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रेलवे: ट्रैक पर हाथियों की एंट्री होते ही मिलेगा अलर्ट,जानें ‘प्लान बी’ से कैसे टलेगी ट्रेन-हाथी टक्कर
Mon, 05 Oct 2026 02:02 PM IST
राहुल संपाल
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल संपाल
Updated Mon, 05 Oct 2026 02:02 PM IST
रेलवे का कहना है कि हाथियों की सुरक्षा के साथ सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिए तकनीक आधारित निगरानी, जमीनी स्तर पर सतर्कता और वन विभाग के साथ समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
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ट्रेन-हाथी टक्कर रोकने को रेलवे की खास तैयारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
हाथियों के ट्रेन से टकराने की घटनाओं को देखते हुए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने ऐसी दुर्घटनाएं रोकने के लिए एआई आधारित तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच इन तकनीकों और समय पर की गई कार्रवाई से 255 हाथियों को बचाने में मदद मिली। रेलवे ने इसके लिए एआई अलर्ट, गति प्रतिबंध, गश्त बढ़ाने और 'प्लान बी' सिस्टम का इस्तेमाल किया।
एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा के मुताबिक, अलीपुरद्वार, रंगिया, लुमडिंग और तिनसुकिया मंडल में हाथियों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। इनमें अलीपुरद्वार में 106, रंगिया में 14, लुमडिंग में 122 और तिनसुकिया मंडल में 15 हाथियों को समय पर कार्रवाई कर बचाया गया।
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ट्रैक के पास हाथी आते ही एआई देगा अलर्ट
एनएफआर ने संवेदनशील इलाकों में एआई आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम लगाया है। यह डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सिस्टम तकनीक की मदद से रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की गतिविधि का पता लगाता है। हाथियों की मौजूदगी मिलते ही सिस्टम रियल टाइम अलर्ट देता है। इससे रेलवे कर्मचारी समय पर कार्रवाई कर सकते हैं और ट्रेन चालक दल को भी सतर्क किया जा सकता है।
हाथियों की आवाजाही की सूचना मिलने पर रेलवे अस्थायी और रात के समय गति प्रतिबंध भी लागू करता है। संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त, झाड़ियों की सफाई और चेतावनी संकेत लगाने का काम भी किया जा रहा है।
मधुमक्खियों की आवाज से हाथियों को ट्रैक से दूर रखने की कोशिश
रेलवे ने संवेदनशील स्थानों पर ‘प्लान बी’ सिस्टम भी लगाया है। इसमें मधुमक्खियों की तेज आवाज का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे हाथियों को रेलवे ट्रैक की ओर आने से रोका जा सके। इसके अलावा चिन्हित स्थानों पर अंडरपास बनाए जा रहे हैं, ताकि वन्यजीवों को सुरक्षित रास्ता मिल सके और हाथियों को ट्रैक पार न करना पड़े।
ट्रैक पर खाना फेंकने से रोकने के लिए जागरूकता
रेलवे कर्मचारियों, ट्रेन चालक दल, पैंट्री कार स्टाफ और यात्रियों को ट्रैक के पास खाने का कचरा नहीं फेंकने के लिए जागरूक किया जा रहा है। रेलवे के मुताबिक, खाने का कचरा हाथियों और दूसरे जानवरों को ट्रैक की ओर आकर्षित कर सकता है। एनएफआर वन विभाग के साथ लगातार संपर्क में है। हाथियों की आवाजाही की सूचना मिलते ही दोनों विभागों के बीच रियल टाइम जानकारी साझा की जाती है, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।
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हर ट्रेन-हाथी टक्कर की होगी जांच
एनएफआर के मुताबिक, ट्रेन और हाथियों की टक्कर से जुड़े हर मामले को गंभीरता से लिया जाता है। ऐसे मामलों की निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत जांच की जाती है। रेलवे का कहना है कि हाथियों की सुरक्षा के साथ सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिए तकनीक आधारित निगरानी, जमीनी स्तर पर सतर्कता और वन विभाग के साथ समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
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एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा के मुताबिक, अलीपुरद्वार, रंगिया, लुमडिंग और तिनसुकिया मंडल में हाथियों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। इनमें अलीपुरद्वार में 106, रंगिया में 14, लुमडिंग में 122 और तिनसुकिया मंडल में 15 हाथियों को समय पर कार्रवाई कर बचाया गया।
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ट्रैक के पास हाथी आते ही एआई देगा अलर्ट
एनएफआर ने संवेदनशील इलाकों में एआई आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम लगाया है। यह डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सिस्टम तकनीक की मदद से रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की गतिविधि का पता लगाता है। हाथियों की मौजूदगी मिलते ही सिस्टम रियल टाइम अलर्ट देता है। इससे रेलवे कर्मचारी समय पर कार्रवाई कर सकते हैं और ट्रेन चालक दल को भी सतर्क किया जा सकता है।
हाथियों की आवाजाही की सूचना मिलने पर रेलवे अस्थायी और रात के समय गति प्रतिबंध भी लागू करता है। संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त, झाड़ियों की सफाई और चेतावनी संकेत लगाने का काम भी किया जा रहा है।
मधुमक्खियों की आवाज से हाथियों को ट्रैक से दूर रखने की कोशिश
रेलवे ने संवेदनशील स्थानों पर ‘प्लान बी’ सिस्टम भी लगाया है। इसमें मधुमक्खियों की तेज आवाज का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे हाथियों को रेलवे ट्रैक की ओर आने से रोका जा सके। इसके अलावा चिन्हित स्थानों पर अंडरपास बनाए जा रहे हैं, ताकि वन्यजीवों को सुरक्षित रास्ता मिल सके और हाथियों को ट्रैक पार न करना पड़े।
ट्रैक पर खाना फेंकने से रोकने के लिए जागरूकता
रेलवे कर्मचारियों, ट्रेन चालक दल, पैंट्री कार स्टाफ और यात्रियों को ट्रैक के पास खाने का कचरा नहीं फेंकने के लिए जागरूक किया जा रहा है। रेलवे के मुताबिक, खाने का कचरा हाथियों और दूसरे जानवरों को ट्रैक की ओर आकर्षित कर सकता है। एनएफआर वन विभाग के साथ लगातार संपर्क में है। हाथियों की आवाजाही की सूचना मिलते ही दोनों विभागों के बीच रियल टाइम जानकारी साझा की जाती है, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।
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हर ट्रेन-हाथी टक्कर की होगी जांच
एनएफआर के मुताबिक, ट्रेन और हाथियों की टक्कर से जुड़े हर मामले को गंभीरता से लिया जाता है। ऐसे मामलों की निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत जांच की जाती है। रेलवे का कहना है कि हाथियों की सुरक्षा के साथ सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिए तकनीक आधारित निगरानी, जमीनी स्तर पर सतर्कता और वन विभाग के साथ समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है।