फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Nepal Flash Flood vs Chamoli & Kedarnath: What’s Similar, What’s Different?

एक्सप्लेनर: नेपाल का फ्लैश फ्लड चमोली और केदारनाथ से कितना अलग, तीनों हादसों में क्या है समानता?

Fri, 28 Aug 2026 06:23 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Fri, 28 Aug 2026 06:23 AM IST
सार
Register For Event

नेपाल में आई फ्लैश फ्लड ने चमोली और केदारनाथ जैसी पिछली हिमालयी आपदाओं की याद दिला दी है। हालांकि तीनों घटनाओं के पीछे प्राकृतिक प्रक्रियाएं अलग रहीं, लेकिन अचानक पानी और मलबे के तेज प्रवाह ने इन्हें एक-दूसरे से जोड़ा। ऐसे में इन हादसों की वजह, इनके असर और आपस की समानता को समझना जरूरी है।

विज्ञापन
Nepal Flash Flood vs Chamoli & Kedarnath: What’s Similar, What’s Different?
जल प्रलय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नेपाल में तिब्बत से शुरू हुई अचानक और तेज बाढ़ ने रसुवा और धाडिंग जिलों में भारी तबाही मचाई। अब तक 300 से ज्यादा लोगों की मौत और 288 भारतीय नागरिकों समेत एक हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। शुरुआती आकलन में इस घटना के पीछे तिब्बत में हिमस्खलन और हिमताल विस्फोट की आशंका जताई गई है। घटना के स्वरूप की तुलना 2021 को उत्तराखंड के चमोली में आई बाढ़ और 2013 में केदारनाथ में हुई आपदा से की जा रही है।

विज्ञापन


ऐसे में आइए जानते हैं कि नेपाल में आई बाढ़ का क्या-क्या कारण बताया गया? 2021 में चमोली में क्या हुआ था? 2013 में केदारनाथ में क्या हुआ था? नेपाल की घटना चमोली से कितनी मिलती है? केदारनाथ त्रासदी और इसमें क्या समानता है? 

विज्ञापन

नेपाल में अचानक बाढ़ कैसे आई?

रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ा। शुरुआती उपग्रह विश्लेषण में तिब्बत-नेपाल सीमा के पास बर्फ और चट्टान का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आने की जानकारी सामने आई। इसके बाद ल्हेन्दे नदी में मलबे के साथ तेज पानी का प्रवाह बना। यह प्रवाह आगे भोटेकोशी नदी और फिर त्रिशूली नदी तक पहुंचा। नेपाल के राष्ट्रीय विपदा जोखिम न्यूनीकरण और व्यवस्थापन प्राधिकरण को भी शुरुआती विश्लेषण में बर्फ और चट्टान के भूस्खलन के बाद ल्हेन्दे नदी में तेज प्रवाह बनने की जानकारी मिली।

भूकंप वाली शुरुआती जानकारी बाद में क्यों बदली?

घटना के शुरुआती घंटों में तिब्बत-नेपाल सीमा के पास 4.4 तीव्रता के भूकंप की जानकारी सामने आई थी। नेपाल के विदेश मंत्री ने भी शुरुआती जानकारी के आधार पर भूकंप को संभावित वजह बताया था। बाद में अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण यानी यूएसजीएस ने इस भूकंपीय संकेत का विश्लेषण किया। उसके मुताबिक, वहां कोई भूकंप नहीं आया था। जो संकेत रिकॉर्ड हुआ था, वह ग्लेशियर, बर्फ और चट्टान के अचानक टूटने व उसके बाद हुए मलबे के प्रवाह से पैदा हुआ था। इस बदलाव के बाद नेपाल की बाढ़ के पीछे भूकंप को कारण मानने के बजाय ग्लेशियर और चट्टान के टूटने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है।

हिमताल फटने की आशंका क्यों जताई गई?

हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में ग्लेशियरों के आसपास पानी जमा होने से हिमताल बनते हैं। इन झीलों को रोकने वाला प्राकृतिक बांध टूट जाए तो बड़ी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमताल विस्फोट से आई बाढ़ कहा जाता है।

नेपाल के जल और मौसम विज्ञान विभाग ने भी इस संभावना की जांच की थी। इस क्षेत्र में कई बड़े हिमताल मौजूद हैं। 8 जुलाई 2025 को इसी ल्हेन्दे नदी में अचानक बाढ़ आई थी और उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण में उस घटना का मुख्य कारण हिमताल विस्फोट पाया गया था।

हालांकि मौजूदा घटना में नए विश्लेषण ग्लेशियर, बर्फ और चट्टान के अचानक टूटने की प्रक्रिया की ओर भी इशारा कर रहे हैं। इसलिए इस घटना का अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

भारी बारिश नहीं हुई, फिर बाढ़ कैसे आई?

नेपाल के जल और मौसम विज्ञान विभाग के विशेष अपडेट के मुताबिक, मंगलवार और बुधवार को इस इलाके में भारी बारिश नहीं हुई थी। इसके बावजूद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इसलिए मौजूदा जानकारी में सामान्य मानसूनी बारिश को इस बाढ़ का तत्काल कारण नहीं बताया गया है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्र से अचानक इतना पानी और मलबा किस प्रक्रिया के जरिए नीचे आया।

Nepal Flash Flood vs Chamoli & Kedarnath: What’s Similar, What’s Different?
चमोली जल प्रलय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

2021 में चमोली में क्या हुआ था?

7 फरवरी 2021 को उत्तराखंड के चमोली जिले में ऋषिगंगा, धौलीगंगा और अलकनंदा नदी घाटियों में अचानक तेज बाढ़ आई थी। शुरुआत में इसे ग्लेशियल झील फटने से जुड़ी घटना माना गया था, लेकिन बाद के वैज्ञानिक अध्ययन में ऐसी किसी बड़ी झील के मौजूद होने की पुष्टि नहीं हुई।

आईसीआईएमओडी के अध्ययन के मुताबिक, बाढ़ की शुरुआत रोंती चोटी के ठीक नीचे हुए एक विशाल चट्टानी भूस्खलन से हुई थी। इस घटना में करीब 200 लोगों की जान गई थी।

5,500 मीटर की ऊंचाई पर हुआ था भूस्खलन

रोंती चोटी के करीब 5,500 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ का लगभग 2.2 करोड़ घन मीटर हिस्सा टूटकर नीचे गिरा था। इसमें करीब 85 प्रतिशत चट्टान और 15 प्रतिशत बर्फ थी। इसका कुल भार करीब 5.2 करोड़ टन आंका गया था। यह हिस्सा करीब 1.6 किलोमीटर नीचे की ओर तेजी से खिसका। चट्टान और बर्फ के इस तेज प्रवाह के दौरान कुछ बर्फ पिघली और पानी बना।

पानी के साथ बहा बर्फ और मलबा

बर्फ पिघलने से बना पानी घाटी की ओर बहा और अपने साथ चट्टान, बर्फ, मिट्टी और पहले से मौजूद मलबा भी ले गया। 2016 में इसी इलाके में एक बड़ा हिमस्खलन हुआ था। इसमें करीब 72 लाख घन मीटर बर्फ नीचे आई थी और करीब 1.5 करोड़ घन मीटर बर्फ तथा चट्टानों का मलबा घाटी में जमा हुआ था। 2021 की घटना में इस पुराने मलबे और बर्फ का कुछ हिस्सा भी नए प्रवाह में शामिल हो गया। इसके बाद प्रवाह ऋषिगंगा नदी तक पहुंचा। रास्ते में मौजूद जल-संग्रह और ऋषिगंगा जलविद्युत परियोजना के बांध में जमा पानी भी इसमें शामिल हुआ।

चमोली में प्रवाह कितनी तेजी से आया था?

आईसीआईएमओडी के मुताबिक, चट्टान के गिरने की शुरुआती गति करीब 60 से 90 मीटर प्रति सेकंड रही होगी। इसके बाद बना मलबे का प्रवाह औसतन करीब 20 मीटर प्रति सेकंड की गति से नीचे आया। यह प्रवाह करीब 18 मिनट में तपोवन जलविद्युत परियोजना तक पहुंच गया था। उस समय करीब 1,000 घन मीटर पानी प्रति सेकंड की मात्रा आगे बढ़ने का अनुमान लगाया गया था।

विज्ञापन

Nepal Flash Flood vs Chamoli & Kedarnath: What’s Similar, What’s Different?
केदारनाथ हादसा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

2013 में केदारनाथ में क्या हुआ था?

केदारनाथ क्षेत्र में 16 जून 2013 की शाम से 17 जून की सुबह तक कई प्राकृतिक घटनाएं हुई थीं। अध्ययन के मुताबिक, इनमें भूस्खलन, नदी में अवरोध बनना, अवरोध का टूटना, बाढ़ और नदी किनारे का टूटना शामिल था।

इसके बाद चोराबाड़ी ताल से जुड़ी बाढ़ आई। इसके साथ भूस्खलन और नदी किनारे का कटाव भी हुआ। इस आपदा में उत्तराखंड में 5,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग लापता हो गए थे।

केदारनाथ में दो अलग-अलग घटनाएं हुई थीं

हावर्ड की रिसर्च के मुताबिक, केदारनाथ में दो अलग-अलग घटनाएं हुई थीं और इनके बीच करीब 10 से 12 घंटे का अंतर था। पहली घटना में कई भूस्खलन हुए, जिनसे नदी में अवरोध बने। बाद में ये अवरोध टूटे और बाढ़ आई। दूसरी घटना चोराबाड़ी ताल के फटने से आई बाढ़ से जुड़ी थी। इसके साथ भूस्खलन और नदी किनारे का कटाव भी हुआ।

नेपाल की घटना चमोली से कितनी मिलती है?

नेपाल और चमोली में प्राकृतिक घटना का प्रकार अलग बताया गया है। चमोली में वैज्ञानिक अध्ययन ने विशाल चट्टानी भूस्खलन को बाढ़ की शुरुआत का कारण बताया था। नेपाल में अभी ग्लेशियर, बर्फ और चट्टान के अचानक टूटने व उससे बने मलबे के प्रवाह की जांच की जा रही है। दोनों घटनाओं में ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में अचानक हुई प्राकृतिक घटना के बाद पानी और मलबे का प्रवाह नदी घाटी की ओर पहुंचा।

Nepal Flash Flood vs Chamoli & Kedarnath: What’s Similar, What’s Different?
जल प्रलय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

नेपाल की घटना केदारनाथ से कितनी मिलती है?

केदारनाथ में आपदा के दौरान अलग-अलग प्राकृतिक घटनाओं के बाद पानी और मलबे का प्रवाह नीचे की ओर पहुंचा था। नेपाल में भी ऊंचाई वाले क्षेत्र में हुई प्राकृतिक घटना के बाद ल्हेन्दे नदी से पानी और मलबा नीचे आया और आगे भोटेकोशी व त्रिशूली नदी तंत्र तक पहुंचा। हालांकि दोनों घटनाओं में प्राकृतिक घटनाओं का क्रम और तत्काल कारण अलग हैं।

तीनों घटनाओं में क्या समान है?

तीनों घटनाओं में हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्र और नदी घाटियों की भूमिका रही। अचानक हुई प्राकृतिक घटनाओं के बाद पानी के साथ चट्टान, बर्फ, मिट्टी और मलबा नीचे की ओर आया। नेपाल में मौजूदा जांच ग्लेशियर, बर्फ और चट्टान के टूटने से बने प्रवाह पर केंद्रित है। चमोली में चट्टानी भूस्खलन के बाद पानी और मलबे का प्रवाह बना था। केदारनाथ में भूस्खलन, नदी अवरोध और चोराबाड़ी ताल से जुड़ी बाढ़ की घटनाएं हुई थीं।

चमोली में मौसम की क्या भूमिका थी?

चमोली हादसे से पहले इलाके में बारिश और बर्फबारी हुई थी। 3 से 5 फरवरी 2021 के बीच करीब 58 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी। ऊंचाई वाले इलाकों में इसका बड़ा हिस्सा बर्फ के रूप में गिरा होगा। 4 से 6 फरवरी के बीच मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय था, जिसके कारण भारी वर्षण हुआ था। आईसीआईएमओडी के मुताबिक, इन मौसम संबंधी परिस्थितियों ने नीचे की ओर आई बाढ़ की तीव्रता बढ़ाने में भूमिका निभाई थी। नेपाल की मौजूदा घटना में जल और मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक मंगलवार और बुधवार को भारी बारिश नहीं हुई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed