{"_id":"6a8c51a742a0c9b2e90f2f82","slug":"manoj-jarange-maratha-reservation-hunger-strike-threat-august-29-kunbi-certificate-fadnavis-government-2026-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"जरांगे अनशन पर अड़े: मराठा आरक्षण पर फडणवीस सरकार को दी डेडलाइन; कहा- मांगें नहीं मानीं तो 29 से भूख हड़ताल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
जरांगे अनशन पर अड़े: मराठा आरक्षण पर फडणवीस सरकार को दी डेडलाइन; कहा- मांगें नहीं मानीं तो 29 से भूख हड़ताल
Mon, 24 Aug 2026 07:44 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, जालना
पीटीआई, जालना
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 24 Aug 2026 07:44 PM IST
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे ने प्रस्तावित आंदोलन से पीछे हटने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सरकार के सामने लंबित कुंभी प्रमाणपत्र और वैधता दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 28 अगस्त तक का समय रखा है। साथ ही आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने की मांग भी दोहराई है।
विज्ञापन
मराठा आरक्षण के नेता मनोज जरांगे
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने सोमवार को 29 अगस्त से जालना जिले के अंतरवाली सराटी में भूख हड़ताल शुरू करने के अपने फैसले पर कायम रहने की बात कही। उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत मराठा समुदाय को आरक्षण देने की मांग दोहराई।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों शंभूराज देसाई, राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत के एक प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात की और उनसे आंदोलन शुरू नहीं करने की अपील की। हालांकि, जरांगे अपने फैसले पर कायम रहे और सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई करने के लिए 28 अगस्त तक की समयसीमा दी।
मनोज जरांगे ने सरकार से की क्या मांगें?
जरांगे ने मांग की कि मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुंभी प्रमाणपत्र और वैधता दस्तावेज जारी करने की लंबित प्रक्रिया 28 अगस्त तक पूरी की जाए। उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लेने की भी मांग की।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि समुदाय कानून के दायरे में और 1967 से पुराने रिकॉर्ड के आधार पर आरक्षण की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन मराठाओं के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में उनकी कुंभी पहचान साबित होती है, उन्हें कुंभी प्रमाणपत्र जारी किया जाना चाहिए।
फडणवीस सरकार के मंत्रियों पर लगाए क्या आरोप?
अंतरवाली सराटी गांव में जरांगे और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच यह बैठक मीडिया और मराठा समुदाय के सदस्यों की मौजूदगी में हुई। जरांगे ने आरोप लगाया कि मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और संजय शिरसाट मराठा समुदाय को आरक्षण देने की प्रक्रिया में अड़चन पैदा कर रहे हैं।
मंत्री उदय सामंत ने कहा कि करीब 58 लाख रिकॉर्ड की जांच से कई संबंधित प्रविष्टियों की पहचान हुई है, जबकि कुछ रिकॉर्ड अभी अपलोड किए जाने बाकी हैं। हालांकि, जरांगे ने सवाल किया कि जांच किए गए कुल रिकॉर्ड में से वास्तव में कितने वैध कुंभी रिकॉर्ड की पहचान हुई है।
जरांगे ने सरकार को दी डेडलाइन
प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे और शिंदे समिति के सदस्यों के बीच बातचीत भी कराई। जरांगे ने जोर देकर कहा कि पात्र आवेदकों को प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया 28 अगस्त तक पूरी की जानी चाहिए। जरांगे ने सरकार के प्रतिनिधियों से कहा, "हमें साफ-साफ बताइए कि क्या सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण नहीं देने वाली है।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि मराठा समुदाय पिछड़ी जातियों के सदस्यों के खिलाफ नहीं है। वह केवल ऐसे दस्तावेजी सबूतों के आधार पर ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण मांग रहा है, जिनसे कुंभी पहचान साबित होती है। जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर भी असंतोष जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पात्र आवेदकों को कुंभी प्रमाणपत्र और वैधता दस्तावेज हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने दिया क्या भरोसा?
मंत्रियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री प्रमाणपत्र और वैधता दस्तावेज जारी करने में कोई बाधा नहीं डाल रहे हैं। हालांकि, जरांगे ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी प्रमाणपत्रों की वैधता रद्द कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे मामलों का तत्काल समाधान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 29 अगस्त को प्रस्तावित आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार के आश्वासन ठोस कार्रवाई में नहीं बदल जाते।
जरांगे से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि सरकार मराठा समुदाय के सदस्यों की ओर से मांगे जा रहे कुंभी जाति प्रमाणपत्र जारी करने और उनकी वैधता की प्रक्रिया में मौजूद खामियों और प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने के लिए काम कर रही है।
सरकार ने किन अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही?
मंत्री ने कहा, "हमने जरांगे से आंदोलन शुरू करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। दो या तीन दिनों के भीतर हम समस्याओं का समाधान कर देंगे।" विखे पाटिल ने स्वीकार किया कि मराठा समुदाय के लिए आरक्षण लागू करने में कुछ "देरी और गलतियां" हुई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सुधारात्मक कदम उठा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी अधिकारी प्रमाणपत्र जारी करने और उनकी वैधता की प्रक्रिया में अड़चन पैदा कर रहे हैं और इस तरह सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्री ने कहा, "यह गंभीर मामला है। अगर अधिकारी जिम्मेदार पाए गए तो उन्हें निलंबित किया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।"
विज्ञापन
महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों शंभूराज देसाई, राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत के एक प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात की और उनसे आंदोलन शुरू नहीं करने की अपील की। हालांकि, जरांगे अपने फैसले पर कायम रहे और सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई करने के लिए 28 अगस्त तक की समयसीमा दी।
विज्ञापन
मनोज जरांगे ने सरकार से की क्या मांगें?
जरांगे ने मांग की कि मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुंभी प्रमाणपत्र और वैधता दस्तावेज जारी करने की लंबित प्रक्रिया 28 अगस्त तक पूरी की जाए। उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लेने की भी मांग की।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि समुदाय कानून के दायरे में और 1967 से पुराने रिकॉर्ड के आधार पर आरक्षण की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन मराठाओं के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में उनकी कुंभी पहचान साबित होती है, उन्हें कुंभी प्रमाणपत्र जारी किया जाना चाहिए।
फडणवीस सरकार के मंत्रियों पर लगाए क्या आरोप?
अंतरवाली सराटी गांव में जरांगे और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच यह बैठक मीडिया और मराठा समुदाय के सदस्यों की मौजूदगी में हुई। जरांगे ने आरोप लगाया कि मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और संजय शिरसाट मराठा समुदाय को आरक्षण देने की प्रक्रिया में अड़चन पैदा कर रहे हैं।
मंत्री उदय सामंत ने कहा कि करीब 58 लाख रिकॉर्ड की जांच से कई संबंधित प्रविष्टियों की पहचान हुई है, जबकि कुछ रिकॉर्ड अभी अपलोड किए जाने बाकी हैं। हालांकि, जरांगे ने सवाल किया कि जांच किए गए कुल रिकॉर्ड में से वास्तव में कितने वैध कुंभी रिकॉर्ड की पहचान हुई है।
जरांगे ने सरकार को दी डेडलाइन
प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे और शिंदे समिति के सदस्यों के बीच बातचीत भी कराई। जरांगे ने जोर देकर कहा कि पात्र आवेदकों को प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया 28 अगस्त तक पूरी की जानी चाहिए। जरांगे ने सरकार के प्रतिनिधियों से कहा, "हमें साफ-साफ बताइए कि क्या सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण नहीं देने वाली है।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि मराठा समुदाय पिछड़ी जातियों के सदस्यों के खिलाफ नहीं है। वह केवल ऐसे दस्तावेजी सबूतों के आधार पर ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण मांग रहा है, जिनसे कुंभी पहचान साबित होती है। जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर भी असंतोष जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पात्र आवेदकों को कुंभी प्रमाणपत्र और वैधता दस्तावेज हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने दिया क्या भरोसा?
मंत्रियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री प्रमाणपत्र और वैधता दस्तावेज जारी करने में कोई बाधा नहीं डाल रहे हैं। हालांकि, जरांगे ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी प्रमाणपत्रों की वैधता रद्द कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे मामलों का तत्काल समाधान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 29 अगस्त को प्रस्तावित आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार के आश्वासन ठोस कार्रवाई में नहीं बदल जाते।
जरांगे से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि सरकार मराठा समुदाय के सदस्यों की ओर से मांगे जा रहे कुंभी जाति प्रमाणपत्र जारी करने और उनकी वैधता की प्रक्रिया में मौजूद खामियों और प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने के लिए काम कर रही है।
सरकार ने किन अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही?
मंत्री ने कहा, "हमने जरांगे से आंदोलन शुरू करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। दो या तीन दिनों के भीतर हम समस्याओं का समाधान कर देंगे।" विखे पाटिल ने स्वीकार किया कि मराठा समुदाय के लिए आरक्षण लागू करने में कुछ "देरी और गलतियां" हुई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सुधारात्मक कदम उठा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी अधिकारी प्रमाणपत्र जारी करने और उनकी वैधता की प्रक्रिया में अड़चन पैदा कर रहे हैं और इस तरह सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्री ने कहा, "यह गंभीर मामला है। अगर अधिकारी जिम्मेदार पाए गए तो उन्हें निलंबित किया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।"