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पाकिस्तान में फिर पैर पसार रहा लश्कर: सिंध में एक साल में बनाए सात मरकज-मस्जिदें, चोरी छिपे कौन कर रहा मदद?
Tue, 25 Aug 2026 05:27 PM IST
Devesh Tripathi
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 25 Aug 2026 05:27 PM IST
भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान में अपने संगठनात्मक ढांचे को फिर मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। सिंध में नए मरकज और मस्जिदों के जरिए युवाओं तक पहुंच बढ़ाने, आर्थिक संसाधन जुटाने और संगठन के लिए समर्थन तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। आइए जानते हैं इस गतिविधि में लश्कर की कौन मदद कर रहा है...
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पाकिस्तान में लश्कर का नेटवर्क
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/IANS
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विस्तार
लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विस्तार अभियान चला रहा है। भारतीय एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, संगठन ने पिछले एक साल में अकेले सिंध प्रांत में सात मरकज और मस्जिदें बनाई हैं। इन सुविधाओं के लिए पाकिस्तान का सरकारी तंत्र बड़े पैमाने पर धन मुहैया करा रहा है।
राज्य से मिलने वाली आर्थिक मदद के अलावा लश्कर-ए-तैयबा बड़े स्तर पर धन जुटाने के अभियान भी चला रहा है। उसे धर्मार्थ संस्थाओं के नाम पर विदेशों से भी धन मिला है। खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संख्या में इन सुविधाओं का तैयार होना स्पष्ट संकेत है कि लश्कर-ए-तैयबा बड़े स्तर पर अपना विस्तार कर रहा है।
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अधिकारी ने कहा कि ये लोग कई स्थानों पर जाकर लश्कर-ए-तैयबा के सदस्यों के साथ बैठकें करते हैं। इन मरकज और मस्जिदों को मुख्य रूप से युवाओं की भर्ती, धन जुटाने और गतिविधियों के लिए लोगों को संगठित करने की योजना बनाने के लिए स्थापित किया जा रहा है।
फिलहाल संगठन का ध्यान सिंध प्रांत पर है, लेकिन धीरे-धीरे इस तरह के संपर्क और विस्तार कार्यक्रम पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी चलाए जाएंगे। एक अधिकारी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए लश्कर-ए-तैयबा अपने राजनीतिक और राजनीतिक रूप से जुड़े संगठनों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। अधिकारी के अनुसार, इन समूहों को आगे किया जा रहा है, ताकि ऐसे कार्यक्रमों को वैधता मिल सके।
इससे संगठन को मुख्यधारा में बने रहने और खास तौर पर वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचने में मदद मिलती है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि यह सब सरकारी तंत्र की मंजूरी से हो रहा है। तल्हा सईद और कसूरी जैसे लोगों के काफिलों को पुलिसकर्मी सुरक्षा देते हैं। अधिकारी ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि आईएसआई ने पुलिस बल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नामित आतंकवादियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
एक अधिकारी ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा जम्मू-कश्मीर में अपने संपर्कों तक भी पहुंच बना रहा है और उन्हें इसी तरह के संपर्क कार्यक्रम चलाने की सलाह दे रहा है। इन लोगों को राजनीतिक वर्ग के साथ घुलने-मिलने के लिए भी कहा गया है, ताकि वे सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में न आएं। एक अधिकारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में इस तरह का संपर्क अभियान सुरक्षा के लिहाज से चिंता का संकेत है। इसका उद्देश्य भर्ती बढ़ाना और युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए अपने साथ जोड़ना है।
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राज्य से मिलने वाली आर्थिक मदद के अलावा लश्कर-ए-तैयबा बड़े स्तर पर धन जुटाने के अभियान भी चला रहा है। उसे धर्मार्थ संस्थाओं के नाम पर विदेशों से भी धन मिला है। खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संख्या में इन सुविधाओं का तैयार होना स्पष्ट संकेत है कि लश्कर-ए-तैयबा बड़े स्तर पर अपना विस्तार कर रहा है।
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पाकिस्तान में सक्रिय हुए आतंक के आका
संगठन के शीर्ष कमांडर भारी सुरक्षा वाले काफिलों में पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं। लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख लोगों में शामिल सैफुल्लाह कसूरी, तल्हा हाफिज सईद और नदीम फैसल इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।
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अधिकारी ने कहा कि ये लोग कई स्थानों पर जाकर लश्कर-ए-तैयबा के सदस्यों के साथ बैठकें करते हैं। इन मरकज और मस्जिदों को मुख्य रूप से युवाओं की भर्ती, धन जुटाने और गतिविधियों के लिए लोगों को संगठित करने की योजना बनाने के लिए स्थापित किया जा रहा है।
लश्कर कैसे बढ़ा रहा पाकिस्तान में अपनी ताकत?
ये सुविधाएं लश्कर-ए-तैयबा के लिए लोगों तक पहुंच बनाने के केंद्र के रूप में भी काम कर रही हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान संगठन को बड़ा नुकसान हुआ था और इसके बाद से वह दोबारा अपने ढांचे को खड़ा करने में जुटा है। इस अभियान के दौरान मुरीदके में उसका एक बड़ा प्रशिक्षण केंद्र भी नष्ट हुआ था। यह अभियान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में चलाया गया था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी।फिलहाल संगठन का ध्यान सिंध प्रांत पर है, लेकिन धीरे-धीरे इस तरह के संपर्क और विस्तार कार्यक्रम पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी चलाए जाएंगे। एक अधिकारी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए लश्कर-ए-तैयबा अपने राजनीतिक और राजनीतिक रूप से जुड़े संगठनों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। अधिकारी के अनुसार, इन समूहों को आगे किया जा रहा है, ताकि ऐसे कार्यक्रमों को वैधता मिल सके।
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी दे रही लश्कर के आतंकियों को सुरक्षा
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा अपने सदस्यों को चुनावी रैलियों और बड़े आयोजनों में भी भेज रहा है। इसका उद्देश्य लोगों के बीच घुलना-मिलना और अपना एजेंडा सामने रखना है। इसके अलावा, संगठन पिछले कुछ महीनों में कई राजनीतिक दलों और उनके नेताओं से भी संपर्क कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मुख्यधारा में आने और खुद को वैध दिखाने की कोशिश करना है।इससे संगठन को मुख्यधारा में बने रहने और खास तौर पर वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचने में मदद मिलती है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि यह सब सरकारी तंत्र की मंजूरी से हो रहा है। तल्हा सईद और कसूरी जैसे लोगों के काफिलों को पुलिसकर्मी सुरक्षा देते हैं। अधिकारी ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि आईएसआई ने पुलिस बल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नामित आतंकवादियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
पीओके में बढ़ रही लश्कर के आतंकियों की मौजूदगी
अधिकारियों का कहना है कि जहां एक ओर लश्कर-ए-तैयबा को वैध दिखाने के लिए ऐसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसकी आतंकवादी गतिविधियां जारी हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी बढ़ाई जा रही है। वे जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन के सदस्यों के साथ जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ का इंतजार कर रहे हैं।एक अधिकारी ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा जम्मू-कश्मीर में अपने संपर्कों तक भी पहुंच बना रहा है और उन्हें इसी तरह के संपर्क कार्यक्रम चलाने की सलाह दे रहा है। इन लोगों को राजनीतिक वर्ग के साथ घुलने-मिलने के लिए भी कहा गया है, ताकि वे सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में न आएं। एक अधिकारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में इस तरह का संपर्क अभियान सुरक्षा के लिहाज से चिंता का संकेत है। इसका उद्देश्य भर्ती बढ़ाना और युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए अपने साथ जोड़ना है।