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एक्सक्लूसिव: फ्लाईदुबई विमान हमला बड़ी चूक, अब इस्राइल की क्या तैयारी? मोसाद के पूर्व शीर्ष अफसर से खास बातचीत
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई उड़ान में सह-पायलट के हमले ने विमानन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मोसाद के डिविजनल विंग के पूर्व प्रमुख रामी इग्रा ने इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक बताया। उनका कहना है कि पायलट के बारे में पहले जानकारी होती तो उसे रोका जा सकता था। भारतीय कप्तान और यात्रियों ने हालात संभाले, लेकिन क्या ऐसी घटनाएं रोकने के लिए जांच व्यवस्था बदलनी होगी? आइए, विस्तार से जानते हैं कि इस घटना पर मोसाद के पूर्व अफसर ने क्या कुछ कहा...
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मोसाद के पूर्व अधिकारी से की खास बातचीत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में हुई घटना ने विमानन सुरक्षा की बड़ी खामी उजागर कर दी है। मोसाद के डिविजनल विंग के पूर्व हेड रामी इग्रा ने इसे इस्राइली सुरक्षा तंत्र की बड़ी विफलता बताया। उनके मुताबिक अगर मोसाद के पास संबंधित पायलट के बारे में जानकारी होती, तो उसे रोका जाता। उन्होंने कहा कि अब दुनिया भर में पायलटों और क्रू की जांच का तरीका बदलना होगा। पेश है आशीष तिवारी से बातचीत के मुख्य अंश...
सवाल: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट की घटना को आप कैसे देखते हैं?
यह बहुत बड़ी घटना थी। समय रहते नियंत्रण नहीं होता तो बहुतों की जान चली जाती। मुझे लग रहा है कि यह कट्टरपंथी सोच और जिहाद का मामला था। तभी तो शायद उसने हमले की इतनी लंबी योजना बनाई होगी।
सवाल: पायलट लंबे समय से साजिश रच रहा था, तो उसे पहले क्यों नहीं पकड़ा?
इस घटना ने साबित कर दिया कि नागरिक विमानन व्यवस्था ने पायलट को संभावित सुरक्षा खतरे के रूप में उतनी गंभीरता से नहीं देखा। सबसे गंभीर बात यही है कि एक एयरलाइन ने जिसे खतरा मानकर हटाया और दूसरी जगह भी जिसकी समस्या सामने आई, वह किसी अन्य एयरलाइन में पायलट बन गया। यही चूक है।
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सवाल: इस्राइल जैसे देश से चूक कैसे हुई? क्या उसके कट्टरपंथी होने की पूर्व जानकारी थी?
यह निश्चित रूप से बड़ी चूक है। जिस पायलट को कट्टरपंथी गतिविधियों के कारण पहले कई एयरलाइनों से हटाया गया, वह इस्राइल जाने वाली उड़ान तक पहुंच गया, तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठेंगे। मुझे नहीं लगता कि हमारे पास कोई पूर्व जानकारी रही होगी। होती, तो उसे रोक दिया जाता।
सवाल: भारतीय कप्तान और विमान में मौजूद लोग समय पर सतर्क न होते तो बड़ा हादसा हो सकता था?
हम सौभाग्य से बच गए। भारतीय कप्तान ने जान की बाजी लगाकर हमें बचाया और इस्राइल यात्रियों ने कॉकपिट में पहुंचकर स्थिति संभाली। लेकिन हमें समझना होगा कि चमत्कार बार-बार नहीं होते। सुरक्षा व्यवस्था की इस विफलता से हमें सीखना चाहिए।
सवाल: यह अकेले की सोच का हमला था या इसके पीछे कोई नेटवर्क लग रहा है?
मेरी व्यक्तिगत राय में यह लोन वुल्फ का मामला था। इसके पीछे धार्मिक कट्टरपंथ की विचारधारा ही लग रही है। यह पुराने आतंकवाद से बिल्कुल अलग है। पहले आतंकवादी अपनी मांगें रखते थे, यहां मकसद ही जान लेना और जान देना था।
सवाल: क्या दुनिया भर में पायलटों की सुरक्षा जांच में बदलाव होना चाहिए?
बदलाव होने ही चाहिए। पायलटों और क्रू मेंबर्स की ज्यादा कड़ी और लगातार जांच जरूरी है। यात्री की सुरक्षा जांच होती है, लेकिन पायलट के हाथ में तो पूरा विमान होता है। नागरिक विमानन अथॉरिटीज को समझना होगा कि विमान किसी भी वक्त खुद एक बड़ा हथियार बन सकता है। इजरायल सरकार अभी कौन से कदम उठा रही है, यह मुझे नहीं पता, लेकिन उसे ऐसा करना ही होगा।
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सवाल: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट की घटना को आप कैसे देखते हैं?
यह बहुत बड़ी घटना थी। समय रहते नियंत्रण नहीं होता तो बहुतों की जान चली जाती। मुझे लग रहा है कि यह कट्टरपंथी सोच और जिहाद का मामला था। तभी तो शायद उसने हमले की इतनी लंबी योजना बनाई होगी।
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सवाल: पायलट लंबे समय से साजिश रच रहा था, तो उसे पहले क्यों नहीं पकड़ा?
इस घटना ने साबित कर दिया कि नागरिक विमानन व्यवस्था ने पायलट को संभावित सुरक्षा खतरे के रूप में उतनी गंभीरता से नहीं देखा। सबसे गंभीर बात यही है कि एक एयरलाइन ने जिसे खतरा मानकर हटाया और दूसरी जगह भी जिसकी समस्या सामने आई, वह किसी अन्य एयरलाइन में पायलट बन गया। यही चूक है।
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सवाल: इस्राइल जैसे देश से चूक कैसे हुई? क्या उसके कट्टरपंथी होने की पूर्व जानकारी थी?
यह निश्चित रूप से बड़ी चूक है। जिस पायलट को कट्टरपंथी गतिविधियों के कारण पहले कई एयरलाइनों से हटाया गया, वह इस्राइल जाने वाली उड़ान तक पहुंच गया, तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठेंगे। मुझे नहीं लगता कि हमारे पास कोई पूर्व जानकारी रही होगी। होती, तो उसे रोक दिया जाता।
सवाल: भारतीय कप्तान और विमान में मौजूद लोग समय पर सतर्क न होते तो बड़ा हादसा हो सकता था?
हम सौभाग्य से बच गए। भारतीय कप्तान ने जान की बाजी लगाकर हमें बचाया और इस्राइल यात्रियों ने कॉकपिट में पहुंचकर स्थिति संभाली। लेकिन हमें समझना होगा कि चमत्कार बार-बार नहीं होते। सुरक्षा व्यवस्था की इस विफलता से हमें सीखना चाहिए।
सवाल: यह अकेले की सोच का हमला था या इसके पीछे कोई नेटवर्क लग रहा है?
मेरी व्यक्तिगत राय में यह लोन वुल्फ का मामला था। इसके पीछे धार्मिक कट्टरपंथ की विचारधारा ही लग रही है। यह पुराने आतंकवाद से बिल्कुल अलग है। पहले आतंकवादी अपनी मांगें रखते थे, यहां मकसद ही जान लेना और जान देना था।
सवाल: क्या दुनिया भर में पायलटों की सुरक्षा जांच में बदलाव होना चाहिए?
बदलाव होने ही चाहिए। पायलटों और क्रू मेंबर्स की ज्यादा कड़ी और लगातार जांच जरूरी है। यात्री की सुरक्षा जांच होती है, लेकिन पायलट के हाथ में तो पूरा विमान होता है। नागरिक विमानन अथॉरिटीज को समझना होगा कि विमान किसी भी वक्त खुद एक बड़ा हथियार बन सकता है। इजरायल सरकार अभी कौन से कदम उठा रही है, यह मुझे नहीं पता, लेकिन उसे ऐसा करना ही होगा।