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Explainer: क्यों बढ़ रहे प्याज के दाम; क्या है कांदा एक्सप्रेस, जिससे कीमतें नियंत्रित करने की कोशिश में सरकार
Tue, 25 Aug 2026 09:24 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 25 Aug 2026 09:24 AM IST
देश भर में प्याज की कीमतें 17% तक बढ़ गई हैं। जानिए प्याज महंगा होने के मुख्य कारण, विभिन्न राज्यों के आंकड़े और कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार की 'कांदा एक्सप्रेस' योजना।
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भारत में एक साल बाद 50 फीसदी से ज्यादा ऊपर हैं प्याज के दाम।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत में शक्कर के बाद अब प्याज के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। बीते एक हफ्ते की ही बात कर लें तो प्याज की कीमतों में करीब 17 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आलम यह है कि कई राज्यों में इस वक्त प्याज की औसत कीमतें 50 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर पहुंच गई हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने महंगाई को नियंत्रित करने और खासकर प्याज के बढ़े दामों को काबू में लाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में केंद्र की तरफ से अब कांदा एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जो कि नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे शहरों में जाएगी और प्याज की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने में भी मदद करेगी।
आइये जानते हैं कि बीते कुछ दिनों में प्याज की कीमतों के क्या हाल रहे हैं? किन राज्यों में प्याज की कीमतें कितनी बढ़ी हैं? प्याज के दाम में उछाल आने की क्या वजहें हैं? सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठा रही है? आइये जानते हैं...
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आइये जानते हैं कि बीते कुछ दिनों में प्याज की कीमतों के क्या हाल रहे हैं? किन राज्यों में प्याज की कीमतें कितनी बढ़ी हैं? प्याज के दाम में उछाल आने की क्या वजहें हैं? सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठा रही है? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- कहां-क्या हैं प्याज की कीमतों के हाल?
24 अगस्त को भारत के अलग-अलग हिस्सों में प्याज की खुदरा कीमतों में काफी तेजी देखी गई। सरकारी उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को देश भर में प्याज का औसत खुदरा मूल्य 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जबकि शनिवार को यह 42 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था।दिल्ली-एनसीआर: यहां प्याज की खुदरा कीमतें 50 से 55 रुपये प्रति किलो के बीच हैं, जबकि शनिवार के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कुछ बाजारों में खुदरा दाम 65 प्रति किलो तक पहुंच गए थे।
चेन्नई: चेन्नई में प्याज की सामान्य खुदरा दरें 48 रुपये से 54 रुपये प्रति किलो के दायरे में हैं। हालांकि, कुछ मंडियों में शनिवार को यह 58 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिका।
मुंबई: मुंबई में उपभोक्ताओं को प्याज के लिए 52 से 58 रुपये प्रति किलो का भुगतान करना पड़ रहा है।
कोलकाता: कोलकाता में प्याज की खुदरा दरें 55 से 60 रुपये प्रति किलो के आसपास हैं।
बंगलूरू: यहां प्याज खुदरा बाजार में 45 से 52 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
मुंबई: मुंबई में उपभोक्ताओं को प्याज के लिए 52 से 58 रुपये प्रति किलो का भुगतान करना पड़ रहा है।
कोलकाता: कोलकाता में प्याज की खुदरा दरें 55 से 60 रुपये प्रति किलो के आसपास हैं।
बंगलूरू: यहां प्याज खुदरा बाजार में 45 से 52 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
भारत में बढ़ रहे प्याज के दाम।
- फोटो : अमर उजाला
अब जानें- एक हफ्ते पहले कितनी थी प्याज की कीमतें?
अगर औसत आंकड़ों की बात करें तो 17 अगस्त से 24 अगस्त के बीच प्याज की खुदरा कीमतों में करीब 6.33 रुपये की बढ़त दर्ज की गई है। यानी बीते एक हफ्ते में ही देश में प्याज की कीमतों में औसतन 17 फीसदी का उछाल आया है।ये भी पढ़ें: Explainer: चीनी के बाद प्याज के भी बढ़ने लगे दाम, त्योहारों के पहले और कितना बढ़ेगा आपकी रसोई का बजट?
भारत में प्याज के बढ़ते दाम।
- फोटो : अमर उजाला
एक महीने पहले प्याज की कीमतें क्या थीं?
अगर हम एक महीने पहले और 24 अगस्त के आंकड़ों की तुलना करें, तो प्याज की कीमतों में भारी बढ़ोतरी आई है। एक महीने में प्याज का देश में औसत दाम 35.01 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलो हो गया है। यानी केवल 30 दिनों में प्याज की कीमतों में लगभग 8.52 रुपये प्रति किलोग्राम का भारी उछाल आया है। यानी करीब 24.30% की बढ़ोतरी। यहां तक कि प्याज के अधिकतम मूल्य में भी बढ़ोतरी हुई है और यह 67 रुपये से बढ़कर 77 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।ये भी पढ़ें: यूपी: आखिर क्यों बढ़ रही हैं प्याज की कीमतें? 15 दिन में 20 रुपये प्रति किलो दाम बढ़े
एक महीना पहले प्याज की कीमतें।
- फोटो : अमर उजाला
एक साल पहले क्या थे प्याज के दाम?
पिछले साल 24 अगस्त 2025 की तुलना में 24 अगस्त 2026 को देश में प्याज का औसत खुदरा मूल्य करीब 16.16 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ चुका है, जो कि 59 प्रतिशत की वृद्धि है।दिल्ली-एनसीआर में भारी सालाना वृद्धि: दिल्ली में एक साल के अंदर प्याज की सरकारी औसत दर 35 रुपये प्रति किलो से बढ़कर सीधे 55 रुपये प्रति किलो हो गई है, जो 20 रुपये प्रति किलो (करीब 57%) की सीधी छलांग को दर्शाती है।
उत्पादक क्षेत्र में भी महंगाई की मार: प्याज के सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में भी कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। यहां औसत सरकारी मूल्य पिछले साल 27.42 रुपये प्रति किलो था, जो आज बढ़कर 42.05 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया है।
ओडिशा में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी: यहां एक साल में सबसे तीव्र बढ़ोतरी देखी गई है। प्याज का औसत दाम 26.47 से बढ़कर 48.70 रुपये प्रति किलो है जो कि पिछले साल के मुकाबले 22.23 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी है। सीधे तौर पर देखें तो पिछले साल के मुकाबले प्याज की कीमत ओडिशा में करीब 84 फीसदी ऊपर है।
पंजाब में भी आसमान पर कीमत: पंजाब में प्याज का औसत मूल्य पिछले साल के 28.25 रुपये से बढ़कर 24 अगस्त 2026 तक 49.87 रुपये प्रति किलो हो गई है। यह 21.62 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दिखाता है, जो कि पिछले साल के भाव से 76.5% प्रतिशत ज्यादा है।
पंजाब में भी आसमान पर कीमत: पंजाब में प्याज का औसत मूल्य पिछले साल के 28.25 रुपये से बढ़कर 24 अगस्त 2026 तक 49.87 रुपये प्रति किलो हो गई है। यह 21.62 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दिखाता है, जो कि पिछले साल के भाव से 76.5% प्रतिशत ज्यादा है।
भारत में एक साल पहले प्याज के भाव।
- फोटो : अमर उजाला
प्याज के दाम में उछाल आने की क्या वजहें रही है?
सरकारी आंकड़ों और बाजार के विश्लेषण के मुताबिक, प्याज की कीमतों में आए इस हालिया उछाल के पीछे कई अहम मौसमी, भौगोलिक और बाजार-संबंधी कारण हैं।1. रबी स्टॉक समय से पहले खत्म हुआ
भारत अपनी मुख्य आपूर्ति के लिए मार्च-अप्रैल में काटी जाने वाली रबी प्याज की फसल पर निर्भर रहता है, जो कोल्ड स्टोरेज के माध्यम से अक्तूबर तक बाजार में आपूर्ति बनाए रखती है। इस साल पुराना संग्रहित रबी स्टॉक उम्मीद से बहुत तेजी से खत्म हो रहा है।
2. बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों का नुकसान
इस वर्ष मार्च और अप्रैल के दौरान सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में अचानक बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि हुई। इसने देर से पकने वाली रबी की फसल को तो नुकसान पहुंचाया ही, साथ ही जो प्याज स्टोर करके रखा गया था, उसकी गुणवत्ता को भी खराब कर दिया जिससे वह लंबे समय तक टिक नहीं पाया।
ये भी पढ़ें: Onion: प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 'कांदा एक्सप्रेस', 35 रुपये किलो के भाव पर मिलेगा प्याज
3. खरीफ की नई फसल की बुवाई में देरी
मानसून के देरी से आने की वजह से महाराष्ट्र के मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में खरीफ प्याज की बुवाई काफी पिछड़ गई। इसके चलते नई खरीफ प्याज की बाजार में आवक बेहद धीमी है, जिससे आपूर्ति में भारी कमी आई है।
4. उत्पादन में भी गिरावट
प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में इस बार बुवाई का रकबा कम रहने और मानसून में देरी की वजह से इस साल खरीफ प्याज के उत्पादन में पांच से सात फीसदी की गिरावट आने की रिपोर्ट है, जिसने बाजार की धारणा को काफी प्रभावित किया है।
5. त्योहारी सीजन के कारण बढ़ी मांग
आगामी त्योहारी सीजन के चलते देश भर के बाजारों में प्याज की मांग में अचानक काफी तेजी आई है। मांग की इस बढ़त ने पहले से ही कम चल रही आपूर्ति और मांग के अंतर को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
मानसून के देरी से आने की वजह से महाराष्ट्र के मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में खरीफ प्याज की बुवाई काफी पिछड़ गई। इसके चलते नई खरीफ प्याज की बाजार में आवक बेहद धीमी है, जिससे आपूर्ति में भारी कमी आई है।
4. उत्पादन में भी गिरावट
प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में इस बार बुवाई का रकबा कम रहने और मानसून में देरी की वजह से इस साल खरीफ प्याज के उत्पादन में पांच से सात फीसदी की गिरावट आने की रिपोर्ट है, जिसने बाजार की धारणा को काफी प्रभावित किया है।
5. त्योहारी सीजन के कारण बढ़ी मांग
आगामी त्योहारी सीजन के चलते देश भर के बाजारों में प्याज की मांग में अचानक काफी तेजी आई है। मांग की इस बढ़त ने पहले से ही कम चल रही आपूर्ति और मांग के अंतर को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
भारत में एक साल के अंदर कितने बढ़े प्याज के दाम।
- फोटो : अमर उजाला
6. व्यापारियों की ओर से कृत्रिम मूल्य वृद्धि
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, बाजार में आपूर्ति की इस अस्थायी कमी का फायदा उठाकर कुछ बिचौलियों या व्यापारियों द्वारा कीमतों को कृत्रिम रूप से भी ऊपर की तरफ धकेला जा रहा है।
कांदा एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन की शुरुआत
देश के जिन प्रमुख क्षेत्रों और महानगरों में प्याज की खुदरा कीमतें राष्ट्रीय औसत से बहुत ज्यादा हैं, जैसे- दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी, वहां आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार कांदा एक्सप्रेस का संचालन आज से शुरू कर रही है। यह विशेष मालगाड़ियां होंगी, जिन्हें सिर्फ प्याज लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ये ट्रेनें मुख्य उत्पादक केंद्र नासिक (महाराष्ट्र) से बफर स्टॉक का प्याज सीधे इन शहरों तक तेजी से पहुंचाएंगी ताकि बाजार में कमी को दूर किया जा सके।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, बाजार में आपूर्ति की इस अस्थायी कमी का फायदा उठाकर कुछ बिचौलियों या व्यापारियों द्वारा कीमतों को कृत्रिम रूप से भी ऊपर की तरफ धकेला जा रहा है।
सरकार अब प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कर रही?
केंद्र सरकार अब प्याज की उपलब्धता और इसकी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी कर रही है। न सिर्फ इसके लिए बफर स्टॉक को इस्तेमाल किया जाना है, बल्कि प्याज की सप्लाई के लिए विशेष कांदा एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन तय किया गया है।कांदा एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन की शुरुआत
देश के जिन प्रमुख क्षेत्रों और महानगरों में प्याज की खुदरा कीमतें राष्ट्रीय औसत से बहुत ज्यादा हैं, जैसे- दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी, वहां आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार कांदा एक्सप्रेस का संचालन आज से शुरू कर रही है। यह विशेष मालगाड़ियां होंगी, जिन्हें सिर्फ प्याज लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ये ट्रेनें मुख्य उत्पादक केंद्र नासिक (महाराष्ट्र) से बफर स्टॉक का प्याज सीधे इन शहरों तक तेजी से पहुंचाएंगी ताकि बाजार में कमी को दूर किया जा सके।
बफर स्टॉक से प्याज बाजार में कीमतें कम करने की तैयारी
सरकार आज से अपने प्याज के बफर स्टॉक को बाजार में जारी करना शुरू कर रही है। इस स्टॉक को चरणबद्ध और सुनियोजित तरीके से उन बाजारों में उतारा जाएगा जहां दाम बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। इसका मकसद उपभोक्ताओं को राहत देना और बाजार में प्याज की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
कृत्रिम रूप से दाम बढ़ाने वाले व्यापारियों पर लगाम
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, बाजार में आपूर्ति की इस अस्थायी कमी का फायदा उठाकर कुछ व्यापारी या बिचौलिए कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ा रहे हैं। सरकार की ओर से सुनियोजित तरीके से बफर स्टॉक का प्याज जारी किए जाने से इन व्यापारियों पर दबाव बनेगा और वे मनमाने ढंग से कीमतें नहीं बढ़ा पाएंगे।
सरकार आज से अपने प्याज के बफर स्टॉक को बाजार में जारी करना शुरू कर रही है। इस स्टॉक को चरणबद्ध और सुनियोजित तरीके से उन बाजारों में उतारा जाएगा जहां दाम बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। इसका मकसद उपभोक्ताओं को राहत देना और बाजार में प्याज की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
कृत्रिम रूप से दाम बढ़ाने वाले व्यापारियों पर लगाम
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, बाजार में आपूर्ति की इस अस्थायी कमी का फायदा उठाकर कुछ व्यापारी या बिचौलिए कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ा रहे हैं। सरकार की ओर से सुनियोजित तरीके से बफर स्टॉक का प्याज जारी किए जाने से इन व्यापारियों पर दबाव बनेगा और वे मनमाने ढंग से कीमतें नहीं बढ़ा पाएंगे।
बफर स्टॉक को मजबूत करना और खरीद मूल्य में वृद्धि
चालू वित्त वर्ष के लिए सरकारी एजेंसियों नाफेड और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (एनसीसीएफ) ने बफर स्टॉक के लिए अब तक लगभग 1.2 लाख टन प्याज की खरीद की है। खरीद की इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार ने इसके खरीद मूल्य में काफी बढ़ोतरी की है। इसे मई में तय किए गए 1,270 रुपये प्रति क्विंटल (~12.70 रुपये/किग्रा) से बढ़ाकर पिछले हफ्ते सीधे 2,645 रुपये प्रति क्विंटल (~26.45 रुपये/किग्रा) कर दिया गया।
भंडार की पर्याप्त उपलब्धता तय
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक, उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सरकार और किसानों दोनों के पास आने वाले महीनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में प्याज का स्टॉक उपलब्ध है।
चालू वित्त वर्ष के लिए सरकारी एजेंसियों नाफेड और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (एनसीसीएफ) ने बफर स्टॉक के लिए अब तक लगभग 1.2 लाख टन प्याज की खरीद की है। खरीद की इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार ने इसके खरीद मूल्य में काफी बढ़ोतरी की है। इसे मई में तय किए गए 1,270 रुपये प्रति क्विंटल (~12.70 रुपये/किग्रा) से बढ़ाकर पिछले हफ्ते सीधे 2,645 रुपये प्रति क्विंटल (~26.45 रुपये/किग्रा) कर दिया गया।
भंडार की पर्याप्त उपलब्धता तय
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक, उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सरकार और किसानों दोनों के पास आने वाले महीनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में प्याज का स्टॉक उपलब्ध है।
क्या है कांदा एक्सप्रेस, जिसे दो साल बाद फिर चला रही केंद्र सरकार?
जब देश के कुछ प्रमुख महानगरों और दूरदराज के क्षेत्रों (जैसे दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि, और गुवाहाटी) में प्याज की खुदरा कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक बढ़ जाती हैं, तब सरकार अपने बफर स्टॉक (सुरक्षित भंडार) से प्याज निकालकर इन विशेष ट्रेनों के माध्यम से उन शहरों तक तेजी से पहुंचाती है।सामान्य ट्रकों (सड़क परिवहन) की तुलना में ट्रेन के जरिए बेहद कम समय में और बहुत भारी मात्रा में प्याज खपत वाले बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे बाजारों में अचानक प्याज की आवक बढ़ जाती है, जिससे खुदरा कीमतों में गिरावट आती है और व्यापारियों द्वारा की जाने वाली कृत्रिम मूल्य वृद्धि पर रोक लगती है।
कांदा एक्सप्रेस का इतिहास क्या है?
प्याज संकट के समय त्वरित सरकारी हस्तक्षेप के रूप में 'कांदा एक्सप्रेस' का इतिहास बहुत पुराना नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत 2024 में ही की गई।अक्तूबर 2024: पहली शुरुआत
केंद्र सरकार ने पहली बार प्याज की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए अक्टूबर 2024 में कांदा एक्सप्रेस का संचालन शुरू किया था। 20 अक्तूबर 2024 को पहली कांदा एक्सप्रेस नासिक से रवाना हुई और 42 डिब्बों में लगभग 1,600 टन प्याज लेकर दिल्ली और आसपास के बाजारों में पहुंची। त्योहारी सीजन से ठीक पहले कीमतों को काबू में करने के लिए थोक बाजार में सरकार का यह अब तक का सबसे बड़ा हस्तक्षेप था।
इस प्याज को दिल्ली के बाजारों में 35 रुपये प्रति किलोग्राम के आधार मूल्य पर नीलाम किया गया था, जिसे सरकार ने किसानों से औसतन 28 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा था। इसके तुरंत बाद, 840 टन प्याज लेकर एक और ट्रेन दिल्ली भेजी गई। इसी तरह नाफेड (Nafed) की ओर से 840 टन प्याज चेन्नई और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) द्वारा 840 टन प्याज गुवाहाटी भी विशेष रेलगाड़ियों के जरिए भेजा गया। लखनऊ, वाराणसी और पूर्वोत्तर राज्यों (असम, नागालैंड, मणिपुर) में भी प्याज की थोक आपूर्ति इसी व्यवस्था से की गई थी।
अगस्त 2026: अब दोबारा संचालन
अब, लगभग दो साल बाद 24 अगस्त 2026 (सोमवार) से सरकार ने देश में प्याज की कीमतों में आई अचानक तेजी को देखते हुए एक बार फिर कांदा एक्सप्रेस के संचालन का निर्णय लिया है। इस बार भी नासिक से प्याज भरकर ये विशेष ट्रेनें दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे उच्च मूल्य वाले संवेदनशील क्षेत्रों की ओर भेजी जा रही हैं ताकि उपभोक्ताओं को राहत दी जा सके।