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फॉर्म-6 पर गरमाई सियासत: सीईसी के खिलाफ विपक्ष ने खोला मोर्चा, पूछा- जनता को बताएं आखिर बदलाव किसने किए?
Tue, 06 Oct 2026 11:20 AM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:20 AM IST
सुप्रीम कोर्ट द्वारा संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दिए जाने की टिप्पणी के बाद इंडिया ब्लॉक ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर निशाना तेज कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी का हवाला देकर देश को गुमराह किया है।
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सीईसी ज्ञानेश कुमार
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
इंडिया ब्लॉक के चुनाव आयोग तक मार्च से पहले मंगलवार को आरजेडी सांसद मनोज झा और सीपीआई सांसद पी. संदोश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की उस हालिया टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें अदालत ने साफ किया कि उसने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को मंजूरी नहीं दी थी। विपक्ष ने इसे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बताते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में निष्पक्ष चुनाव को लेकर भरोसा नहीं बचा है।
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‘जब सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी ही नहीं दी तो तैयारी कैसी?’
मनोज झा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अब किसी और तैयारी की जरूरत ही क्या रह गई है। उन्होंने कहा, 'कल माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने फॉर्म-6 को मंजूरी तक नहीं दी थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी एकतरफा फैसलों को रद्द किया जाना चाहिए। तो फिर क्या कोई और तैयारी बाकी है?' झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधे निशाना साधते हुए कहा, 'उनकी अध्यक्षता में कोई चुनाव निष्पक्ष नहीं हो सकता।'
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‘लोकतंत्र को फिर उसकी पूरी ताकत देनी होगी’
आरजेडी सांसद ने कहा कि विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के सामने अपनी चिंताएं रखने जा रहे हैं। उन्होंने देश में लोकतंत्र की स्थिति पर भी सवाल उठाया और कहा कि अब जरूरत है कि भारतीय लोकतंत्र को उसकी पूरी ताकत और गरिमा वापस दिलाई जाए। झा के मुताबिक, 'आज जब हम चुनाव आयोग की ओर बढ़ रहे हैं, तो देश को एक सीमित और कमजोर स्थिति में पहुंचा दिया गया है। हमें अपने लोकतंत्र के उस भव्य स्वरूप को फिर से बहाल करना होगा, जो इसकी पहचान है।'
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'चुनाव आयोग ने कहा था, सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली थी'
सीपीआई सांसद पी. संदोश कुमार ने भी फॉर्म-6 के मुद्दे पर सीईसी ज्ञानेश कुमार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पहले दावा किया था कि फॉर्म-6 में किए गए बदलाव सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद ही लागू किए गए थे। उन्होंने कहा, 'यह टिप्पणी बेहद गंभीर है, क्योंकि 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने एक बयान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके रुख को मंजूरी दी है। यानी यह बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से ही वे बदलाव लागू किए गए।'
‘सुप्रीम कोर्ट के नाम पर देश को गुमराह किया गया’
संदोश कुमार ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी से साफ हो गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने देश को गुमराह किया। उन्होंने कहा, 'लेकिन कल की टिप्पणी के बाद एक बात बिल्कुल साफ हो गई है। ज्ञानेश कुमार झूठ बोल रहे थे और सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर देश को गुमराह कर रहे थे। यह बेहद गंभीर अपराध है।'
‘वोट चोरी’ के बाद अब फॉर्म-6 भी विपक्ष का नया मुद्दा
सीपीआई सांसद ने कहा कि फॉर्म-6 का विवाद अब सीईसी के खिलाफ विपक्ष के आरोपों में एक और बड़ा मुद्दा बन गया है। उन्होंने इसे विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे कथित “वोट चोरी” के आरोपों से भी जोड़ दिया। संदोश कुमार ने तीखे अंदाज में कहा, 'ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक और आरोप जुड़ गया है। वोट चोरी के अलावा यह भी अब एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। दरअसल, चीफ इलेक्शन कमिश्नर का मतलब ही ‘चोर इलेक्शन कमिश्नर’ हो गया है।'
फॉर्म-6 पर सीजेआई ने क्या कहा था?
फॉर्म-6 को लेकर यह विवाद उस समय और गहरा गया, जब मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा, 'हमने किसी भी संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी है। यह स्पष्ट कर देते हैं। जब रिकॉर्ड हमारे सामने पेश किया जाएगा, तो हम देखना चाहेंगे कि इसे किसने संशोधित किया।'
चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर उतर रहा इंडिया ब्लॉक
इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के नेता और सांसद मंगलवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी में चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने वाले हैं। यह प्रदर्शन विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर किया जा रहा है। विपक्ष लगातार चुनावी मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग उठाता रहा है। इंडिया ब्लॉक के नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में स्पष्टता और जवाबदेही जरूरी है।
‘सेव डेमोक्रेसी’ अभियान से बढ़ेगा टकराव
निर्वाचन सदन तक होने वाला यह मार्च विपक्ष के व्यापक “सेव डेमोक्रेसी” अभियान का हिस्सा है। इस अभियान के तहत इंडिया ब्लॉक के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और अलग-अलग सार्वजनिक कार्यक्रम कर रहे हैं। कई इंडिया ब्लॉक दलों के नेता इस मार्च में शामिल होंगे और चुनाव आयोग के सामने अपनी शिकायतें और चिंताएं रखेंगे। विपक्ष का यह आंदोलन ऐसे समय हो रहा है, जब मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से विपक्ष को मिला नया हथियार
फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने विपक्ष को चुनाव आयोग पर हमला करने का एक नया आधार दे दिया है। मंगलवार के मार्च से पहले इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने इसे गंभीर मुद्दा बनाते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में निर्वाचन सदन तक होने वाला यह मार्च चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर चल रही राजनीतिक लड़ाई को और तेज कर सकता है।