बता दें कि मणिपुर में घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष (जो मई 2023 में शुरू हुआ था) अब तक कम से कम 306 लोगों की जान ले चुका है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं। इस साल फरवरी से राज्य में कुकी और नागा समुदायों के बीच हुई झड़पों में लगभग 50 लोग मारे गए हैं।
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क्यों हो रहा है विरोध?
घोष की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों और युवा समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। ये लोग मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
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सीजेपी ने क्या आह्वान किया?
'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) ने शुक्रवार को मध्य दिल्ली में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च का आह्वान किया था। शुक्रवार को प्रदर्शन से पहले पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और छात्र नेता नेहा बोरा समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया। वहीं, कड़ी सुरक्षा के बीच प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस और अन्य जगहों पर इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं, जबकि भाजपा ने विपक्षी दलों पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने और अशांति फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।